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हाइपरसोनिक मिसाइल क्या हैं? मिसाइल डिफ़ेंस सिस्टम को किस तरह भेदते हैं?

ईरान ने हाइपरसोनिक मिसाइल विकसित करने का एलान करके विश्व स्तर पर एक नई बहस को जन्म दिया है। ईरान ने मिसाइल के क्षेत्र में कई दशकों से बड़ी लगन से काम किया है और समय समय पर बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं।

मिसाइल के क्षेत्र में ईरान की प्रगति की रफ़तार को देखते हुए रक्षा विशेषज्ञों को यक़ीन हो चुका था कि ईरान बहुत जल्द इस उद्योग में चोटी पर पहुंचने वाला है यानी हाइपर सोनिक ग्लाइडिंग वेहिकल का निर्माण कर सकता है। मिसाइलों पर फ़िट होने वाले वारहेड की जब बात होती है तो एचजीवी सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाती है। यह तकनीक अब तक केवल रूस, चीन और अमरीका के पास है जबकि हाल ही में इस तकनीक की एक झलक उत्तरी कोरिया में भी देखी गई।

एचजीवी की ख़ास बात यह होती है कि बैलिस्टिक मिसाइलों के अपने ख़ास अंदाज़ में यह बहुत कम ऊंचाई पर बिजली की तरह अपेन लक्ष्य की ओर झपटता है और इस बीच उसकी दिशा भी बदली जा सकती है, यही वजह है कि दुश्मन के राडार इसका पता नहीं लगा पाते और उनके एंटी सेप्टर मिसाइलों को डाज देना संभव हो जाता है।

यह भी ख़ास बात है कि इस वारहेड का इंजन मिसाइल के इंजन से अलग होता है। इस वारहेड की यह ख़ास बात है कि अगर यह अपने रास्ते से हट जाए तब भी वारहेड के भीतर लगे इंजन की मदद से इसे दोबारा उसके ट्रैक पर लाया जा सकता है।

यह भी एक तथ्य है कि ईरान ने जब जब विज्ञान और रक्षा या किसी भी अन्य क्षेत्र में कोई बड़ी कामयाबी हासिल की है तो अमरीका, यूरोपीय देशों और उनके घटकों ने सबसे पहले तो इन उपलब्धियों का इंकार करने की कोशिश की मगर जब बार बार उनके प्रोपैगंडे ग़लत साबित हुए तो अब उन्होंने ईरान की वैज्ञानिक और रक्षा उपलब्धियों के बारे में शक करना छोड़ दिया।