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कच्ची उम्र के नोजवानों के दिमाग़ में ज़ेहर कौन भर रहा है? रवीश कुमार ने खोली पोल

नई दिल्ली:भारतीय पत्रकारिता के बेबाक और निडर पत्रकार रवीश कुमार के साथ आये दिन बीजेपी और संघ की आईटी सेल वाले गाली गलौच करते रहते हैं,और उन्हें निशाना बनाते हैं,आमतौर रवीश उनकी बातों पर ध्यान नही देते हैं,लेकिन जब पानी सिर से उतर जाता है तो फिर वो इसको सबके सामने लाते हैं।ऐसी ही एक ताज़ा घटना रवीश कुमार ने अपनी फेसबुक वॉल पर शेयर करी है।

प्रिये रितिक……आपने जिस भाषा का इस्तमाल किया है वह सही नहीं है. इस भाषा के पीछे जो सोच है वो आपको एकदिन अपराध की दुनिया में ले जाएगी. आपने अपनी उम्र 18 साल बताई है. गोरखपुर में अपना पता भी दिया है. मैं इसे पब्लिक में डाल रहा हूं. कितने लोगों के ख़िलाफ पुलिस में शिकायत करता रहूंगा. यह ठीक भी नहीं. पता नहीं आपने किसी के बहकावे में आकर ऐसा बोल दिया हो. इसलिए मैं नहीं मानता कि आपको समझाने के प्रयास से ज़्यादा कुछ किया जाना चाहिए।

आप बहकावे में आ गए हैं. असहमति हो सकती है मगर अभद्रता तक मत जाइये. आपकी बातों में ज़हर भर गया है. आप हिन्दुस्तानी होना नहीं समझते हैं. मैं गोरखपुर में होता तो गुलाब जामुन लेकर घर आता और आपके मां बाप से कहता कि कुछ लोग आपके रितिक को दंगाई बनाना चाहते हैं. इसे बचा लीजिए. इसे प्यार और मिठास की ज़रूरत है. दीजिए।

कुछ दिन पहले निशु प्रताप सिंह ने अभद्र भाषा का इस्तमाल किया. मैंने उसका पोस्ट और नंबर का स्क्रीन शॉट अपने इसी फेसबुक पेज पर दिया. कुछ दिनों बाद निशु ने फोन किया. उसकी बातों में ईमानदारी झलक रही थी. वह बिना शर्त माफी मांगता रहा. कहा भी कि लगता है कि मुझे संस्कार अच्छे नहीं मिले. आप बस माफ कर दीजिए. मैंने ग़लती की है. निशु की बातों से लगा कि उसे अफसोस हो रहा है. मैं उसके बारे में सब भूल गया. यही दुआ करूंगा कि वह धर्म के नाम पर चल रहे गिरोहों के हाथों इस्तमाल न हो।

गिरिडीह से ऐसे ही एक लड़के ने धमकी दी और अभद्र भाषा का इस्तमाल किया. कशिश न्यूज़ के पत्रकार संतोष कुमार सिंह ने अपने शानदार कार्यक्रम में इस लड़के के बारे में बताया कि यह कपड़े की दुकान पर हेल्पर का काम करता है और मुस्लिम मुक्त भारत का ज़िला उपाध्यक्ष है. दीन दुनिया से अनजान इस लड़के के दिमाग़ में ज़हर भर दिया गया था. संतोष ने अपने फेसबुक पर लिखा है कि उनके कार्यक्रम के बाद दुकानदार संघ ने उसे काम से हटा दिया. मगर संतोष जी की पहल पर उसे फिर से रख लिया. इस शर्त पर कि वह हिंसा की बात करने वालों का साथ नहीं देगा।

हम यही चाहते हैं कि लोग आपको इतना प्यार दें कि आप नफरत के रास्ते से लौट आएं. अगर आपने अपनी तस्वीर सही लगाई है तो बहुत दुखद है. कितने बच्चे हैं. ऐसी भाषा ज़रूर किसी की शह पर बोल रहे हैं. भारत के युवाओं को कोई बहका रहा है, इन्हें भटकने से बचा लीजिए. रितिक आपने फोन पर गालियां रिकॉर्ड कर भेजी हैं वह भी डालने की सोच रहा हूं।