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Video:मदरसे पर हुए हवाई हमले में 100 के लगभग मासूम हाफ़िज़ क़ुरआन शहीद,पगड़ी समारोह के दौरान हुआ हमला

नई दिल्ली: अफगानिस्तान के उत्तरी राज्य कुंदुज के दीनी मदरसे के जलसा ए दस्तारबंदीे समारोह पर अमेरिका ने हवाई हमला किया है जिसमें सैकड़ों नन्हें मासूम हाफिजों सहित दर्जनों अन्य नागरिक शहीद होगए हैं।

कुंदूज की राजधानी दश्त अरशद बाद में सोमवार को एक दीनी जलसा चला रहा था जिसको निशाना बनाते हुए हवाई हमला बोल दिया जिसमें मदरसे में पढ़ने वाले सैकड़ों मासूम बच्चों को शहीद कर दिया है,अल जज़ीरा के अनुसार इस प्रोग्राम में तालिबान के उच्चधिकारी और लीडर मौजूद थे जिनको निशाना बनाने के लिये ये हवाई हमला किया गया जिसमें निर्दोष बच्चों को बम से उड़ा दिया गया है।

अफ़ग़ानिस्तान के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद रदमनिश ने अल जजीरा को बताया कि हवाई हमले का उद्देश्य “शीर्ष तालिबान कमांडरों” के लिए था।

उन्होंने कहा, “हवाई हमले में नौ कमांडरों सहित 30 से अधिक तालिबान सेनानियों की मौत हो गई।” “तालिबान प्रशिक्षण केंद्र पर बमबारी हुई और कोई भी नागरिक मौजूद नहीं थे।”तालिबान ने इन हमलों के दौरान स्कूल में अपने सेनानियों को उपस्थित होने से इनकार किया।

‘मैं आतंकवादी नहीं हूं’

साक्षियों ने अल जजीरा को बताया कि इस सभा में “बहुत से नागरिकों” और हमले में मारे गए लोगों के परिवार “तबाह हो गए” हैं।

हमले के साक्षी मोहम्मद अब्दुल हक ने अल जजीरा को बताया, “समारोह में 11 या 12 वर्ष के नन्हें मासूम बच्चे थे जिन्होंने क़ुरआन पाक हिफ़्ज़ किया था जिस पर उन्हें मदरसे में दस्तार और पुरुस्कार दिया गया था।

माँए अपने बच्चों की मौत के लिए अस्पताल के बाहर रो रही है उनकी तड़प और बिलकना देखकर हर देखने वाली की आंख में आँसू आरहे है,अन्य गवाहों ने अल जजीरा को बताया कि हमले में 100 से ज्यादा लोग मारे गए थे।

स्थानीय नागरिकों ने बताया कि “मैं अपने खेत में काम कर रहा था जब मैंने हेलीकॉप्टर और जेट्स को मदरसे (धार्मिक स्कूल) पर बमबारी करते हुए सुना था जहां नये हाफ़िज़ क़ुरआन (जो कुरान के 30 अध्यायों को याद करते हैं) की दस्तारबंदी होरही थी ।

स्थानीय नागरिक ने बताया कि “तालिबान इस क्षेत्र में सक्रिय हैं, लेकिन इस समारोह ज्यादातर मासूम बच्चे और युवा लड़के शामिल थे”यह एक आपदा थी हर जगह खून ही खून था”

तालिबान ने अल जज़ीरा को भेजे गए प्रेस रिलीज़ में कहा है कि हमला के दौरान कोई भी सैनिक मौजूद नहीं थे, जबकि हवाई हमले करीब 150 इस्लामिक स्कॉलर,मौलाना,मुफ़्ती,हाफ़िज़,शहीद हुए हैं और इनमें ज्यादातर संख्या उन मासूम बच्चों की है जिहोने हिफ़्ज़ क़ुरआन मुक्कमल किया था।

हवाई हमलों के कारण शहीद हुए मासूम बच्चों ने तो अभी सही से दुनिया को देखा भी नही था लेकिन शैतान की औलाद ने उनको मौत की नीँद तो सुला दिया है लेकिन वो हमेशा हमेश के लिये अमर होगए हैं।