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#हमास_इसराइल जंग के 74वे दिन की ख़ास ख़बरें : वीडियो & रिपोर्ट

शुक्रवार को इसराइली डिफ़ेंस फ़ोर्सेस (आईडीएफ़) ने ग़ज़ा में सफेद कपड़ा लहराते तीन इसराइली बंधकों को ग़लती से हमास के लड़ाके समझ कर गोली मार दी.

इस घटना ने ये दिखाया है कि बंधकों को सैन्य कार्रवाई के ज़रिए छुड़ाने का काम कितना जोखिम भरा है.

ब्रिटिश सेना के रिटायर्ड मेजर जनरल चार्ली हर्बर्ट ने इराक़ और अफ़िग़ानिस्तान में 13 सैन्य अभियानों में भूमिका निभाई है.

मेजर जनरल हर्बर्ट ने बीबीसी से कहा, “तीन बंधकों को गोली मार कर मार डालना दुखद है और यह ताक़त के इस्तेमाल और विशेष स्थितियों में कार्रवाई की आईडीएफ़ की रणनीति पर सवाल खड़ा करता है. कोई सिर्फ ये कल्पना ही कर सकता है कि इसी तरह के हालात में कितने नागरिक मारे गए होंगे.”

इसराइली सेना का कहना है कि वो नागरिकों को कम से कम नुकसान पहुंचाने के लिए भारी सतर्कता बरत रही है, लेकिन ग़ज़ा में 18,000 से अधिक मौतों के लिए उस पर बमबारी का दोष लगाया जा रहा है.

इतिहास में अपहरण की जितनी वारदातें हुईं हैं उनमें लगभग हर मामले में देखा गया कि सैन्य कार्रवाई के बजाय मध्यस्थता और समझौते के मार्फ़त अपहृत लोगों को सुरक्षित छुड़ा पाने की संभावना अधिक रहती है.

अतीत के बंधक संकट से मिले सबक

बंधकों के मामले को मैंने कवर किया था, जब 1998 में यमन में अल-क़ायदा से जुड़े जिहादियों ने 16 पश्चिमी पर्यटकों को अगवा कर लिया था.

उस समय ब्रिटिश राजदूत बंधकों की रिहाई के लिए वार्ता शुरू करने का दबाव बनाने के लिए गृह मंत्री से मिले थे.

लेकिन तबतक देर हो गई थी और उन्हें बताया गया कि यमन की सेना पहले ही कार्रवाई के लिए निकल चुकी है.

इस कार्रवाई के दौरान गोलीबारी में एक चौथाई बंधक मारे गए और अन्य घायल हो गए.

हालांकि पश्चिमी और इसराइली विशेष सुरक्षा दस्ते बंधकों को छुड़ाने की कला में पारंगत होने के लिए दशकों खर्च कर चुके हैं लेकिन इसके बावजूद कभी योजना के मुताबिक कुछ नहीं हुआ.

1976 में यूगांडा के एंतेबे में इसराइल ने इसी तरह का एक ऑपरेशन चलाया था जिसमें उसने 106 में से 102 बंधकों को छुड़ा लिया, लेकिन इसराइली कमांडो का कमांडर मारा गया.

आज उसी कमांडो के भाई बिन्यामिन नेतन्याहू इसराइल के प्रधानमंत्री हैं.

1980 में एसएएस ने लंदन में ईरान के दूतावास को कब्ज़ा कर लिया था. बंधक रिहाई मामले में आधुनिक समय की एक प्रमुख घटना थी क्योंकि यह टीवी कैमरों के सामने घटी.

साल 2009 में अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान ने एक ब्रिटिश पत्रकार स्टेफेन फ़ैरेल का अपहरण कर लिया था, जिसे ब्रिटिश स्पेशल फ़ोर्सेस ने छुड़ाया.

लेकिन इस कार्रवाई में हिस्सा ले रहे एक सैनिक, दो नागरिक और अफ़ग़ान अनुवादक की मौत हो गई.

इसके दूसरे साल ही अफ़ग़ानिस्तान में ही तालिबान ने एक ब्रिटिश सहायता कर्मचारी लिंडा नोर्ग्रोव का अपहरण कर लिया और उसे अमेरिकी नेवी सील ने छुड़ाया.

इस हथियारबंद कार्रवाई में लिंडा के अपहरणकर्ता की मौत हो गई लेकिन सैनिकों में से एक ने ग्रेनड फेंका था जिसके जद में आने से लिंडा की भी मौत हो गई.

नाइजीरिया में 2012 में एक ब्रिटिश और एक इतालवी बंधक को रिहा कराने के लिए चलाया गया ब्रिटिश स्पेशल फ़ोर्सेस का अभियान बर्बाद हो गया जब नाइजारियाई सैनिकों ने पहले ही गोली चला दी. इससे अपहरणकर्ता सतर्क हो गए और उन्होंने बंधकों की हत्या कर दी.

सैन्य कार्रवाई बनाम कूटनीतिक रास्ता

सालों से यमन में बंधक संकट के कई मामले आम तौर पर शांतिपूर्ण लंबी वार्ताओं के मार्फ़त हल किए गए.

लेकिन आख़िरकार ये सब अपहरणकर्ताओं की मांगों और उनकी मंशा पर निर्भर करता है.

अल-क़ायदा और इस्लामिक स्टेट ग्रुप (आईएस) के मामले में, जिहादी अपहरणकर्ताओं की मंशा कभी भी अमेरिकी और ब्रिटिश बंधकों को रिहा करने की नहीं रही.

इसकी बजाय उनका लक्ष्य, कैमरे के सामने उनकी हत्या करके मनोवैज्ञानिक असर डालने का होता था.

इन हालातों में, अगर जगह का पता चल जाए तो आम तौर पर हथियारबंद कार्रवाई ही एकमात्र विकल्प बचता है.

हमास इन दोनों का मिला जुला मामला है. सात अक्टूबर को दक्षिणी इसराइल पर किया गया उनका हमला बहुत क्रूर और हिंसक था. लेकिन बाद में वे 100 से अधिक बंधकों को रिहा करने के लिए समझौते के इच्छुक रहे हैं.

आज इसराइल के बंधकों के परिवारों को ये पता चल चुका है कि अस्थाई युद्ध विराम के दौरान जिनको रिहा कराया गया, उनकी आज़ादी साहसिक सैन्य कार्रवाई की बजाय अमेरिका समर्थित, क़तर और मिस्र की मध्यस्थता और पीड़ादायी वार्ताओं से ही संभव हो पाई.

आज तक केवल एक इसराइली बंधक, प्राइवेट ओरी मेगेदिश को ही सेना द्वारा छुड़ाया जा सका है.

लेकिन अपहरणकर्ताओं से समझौता करना, ख़ासकर जिन्हें कई सरकारों ने आतंकवादी घोषित कर रखा हो, उसे पचा पाना बहुत कड़वी सच्चाई है.

अपहरणकर्ता इसके बदले कुछ मांग रखेंगे.

हमास के मामले में, इसका मतलब होगा इसराइली जेलों में बंद बड़ी संख्या में कैदियों की रिहाई, लड़ाई बंद करना और ग़ज़ा में पर्याप्त मात्रा में सहायता सामग्री भेजने की इजाज़त देना.

जनरल हर्बर्ट के अनुसार, आगे भी बंधकों की सफल रिहाई केवल कूटनीतिक बातचीत से ही संभव हो सकती है.

वो कहते हैं, “ग़ज़ा में इस मुद्दे का कोई प्रभावी सैन्य समाधान नहीं है.”

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फ़्रैंक गार्डनर
पदनाम,बीबीसी रक्षा संवाददाता, यरूशलम


फ़िलिस्तीन के मज़लूम लोगों के ख़िलाफ़ इस्राईल के जघन्य अपराधों की अस्ल वजह क्या है? मानवाधिकार की रक्षा का दम भरने वाले ख़ामोश क्यों हैं?

 

फिलिस्तीन के मज़लूम और निर्दोष लोगों के खिलाफ इस्राईल के पाश्विक हमले जारी हैं। इन हमलों में शहीद होने वालों की संख्या 19 हज़ार से अधिक हो गयी है।

शहीद होने वालों में सबसे अधिक संख्या बच्चों और महिलाओं की है। फिलिस्तीनियों विशेषकर गज्जा में रहने वाले फिलिस्तीनियों के लिए कहीं भी सुरक्षित स्थान नहीं है। इस्राईल, लोगों के घरों व आवासीय क्षेत्रों, स्कूलों, मस्जिदों, गिरजाघरों और अस्पतालों पर भीषण बमबारी करता है।

रोचक बात है कि इस्राईल होलोकास्ट की घटना का बहाना बनाकर स्वयं को दुनिया की मज़लूम कौम दिखाना व बताना चाहता है पर आज उसकी बर्बरता से इस्राईल और मानवाधिकार की रक्षा का दम भरने वालों के चेहरों से नकाब हट गयी है और पूरी दुनिया जहां इस्राईल के जघन्य अपराधों का साक्षी है वहीं वह मानवाधिकार की रक्षा का दम भरने वाले अमेरिका और पश्चिमी व यूरोपीय देशों का वास्तविक चेहरा भी देख रही है।

एक पत्रकार और एक महिला की मौत पर शोर मचाने वालों के मुंह पर आज ताला लगा हुआ है। आज इस्राईल फिलिस्तीन में 90 से अधिक पत्रकारों की हत्या कर चुका है परंतु मानवाधिकार की रक्षा का दम भरने वाले देशों ने अर्थपूर्ण चुप्पी साध रखी है। सवाल यह पैदा होता है कि मानवाधिकार की रक्षा का दम भरने वाले देशों ने चुप्पी क्यों साध रखी है? उसका सीधा सा जवाब यह है कि फिलिस्तीन में जो कुछ मानवता विरोधी अपराध हो रहे हैं उन सबको उनका लाडला इस्राईल अंजाम दे रहा है।

बहुत से जानकार हल्कों का कहना है कि अमेरिका, पश्चिमी व यूरोपीय देशों की चुप्पी उनके समर्थन की सूचक है और आज जो कुछ फिलिस्तीनियों पर अत्याचार हो रहा है वह इन्हीं देशों के समर्थन का परिणाम है। इन्हीं देशों के समर्थन से इस्राईल ने अपने अवैध अस्तित्व घोषणा की। ब्रिटेन की भूमिका और बिलफोर घोषणापत्र को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है।

सात अक्तूबर से अलअक्सा तूफान आरंभ हुआ है। इस्राईल को तसल्ली और ढारस बधाने के लिए सबसे पहले अमेरिका के विदेशमंत्री एंटनी ब्लिंकन तेलअवीव की यात्रा पर गये थे। उसके बाद अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन अवैध अधिकृत फिलिस्तीन की यात्रा पर गये थे और उन्होंने कहा था कि हम इस्राईल के साथ हैं। रोचक बात है कि उन्होंने यह भी कहा था कि इस्राईल को जिस हथियार व संसाधन की ज़रूरत होगी अमेरिका उसे देगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि अगर इस्राईल न होता तो हम उसकी स्थापना करते।

कहने का तात्पर्य यह है कि अत्याचार व अपराध की बुनियाद रखने वाले अमेरिका, ब्रिटेन और पश्चिमी व यूरोपीय देश हैं और इन देशों के क्रियाकलापों से उनके चेहरों पर मानवाधिकार का पड़ा मुखौटा पूरी तरह हट गया है और जब तक इस्राईल के प्रति इन देशों का समर्थन व आशीर्वाद जारी रहेगा तब तक फिलिस्तीनी लोगों पर अत्याचार जारी रहेंगे।

लाल सागर में की जाने वाली कार्यवाही में हम शामिल नहीं होंगेःरूस

रूस ने यह बात साफ कर दी है कि लाल सागर में की जाने वाली संभावित कार्यवाही का वह भाग नहीं बनेगा।

रूस के राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से घोषणा की गई है कि यह देश, पश्चिम की ओर से लाल सागर में की जाने वाली हस्तक्षेपपूर्ण कार्यवाही में भाग नहीं लेगा।

देमेत्री पेस्कोफ़ कहते हैं कि शिपिंग मार्ग की सुरक्षा को सुनिश्चित बनाने के बहाने पश्चिम के नेतृत्व में लाल सागर में की जाने वाली हस्तक्षेप पूर्ण कार्यवाही में वह हिस्सा नहीं लेगा।

प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार स्पेन, फ्रांस, कनाडा, बहरैन, ब्रिटेन और संयुक्त राज्य अमरीका के परस्पर सहयोग से लाल सागर में हस्तक्षेपपूर्ण कार्यवाही करने की योजना बनाई गई है।

पश्चिम की ओर से यह हस्तक्षेपपूर्ण कार्यवाही एसी हालत में अंजाम देने की बात कही जा रही है कि जब अंसारुल्ला ने खुलकर चेतावनी दे रखी है कि लाल सागर के लिए अमरीका जो भी गठबंधन तैयार करेगा, वह उसका मुक़ाबला करेगा।

याद रहे कि यमन की सेना ने ग़ज़्ज़ा का समर्थन करते हुए लाल सागर और बाबुल मंदब जलडमरू मार्ग में ज़ायोनियों के कुछ जहाज़ों को लक्ष्य बनाया है। यमन की सेना ने पहले की चेतावनी दे दी थी कि जबतक ग़ज़्ज़ा पर हमले नहीं रोके जाते उस समय तक शत्रु इस्राईल के हितों को लक्ष्य बनाया जाता रहेगा।

एक रिपोर्ट में बताया गया है कि लाल सागर में यमनियों द्वारा ज़ायोनी जहाज़ों को लक्ष्य बनाने से वहां की अर्थव्यवस्था को काफ़ी नुक़सान पहुंचा है जिससे ज़ायोनी शासन से अधिक अमरीका परेशान दिखाई दे रहा है।

महमूद सय्यद 🇮🇳
@AfrozjaleelSyed
यह अमेरिकन कमांडो की टीम है जो परसों(सोमवार) को एक फर्जी सुरंग में घुसते हुए मारे गए थे , आज इनकी लाशें निकाली गई हैं।

ध्यान रहे मुरदारों में ग़ैर-इज़्राईली की गिंती नहीं होती..इज़्राईली सरकार के दफ़्तर में..

اللہ اکبر وللہ الحمد

@Misra_Amaresh
@misra_amaresh
·
50m
#Hamas की बड़ी कार्रवाई! #Gaza!

मशीनगनों से लैस #AlQassam लड़ाके Sheik Radwan इलाके मे, 12 #IDF सैनिकों के विशेष बल से भिड़ गए। जब एक और IDF टुकड़ी पहली कि मदद करने आई, तो उसपे anti personnel shells दागे।

सभी #Israeli या तो मारे गए या घायल हो गए!

Wajidkhan
@realwajidkhan

यमन के हौथिस मुजाहिदीन का बयान।

भले ही अमेरिका पूरी दुनिया को लामबंद करने में सफल हो जाए, लेकिन गाजा में नरसंहार बंद होने तक हमारी कार्रवाई नहीं रुकेगी।

@Misra_Amaresh
@misra_amaresh

Sheik Radwan, #Gaza की दूसरी बड़ी घटना!

#AlQassam सेनानियों ने “अल-यासीन 105” गोले से एक #IDF वाहन को नष्ट कर दिया।
उन्होंने एक #Israeli बुलडोजर के ड्राइवर को भी निशाना बनाया और उसकी मौत की पुष्टि की।

@Misra_Amaresh
@misra_amaresh
#IDF admits to the deaths of two more officers during battles in the northern #Gaza, as well as the serious wounding of two soldiers in the southern #Gaza Strip.
IDF ने उत्तरी #गाजा पट्टी में लड़ाई के दौरान दो और अधिकारियों की मौत स्वीकारी। साथ-साथ दक्षिणी गाजा पट्टी में दो सैनिकों के गंभीर रूप से घायल होने की बात भी स्वीकार की है।

The Jerusalem Post
@Jerusalem_Post

BUY BLUE AND WHITE 🔵⚪️

As the war weighs on Israel’s economy, the event will offer an opportunity to support local businesses affected by the conflict, who will present their products to the viewers.

The Jerusalem Post
@Jerusalem_Post
Singapore sends first resident ambassador to Israel amid Gaza war

Ian Mak of Singapore was among 16 new ambassadors who have presented their letters of credence since the outbreak of the Israel-Hamas war.

The Jerusalem Post
@Jerusalem_Post

President Vladimir Putin said on Tuesday that Russia would be prepared to talk to Ukraine, the United States and Europe about the future of Ukraine if they wanted to, but that Moscow would defend its national interests.

The Jerusalem Post
@Jerusalem_Post

BUY BLUE AND WHITE 🔵⚪️

As the war weighs on Israel’s economy, the event will offer an opportunity to support local businesses affected by the conflict, who will present their products to the viewers.

The Jerusalem Post
@Jerusalem_Post

Meta ‘inappropriately removed’ Hamas kidnapping videos, oversight board finds

The finding came in a review of two cases in which human moderators had restored content that computer moderation had removed.

The Jerusalem Post
@Jerusalem_Post

The conflict in Gaza is a “moral failure” of the international community, the president of the International Committee of the Red Cross told journalists on Tuesday, urging all parties to reach a new deal to halt the fighting.

The Jerusalem Post
@Jerusalem_Post

Ahmed Kahlot, the director of the Kamal Adwan hospital in Jabalya in northern Gaza, admitted to the Shin Bet that #Hamas was using hospitals in #Gaza as military facilities, the Shin Bet and IDF said on Tuesday.