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दंगे, बम धमाके के आरोपी रिहा हुए तो IPS बोले- अगला फैसला आएगा ‘गांधी’ को ‘गोडसे’ ने नहीं मारा था

नई दिल्ली : देश के मौजूदा हालात को देखकर लगता है कि उससे हिंदुस्तान संगठित होने की बजाय खंड-खंड में टूट रहा है. जिन मुद्दों पर विपक्ष सरकार को आइना दिखा रहा है उसपर सरकार में शामिल लोग उसका जवाब तो दे ही रहे हैं, चाहे उसका कोई आधार हो या न हो. लेकिन उससे भी खतरनाक है बीजेपी और संघ समर्थित वो कार्यकर्ता जो आँख मूंदे, सही बात को भी गलत साबित करने की मुहिम छेड़ दे रहे हैं।

इससे नुकसान उनका और देश का तो हो ही रहा है, क्योंकि इसकी वजह से देश के सामने असल सच्चाई नहीं आ पा रही है. बीजेपी और संघ के लोगों का यही काम उन्नाव-कठुआ गैंगरेप और हत्या के बाद आया जिसमें उन्होंने बलात्कारियों का बचाव करते हुए आरोपियों को निर्दोष बताया. अब जस्टिस लोया केस में संदिग्ध फैसला सुनाने वाले सीजेआई दीपक मिश्रा के केस में भी यह बात देखने को मिल रही है।

ये वही लोग है जो सच्चाई को मानने के लिए तैयार नहीं है. इसका सबसे भ्रामक रूप सोशल मीडिया पर देखने को मिल रहा हैं जहाँ सबसे ज्यादा फेक खबरें आ रही हैं. अब फेक न्यूज़ फैलाने की कतार में अखबार ‘दैनिक जागरण’ आ गया है।

दैनिक जागरण ने कठुआ गैंगरेप को सिरे से नकार दिया कि कठुआ में ऐसी कोई घटना हुई ही नहीं! ये सोचने वाली बात है कि मीडिया जगत का इतना बड़ा अखबार ऐसी खबर प्रकाशित कर रहा है. गुजरात के पूर्व आईपीएस अफसर संजीव भट्ट ने बीजेपी और संघ पर तंज करते हुए ट्वीट किया है. संजीव ने अपने ट्वीट में कहा है कि “हो सकता है आगे ये भी आए कि, गोडसे ने गाँधी को गोली नहीं मारी! वो दोषी नहीं थे! नेहरू ने महात्मा गांधी को उकसाया और उन्होंने खुद को गोली मार ली!

संजीव का इशारा माया कोडनानी के ऊपर भी था जिसको नरोदा पाटिया दंगों के केस में शुक्रवार को कोर्ट ने बरी कर दिया गया. माया कोडनानी नरोदा पाटिया दंगों में मुख्य साजिशकर्ता थी. देश में बच्चियों-महिलाओं के साथ बलात्कार और हत्या की घटनाएँ थमने का नाम नहीं ले रही हैं. इस माहौल में भी बीजेपी के लोग जनता के सामने भ्रामक खबर फैलाने में लगे हुए हैं. बीजेपी को समझाना होगा कि इससे नुकसान किसका हो रहा है उस देश का जिसको वो माता कहते हैं या खुद उनका!