विशेष

“हमें कुछ सूझता नहीं कि क्या करना चाहिए”

सुलैमान के नीतिवचनों से बुद्धि
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नीतिवचन 16:3
अपने कामों को यहोवा पर डाल दे, और तेरे विचार स्थापित होंगे।
क्या आप भ्रमित हैं, और नहीं जानते कि क्या करें? क्या आप अभिभूत हैं? ऐसे दर्दनाक संदेह प्रभु में आपकी शांति खोने का परिणाम होते हैं। लेकिन खोई हुईं शान्ति को आसानी से पुनर्प्राप्त किया जा सकता है, यदि आप अपने कामों को उसे सौंपते हैं तो। वह आपको सिद्ध, स्थिर और बलवंत करेगा (1 पतरस 5:10 )।
एक पापी और अनिश्चित दुनिया में, जहां आप कल के बारे में भी नहीं जान सकते, वहाँ अक्सर संदेह, भय, व्यग्रता और चिंताएं होती हैं। लेकिन यह वह जीवन नहीं है जिसकी परमेश्वर अपने बच्चों के लिए इच्छा करता है या योजना बनाता है। वह आपकी दुखभरी चिंताओं को दूर कर सकता है और करेगा, यदि आप सब कुछ उसे समर्पित कर दें तो। उसकी वायदा की गई स्थाई उपस्थिति संतोष और साहस लाएगी (इब्रानियों 13:5-6)।
पतरस ने यहोवा की प्रेमयुक्त परवाह के बारे में लिखा, “अपनी सारी चिंता उसी पर डाल दो; क्योंकि उसको तुम्हारा ध्यान है” (1 पतरस 5:7 )। और दाऊद ,जिसने कई कठिनाइयों का सामना किया, उसने बड़े दृढ़ विश्वास और अनुभव के साथ लिखा, “अपना बोझ को यहोवा पर डाल दे, वह तुझे संभालेगा; वह धर्मी को कभी टलने न देगा” (भजन संहिता 55 :22 )। दोनों ही प्रतिज्ञाओं पर विश्वास करें !
पौलुस ने लिखा, “किसी भी बात की चिंता मत करो – और परमेश्वर की शांति, जो सारी समझ से परे है, तुम्हारे ह्रदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरक्षित रखेगी (फिलिप्पियों 4:6)। यीशु ने सांत्वना दी, “कल की चिंता न करो; क्योंकि कल का दिन अपनी चिंता आप कर लेगा” (मत्ती 6:34)। यह महान सांत्वना उसकी क्षमता और देखभाल पर आधारित है, और इसे प्राप्त करने के लिए आपको केवल उस पर विश्वास करने और उसके राज्य की खोज करने की आवश्यकता है” (मत्ती 6:25-33)।


आप सब चीजों को उसके अनुसार करके अपने कामों को यहोवा पर डालते हैं। उसके उपदेशों को सिद्ध और पर्याप्त समझो (नीतिवचन 3:7; भजन संहिता 119:128)। यदि तुम अपनी समझ का सहारा न लो, और अपने संपूर्ण मार्गों में उस पर भरोसा रखो, तो वह तुम्हारे मार्ग को निर्देशित करेगा (नीतिवचन 3:5-6)। यहोवा के तरीके से करने पर यहोशू ने कनान देश के पहले शहरपनाह वाले नगर को गिराना ज़्यादा आसान पाया (यहोशू 6:20)! क्या आप माता-पिता के रूप में अभिभूत हैं? सिद्ध ज्ञान नीतिवचन की पुस्तक में दिया गया है।
आप अपने कामों को यहोवा के लिए करके उन्हें उस पर डालते हैं। “इसलिए तुम चाहे खाओ, चाहे पीओ, चाहे जो कुछ करो, सब कुछ परमेश्वर की महिमा के लिए करो” (1 कुरिन्थियों 10:31)। वचन में या काम में जो कुछ भी करो सब प्रभु यीशु के नाम से करो, और उसके द्वारा परमेश्वर पिता का धन्यवाद करो (कुलुस्सियो 3:17)। जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उनके लिए सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; क्योंकि वे उसके अनंत उद्देश्य के अनुसार महिमा के लिए नियुक्त किए गए हैं (रोमियो 8:28)।
आप अपने कामों को यहोवा को देकर उन्हें उस पर डालते हैं। आप इसे धन्यवाद के साथ प्रार्थना के द्वारा करते हैं (फिलिप्पियो 4:6; कुलुस्सियो 4:2)। यदि आप अपने मन को अपनी दुविधाओं के बजाय प्रभु यहोवा पर केंद्रित करते हैं, तो आपको पूर्ण शांति प्राप्त होगी (यशायाह 26:3-4)। एक बड़ी सेना का सामना करते समय, यहोशापात ने एक सार्वजनिक प्रार्थना सभा की अगुवाई की, जहां उसने अन्य चीजों के साथ-साथ यह प्रार्थना की, “हमें कुछ सूझता नहीं कि क्या करना चाहिए” (2 इतिहास 29:1-9)। परमेश्वर ने उसके लिए लड़ाई लड़ी! प्रभु यीशु ने कहा, “अपना मन व्याकुल न करो- मुझ पर भी विश्वास रखो”।
आप परिणामों के लिए यहोवा पर भरोसा करके अपने कार्यों को उस पर डालते हैं। जब आप यह सोचते हैं कि परिणाम आप पर निर्भर हैं तो यह व्यर्थ और दुखद है। परिणाम उस (यहोवा) पर निर्भर है, और वह आपको एक अल्पविराम लेने की सलाह देता है (भजन संहिता 127:1-2)। एक बार जब आप उचित योजनाएं बना लेते हैं, तो बाकी सभी चीजों को उसके अनुग्रहपूर्ण और संप्रभु इच्छा के हवाले कर दें (नीतिवचन 16:9 ; भजनसंहिता 37:3-7; याकूब 4:15-15)। इस तरह का भरोसा आपके हृदय को बिना किसी भय के स्थिर और स्थापित करेगा, फिर आप की स्थिति चाहे जो भी हो (भजनसंहिता 112:7-8)।
चारों ओर से शत्रु की सेनाओं से घिरे हुए योआब ने एक महत्वपूर्ण युद्ध को यहोवा को सौंप दिया, और उसने बड़ी विजय प्राप्त की (2 शमूएल 10:9-14)। दो विधवा, जो अपने भविष्य के बारे में अनिश्चित थीं, दोनों ने अपने महान स्वर्गीय पिता पर भरोसा करके उनमें से एक को बीनने के लिए भेजा: बीननेवाली ने दोनों के लिए पर्याप्त भोजन प्राप्त किया, लेकिन उसे घर बसाने के लिए एक धनी पति भी मिला (रूत 2:1-23)!
पौलुस हर नीतिवचन की तरह इस नीतिवचन की सच्चाई भी जानता था। उसने एक समय में इतनी अधिक कठिनाइयों का सामना किया जितना कि आप जीवनभर सोच भी नहीं सकते। परंतु उसने कहा,”हम चारों ओर क्लेश तो भोंगते हैं, पर संकट में नहीं पड़ते; निरूपाय तो हैं, पर निराश नहीं होते, सताए तो जाते हैं, पर त्यागे नहीं जाते; गिराए तो जाते हैं, पर नष्ट नहीं होते (2 कुरिन्थियों 4:8-9)। उसने अपने कामों को यहोवा पर डाल दिया था ।
प्रिय पाठकगण, आज आपको क्या परेशान कर रहा है? आपके सामने ऐसा क्या है जो आपके मन को व्याकुल करता है ? अपने कामों को यहोवा पर डाल दो, और तुम्हारे विचार स्थापित होंगे। उन्हें उसके (यहोवा) अनुसार करो; उन्हें उस पर डाल दो; उन्हें प्रार्थना में उसके सम्मुख रखो; और परिणाम के लिए उस पर भरोसा रखो। वह आपको संतोष, शांति और निश्चयता की आशीष देकर, तुरंत ही आपको संभाल लेगा ।
यीशु मसीह ने कलवरी के क्रूस पर चुने हुए लोगों को छुड़ाने के भयानक कार्य में अंतिम चुनौती और कठिनाई का सामना किया, लेकिन उसने स्वयं को यहोवा को सौंप दिया (1 पतरस 2:23)। उसे सुना गया, और एक स्वर्गदूत ने आकर उसे बलवंत किया (इब्रानियो 5:7-10; लूका 22:43)। तुम भी आज्ञाकारिता को अच्छी तरह निभाते हुए ,अपने प्राण को अपने विश्वास योग्य सृजनहार के हाथ में सौंप दो (1 पतरस 4:19)। वही दास आकर तेरी सेवा टहल करेंगे (भजनसंहिता 34:7; इब्रानियों 1:13-14)।