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सावधान! आपके दिमाग़ पर कब्ज़ा कर रही मोदी सरकार!!

M.M. Dhera(Advocate)
@AdvocateDhera
~ सावधान! आपके दिमाग पर कब्जा कर रही मोदी सरकार!!
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सुनने में बात अजीब लगेगी पर सच है।

कहानी की शुरुआत रामदेव और अन्ना हजारे के आंदोलन से हुआ जब कांग्रेस सत्ता में होने के बावजूद मीडिया के दबाव में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तक, पर से एफआईआर दर्ज होने से नहीं रोक सकी।

कोयला आबंटन घोटाले में आरोपी बने थे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह।

हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट से उन्हें क्लीन चिट मिल गया की ऐसा कोई घोटाला हुआ ही नहीं था…

बोफोर्स के मामले में भी यही हाल था जब भाजपा के लोगो द्वारा स्व. राजीव जी को बदनाम किया जा रहा था।

अब वर्तमान के परिपेक्ष्य में मोदी गवर्मेंट पर आते है।

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चाहे इसके लिए जिम्मेदार कोई पीआर हो या सलाहकार हो.. दाद तो देनी पड़ेगी…!!

पब्लिक माइंड पर उसने कब्जा कर लिया।

साहेब का शुरू से बोलबाला था। गुरु आडवाणी 2008 मे फैल हो चुके थे, अब चेले की बारी थी।

साहेब का माहौल 2010-11 से सुर्खियों में आना चालू हुआ, 12-13 तक साहेब के नाम की घोषणा हो गयी कि वही प्रधानमंत्री बनेंगे।

साहेब अर्थात… नरेंद्र दामोदर दास मोदी!!

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साहेब ने देखा मीडिया की पावर कितनी है। साहेब ने देखा कि मीडिया ने अन्ना आंदोलन के बूते दिल्ली गवर्मेंट में सालों से स्थापित कांग्रेस को धराशाही कर दिया।

साहेब ने देखा की उसी आंदोलन के बूते दोबारा भाजपा को पटखनी मिल गयी और फिर से आम आदमी पार्टी की गवर्मेंट बन गयी।

साहेब को ये जुगाड़ पसन्द आ गया। मीडिया की पावर समझ आ गयी।

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असली कहानी यही से शुरू होती है। साहेब ने पब्लिक माइंड को टारगेट करना चालू किया।

मूवी औऱ टीवी सीरियल से लोग मनोरंजन करते है। साहेब ने सबसे पहले न्यूज देखने वालों को टारगेट किया। क्योंकि न्यूज देखने वाले व्यक्ति को हमेसा उस न्यूज को याद करने की चुल होती है। वह हमेसा न्यूज को ऑब्जर्व करता है।

साहेब ने भी वही किया।

उन न्यूज देखने वालों को टारगेट कर के उनके दिमाग मे अपने आईटी सेल का जहर भरना चालू कर दिए।

अब इंसान हमेसा जो देखेगा वही तो बोलेगा. और देख वही रहा जो साहेब दिखा रहे है।

साइकोलॉजिकली अगर कहे तो पब्लिक इंटेलिजेंस लेवल को कम करने का टारगेट था। पब्लिक को देश के असली मुद्दों के बारे में सोचने से रोकना था।

चलिए इक्जाम्पल देता हूँ।

दिखाना था सैन्य समझौता हुआ, पब्लिक के पैसे का हुआ, पर कितने का हुआ…?

दिखाना चालू….लव जेहाद, त्यौहार जेहाद, फलाना- ढेंकाना इतने जेहाद पैदा कर दिए कि इन असली बातों पे दूर दूर तक पब्लिक का ध्यान नहीं जाने वाला। वह भूल चुकी है कि राफेल डील करने के लिए अम्बानी जी साथ क्यों गए थे जरा ये पूछ लें गवर्मेंट से… जिस हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को अभी वर्तमान के सैन्य समझौतों में तवज्जो दिया गया उसे राफेल के वक्त क्यों नही दिया गया..?

क्यों टैक्नोलॉजी ट्रांसफर के दरमियान सारे राफेल को बनाने का टेंडर एक गैर अनुभवी कम्पनी को दिया गया..?

ये तो महज मामूली बात है, बहुत मामले है जिन्हें मैं लिखता गया तो खुद मुद्दे से भटक जाऊंगा….

मैं आंकड़ों पर जाना ही नहीं चाहता।

बस नोएडा मीडिया असलियत और जो आपके साथ हो रहा है वह दिखाना चाहता हूँ आपको।

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जिस मीडिया संस्थान को एक महीने में 1 करोड़ का विज्ञापन मिलता था उसे महीने का 20 से 50 करोड़ यदि दिया जाए तो वह आंख मूंद कर अपने न्यूज स्टूडियो को भाजपा कार्यालय घोषित कर ही देगा। नोएडा मीडिया ने भी वही किया।

साहेब ने भी उसी परसेप्शन को पकड़ा।

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दूरदर्शन से कुछ साहेब का होना जाना था नहीं.गिनी चुनी ऑडिएंस थी उसकी. नतीजतन नोएडा चैनल्स को शरणागत किया। खूब विज्ञापन बांटे, खूब संरक्षण दिया।

बदले में करना क्या था…?

मात्र पेशे से गद्दारी…!!
सवाल पूछना ही नहीं था….

जिन्होंने पूछने की हिम्मत दिखाई वो आज इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को छोड़कर यू ट्यूब से दाल रोटी चला रहे है।

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9 साल में एक औपचारिक पत्रकार वार्ता, जिसमे साहेब ने एक लफ्ज़ मुंह से नहीं निकाला।

पूरे देश को 9 सालों से गैर जरूरी मुद्दों में उलझाया गया। जिसका कुछ काम नोएडा मीडिया ने किया और बचा हुआ काम उनके जहर के मद को एन्जॉय कर रहे कट्टर राष्ट्रभक्तो ने किया।

टोटल प्वाइंट ऑफ व्यू यह है कि टीवी न्यूज ऑडिएंस के माइंड को उनकी बिना अनुमति के कैप्चर कर लिया गया।

उनके ऑब्जर्वेशन के बहाव में मोदी गवर्मेंट के बरगलाने वाले जहर को भी धीरे से बहा कर पब्लिक माइंड में सेटल कर दिया गया। अब उन सभी टीवी न्यूज ऑडिएंस को फलानो और ढेकानो से डर लगने लगा है क्योंकि यह डर उनके मन मे इस नोएडा मीडिया ने कंटिन्यू 9 साल से मैनुपुलेटेड कंटेंट और डिबेट दिखा-दिखा कर बैठा रखा है।

डिस्क्लेमर : लेखक के अपने निजी विचार और जानकारियां हैं, तीसरी जंग हिंदी का कोई सरोकार नहीं है