धर्म

सूरह अलफ़ील : ( मक्की) (105) आयतें – 5

Farooque Rasheed Farooquee
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. सूरह अलफ़ील ( मक्की) (105) आयतें – 5
अल्लाह के नाम से जो रहमान और रहीम है।
(ऐ पैग़म्बर) क्या आपने नहीं देखा कि आपके परवरदिगार ने उस लश्कर के साथ क्या सुलूक किया जो हाथियों का एक झुंड लेकर मक्के पर हमला करने आया। ख़ुदा ने उसके सारे दांव ग़लत नहीं कर दिए? और उन परिंदों के झुंड के झुंड भेज दिए जिन्होंने उन्हें सख़्त बर्बादी में डाल दिया, जो उनके लिए लिख दी गई थी। यहां तक कि उन्हें खाए हुए भूसे की तरह कर दिया।।

नोट – हाथियों के हमले और उनकी तबाही का वाक़िया उस साल हुआ जब पैग़म्बर सलल्लाहु अलैहि वसल्लम की पैदाइश हुई थी।

हब्शा के बादशाह की तरफ़ से अरबहा यमन में गवर्नर था। उसने सन्आ में एक बहुत बड़ा गिरजा बनवाया और कोशिश की कि लोग ख़ाना-ए-काबा के बजाय हज के लिए वहां जाएं। यह बात मक्का के लोगों को बहुत बुरी लगी। उनमें से एक आदमी ने अबरहा के बनाए हुए इबादतख़ाने के बीच की सबसे साफ़ और पाक जगह पर लैट्रिन कर दी। इस तरह गिरजा के नापाक होने की ख़बर फैल गई। अबरहा ख़ाना-ए-काबा को गिराने के लिए एक बड़ा लश्कर, हाथियों पर सवार होकर बढ़ा। जब वह महसर की वादी में पहुंचा तो अल्लाह ने परिंदों के झुंड भेज दिए जिनकी चोंच और पंजों में कंकरियां थीं। जिस फ़ौजी को वह कंकरी लगती वह पिघल जाता और मर जाता। अबरहा भी सन्आ पहुंचते-पहुंचते मर गया। अबाबील किसी परिंदे का नाम नहीं है। परिंदों के झुंड को अबाबील कहते हैं। इस तरह अल्लाह ने अपने घर की हिफ़ाज़त ख़ुद की।