धर्म

सीरत ए तैय्यबा, जब आप 6 वर्ष के हुए तो मदीना से लौटते हुए…

A Qayyum Hakim
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सीरत ए तैय्यबा
जब आप 6 वर्ष के हुए तो मदीना से लौटते हुए “अब्वा” मुक़ाम पर हज़रत ﷺ की वालिदा बीबी आमिना का इंतेक़ाल हो गया।
हज़रत उम्मे अयमन आपको ले कर मक्का आ गई और आप अपने दादा अब्दुल मुत्तलिब की परवरिश में आ गए।
हज़रत उम्मे अयमन ने एक मां की तरह भरपूर प्यार, शफ़क़त और ममता से हुज़ूर ﷺ की परवरिश की, आप कहते थे कि मेरी मां के बाद “मां” हैं।
जब आप की उम्र आठ साल हुई तो दादा अब्दुल मुत्तलिब भी जुदाई का गम दे गए।
दादा अब्दुल मुत्तलिब की वफ़ात के बाद ख़्वाजा अबु तालिब की परवरिश में आ गए, चाचा अबु तालिब और चाची फातिमा बिन्ते असद दोनों आप से बेहद प्यार करते थे, जिसका जिक्र आप ﷺ ने खुद फ़रमाया है, उन दोनों ने मां बाप जैसी मोहब्बत अता की, अपने बेटों से ज़्यादा ख्याल रखा।
अरब के आम दस्तूर के मुताबिक आप ﷺ ने बचपन में भेड़ बकरियां भी चराई हैं, जब आप ﷺ की उम्र 12 साल थी तो हजरत अबू तालिब ने शाम के तिजारती सफर में हुजूर ﷺ को भी साथ ले लिया, रास्ते में “तीमा” नामी बस्ती में कयाम किया, वहां “बुहैरा” नामी राहिब ने आपके अंदर आखरी नबी होने की निशानियां देखी तो उसको अंदेशा हुआ कि अगर शाम के यहूद आपको पहचान लें तो कहीं आपकी जान के दर पर ना हो जाए; चुनांचे बुहैरा की ख्वाहिश पर हजरत अबू तालिब ने आपको वापस कर दिया। फिर…….. दोबारा जब उम्र ए मुबारक 25 साल के करीब हुई तो हजरत खदीजा की ख्वाहिश पर उनका माल लेकर आप ने शाम का सफर फरमाया, ताकि वहां तिजारत करें, और नफा में दोनों शरीक हो।
हजरत खदीजा ने अपना गुलाम मयसरह को भी आपके साथ कर दिया था। उस तिजारत में बहुत नफ़ा हुआ।
आप ﷺ की दयानत और अमानत सुनकर और मयसरह के जरिए आप ﷺ के हालात जानकर हजरत खदीजा बेहद मुतासिर हुई, और उन्होंने आप ﷺ को निकाह का पैगाम दिया। उस वक्त आपकी उमर 25 साल थी, हजरत खदीजा की उम्र मशहूर कॉल के मुताबिक 40 साल और बाज़ हजरात की राई के मुताबिक 28 साल थी। आप ﷺ ने उसे कुबूल फरमा लिया।
उस जमाने में निकाह के मौके पर दूल्हा और दुल्हन दोनों तरफ से ख़ुत्बा दिया जाता था, जिसमें अपने अपने खानदान की तारीफ होती थी, चुनांचे रसूलुल्लाह ﷺ की तरफ से ख्वाजा अबू तालिब ने और हजरत खदीजा की तरफ से वरक़ह बिन नौफल ने निकाह का खुतबा दिया।
महर के बारे में 3 रीवायतें हैं।
बीस ऊंट, चार सौ दिनार या पांच सौ दिरहम।
हुज़ूर ﷺ की तरफ से हजरत हमज़ा, हजरत अबू बकर और दूसरे कुरैश के सरदार निकाह की मजलिस में मौजूद रहे।
To be continue