सेहत

🌹स्त्रियों का प्रेम पाना अत्यंत कठिन होता है 🌹अधेड़ उम्र में भी प्यार होता है क्या?

स्वामी देव कामुक
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अधेड़ उम्र में भी प्यार होता है क्या?
उम्र के ईस पड़ाव में भी दिल खोता है क्या?
दिल क्या यौवन सा धड़कता है
किसी का इंतज़ार होता है क्या?
रातों में कोई याद आता है क्या?
कोई अचानक दिल धड़काता है क्या?
छुप छुप के कभी मुस्कुराहटें आती हैं
रह रह के दिल घबराता है क्या?
जो सोलहवें सावन में न कर पाए
घर समाज के डर से
कभी मिलने को न निकले
अपने घर से
वो अब करने को मन चाहता है क्या?
सारी वर्जनाएं तोड़ देने का मन
होता है क्या?
जो चाहा और नहीं मिला
उसे हासिल कर लेने का वचन होता है क्या?
हाँ ,प्यार शायद ऐसा ही है
वो जाती ,धर्म ,उम्र नहीं देखता है
वो देखता है
बस कोई अपना
फिर कोई लक्ष्मण रेखा नहीं देखता है ।।
तुम्हारा स्वामी देव

स्वामी देव कामुक
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🌹स्त्रियों का प्रेम पाना अत्यंत कठिन होता है 🌹
वो सम्मान पसंद करती है. ..
गर उसके मन से तुम उतर गये तो फिर उस स्थान पर पहुंचना कठिन ही नहीं नामुमकिन है. .! !
हर स्त्री के प्रेम करने का तरीका अलग होता है. .! सब जिस्म का प्रेम नहीं खोजती पुरुष में. .! !
स्नेह खोजती है. .गर सम्मान और स्नेह मिला तो फिर खुद ही अपना सर्वस्व लुटा देती है. .।
पुरुष को मेहनत करने की जरूरत नहीं उसे पाने के लिये. !!🌹
तुम्हारा स्वामी देव

स्वामी देव कामुक
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सेक्स को जो लोग गाली देते है ये वही लोग है जिनका मूलाधार चक्र बिगड़ चुका है जिन्हें छुप छुपकर सब करना भी है और गाली भी देनी है

आजकल लोग क्रोधी बन रहे है कामुक दिखाई देते है हिंसक है इसकी वजह जानने की कभी कोशिश की नही की क्योंकि तुम पर ये सब सोचने का टाइम ही नही है बस तुम तो अंधे की तरह कोल्हू के बैल बने हुए हो जो न तो जागृत है न ही जिसमें बुद्धिमत्ता का वो स्तर है जो ये सब सोच सके

इसी कारण तुम सेक्स को गालियां देते हो इंसान के शरीर की सारी ऊर्जा सेक्स से ही जन्म लेती है ये ऊर्जा ही दबाते रहने पर हिंसा क्रोध वैमनस्य जलन अहंकार आदि के रुप में प्रकट होती है

कारण तुम खुद हो इस सबके ब्रह्मचर्य के नाम पर अपनी प्राण ऊर्जा को तुम विकसित करने के स्थान पर दबा दबाकर उसे नष्ट करने लगते हो लेकिन ये ऊर्जा है शरीर फाड़कर बाहर आ जायेगी अपना मार्ग खुद बना लेगी

अनेकों लोग इसी वजह से मानसिक रोगी बनते जा रहे है ज्ञान और ऊर्जा या शक्ति जोड़ना आसान है पर उसे हजम करना सबके बस की बात नही

भोग से योग का मार्ग विज्ञान भैरव तन्त्र में इसीलिए महादेवजी द्वारा दिया गया है
भोग तो आवश्यक है ही तभी तो संसार में हर योनि में नर और मादा है

तुम इतने मूर्ख हो कि काम को समाप्त करने के सपने देखते हो पर ये नही जानते सृष्टि में 4 चीजे अनन्त है

1 परमात्मा (शिव और मां शक्ति)
2 सृष्टि
3 ज्ञान
4 काम

इन चारों का कोई अंत नही है पर तुम काम को अंतमय मानकर इसे बस खत्म करने के जरिये ढूंढते हो वो भी दूसरों के लिए खुद तो सब करना चाहते हो भोगना चाहते हो पर दूसरे को आजीवन यही सलाह देते हो सेक्स या सम्भोग तो बुरा है न तो इस पर बात करो न ही इसे करो बस इसे खत्म करो

और सृष्टि के सबसे शक्तिशाली देवताओं में से एक कामदेव के इस कामरूप का तिरस्कार और अपमान करने के कारण ही तुम्हारी दुर्गति हुई है और आगे भी होती रहेगी जब तक समर्पण करके इसे स्वीकार नही करोगे इसको अपनाओगे नही न तो तुम इससे पार हो सकोगे न ही इसके तिरस्कार करने के कारण पैदा हुई विकृतियों और बीमारियों से ही बच पाओगे

यहीं सत्य है

डिस्क्लेमर : लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं, तीसरी जंग हिंदी का कोई सरोकार नहीं है