साहित्य

हम जानते हैं कि हम क्या हैं, पर यह नहीं जानते कि हम क्या बन सकते हैं,,,,By-लक्ष्मी सिन्हा

Laxmi Sinha
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जितना ज्यादा हम पीते हैं, उतने ही प्यासे होते जाते हैं।
हम जानते हैं कि हम क्या हैं, पर यह नहीं जानते कि
हम क्या बन सकते हैं,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,।
दुनिया में पहला बड़ा काम है अपने आपको
जानना। दूसरा बड़ा काम है दिशा _ परिवर्तन।
दिशा को बदलना बड़ा काम है। आदमी एक ही
दिशा में चलते_चलते थक जाता है, ऊब जाता है।
किंतु दिशा बदले बिना परिवर्तन घटित नहीं होता।
वे विजय प्राप्त कर सकते हैं, जिन्हें विश्वास है कि
वे कर सकते हैं। जीवन की दिशा को बदलना बड़ा
काम है। जीवन की दिशा बदलती है अपने आपको
जानने और देखने से। जीवन को अविस्मरणीय
बनाने के लिए व्यक्ति के सम्मुख मुख्य प्रश्न है-वह
जीता कैसे हैं? जीना एक बात है और कैसे जीना,
बिल्कुल दूसरी बात है। यदि वह कलात्मक ढंग से
जीता है तो जीवन बहुत सार्थक और सफल बन
जाता है। यदि वह जीवन को जीना नहीं जानता,
जीने की कला को नहीं जानता तो जीवन निरस,
बोझील आर निरर्थक जैसा प्रतीत होने लगता है।
इसलिए आवश्यक है सकारात्मक सोच। जीवन के
प्रति हर क्षण जागरूक होना। दुनिया में सिर्फ दो
संपूर्ण व्यक्ति है। एक मर चुका है, दूसरा अभी पैदा
नहीं। हुआ है। प्रसिद्ध एवं धन उस जल से समान
है, जितना ज्यादा हम पीते हैं, इतने ही प्यासे होते
जाते हैं। हम जानते हैं कि हम क्या हैं, पर यह नहीं
जानते हैं कि हम क्या बन सकते हैं। सुख_ दुख
में सम रहे। जीवन में आने वाली हर समस्या को
चट्टानों की ठोकरों से हटाते चले,हवा से उड़ाते चले,
एक दिन सफलता के शिखर पर जरूर स्थापित
होंगे। कष्टों से क्या डरना है, जो जीवन को एक
चुनौती मानते हैं, वे हर मोर्चे पर कामयाबी पाते हैं,
सफलता उनके चरण चूमती है। सकारात्मक सोच
जीवन की सफलता की द्वार है।सुविचारों से सुफल
उपजते है और कुविचारों से कुफल। अच्छा सोचे,
अच्छा देखें, अच्छा बोले, अच्छा सुनें और अच्छा
करें, सबके प्रति अच्छा भाव रखें, सफलता जरूर
मिलेगी। मीठे बोल संक्षिप्त और बोलने में आसान
हो सकते हैं, लेकिन उसकी गूंज सचमुच अंतर
होती है।

#Laxmi_sinha

प्रदेश संगठन सचिव महिला प्रकोष्ठ

राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी(बिहार)