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Video: रमज़ान उल मुबारक के सम्मान में डोनाल्ड ट्रम्प की तरफ से दी गई इफ्तार पार्टी का वीडियो देखिए

नई दिल्ली: रमज़ान उल मुबारक के पवित्र महीने में इसका सम्मान करते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में अपनी ओर से पहली बार इफ्तार की दावत दी।जिसकी पूरी दुनिया में चर्चा होरही है, इस दौरान ट्रम्प ने सभी के लिए सुरक्षित और समृद्ध भविष्य हासिल करने के वास्ते मुस्लिम समुदाय से सहयोग मांगा। ट्रंप के इस कदम से कई लोग हैरान हो गए हैं। पिछले साल उन्होंने इफ्तार की दावत देने से इनकार कर दिया था।

मुस्लिम विरोधी रुख के लिए पहचाने जाने वाले ट्रंप ने दुनियाभर के मुस्लिमों को रमजान की मुबारकबाद दी तथा सभी के लिए सुरक्षित और समृद्ध भविष्य हासिल करने के वास्ते सहयोग मांगा।

व्हाईट हाउस में क्लिंटन ने की थी इसकी शुरुआत

1990 के दशक में बिल क्लिंटन ने व्हाइट हाउस में इफ्तार पार्टी की औपचारिक शुरुआत की थी। हालांकि, इसकी वैचारिक जड़ें 1805 में थॉमस जेफरसन से भी जुड़ी बताई जाती हैं।

ट्रम्प ने दुनिया भर के मुस्लिमों को रमजान की मुबारकबाद देते हुए कहा कि मुझे इस बात पर गर्व है मैं राष्ट्रपति के रूप में पहली बार विदेश यात्रा पर मुस्लिम देश गया था। जहां मैंने मुस्लिम बहुमत वाले 50 से ज्यादा नेताओं की सभा को संबोधित किया था। बीते साल जो भागीदारी और एकजुटता कायम हुई वे समय के साथ और मजबूत हुई है। बता दें, पिलछे साल ट्रम्प अपनी पहली विदेश यात्रा पर सऊदी अरब गए थे।

ये मेहमान शामिल हुए इफ्तार पार्टी में।

इफ्तार पार्टी में ट्रम्प ने सऊदी राजदूत प्रिंस खालिद बिन सलमान, जॉर्डन के राजदूत दीना कवर और इंडोनेशिया के राजदूत के साथ टेबल शेयर की।

इन देशों के राजदूतों को भी बुलाया

इफ्तार पार्टी में कई यूनाइटेड अरब अमीरात (यूएई), मिस्र, ट्यूनीशिया, कतर, बहरीन, मोरक्को, अलजीरिया, लीबया, कुवैत, गांबिया, इथोपिया, इराक और बोस्निया के राजदूत को भी दावत दी गई।
ट्रम्प ने सभी राजदूतों का स्वागत करते हुए कहा कि आप सब की मौजूदगी से हम बेहद सम्मानित महसूस कर रहे हैं। आप सभी का यहां आने के लिए शुक्रिया।

इफ्तार के विरोध में आए कुछ मुस्लिम संगठन

ट्रम्प की मुस्लिम विरोधी टिप्पणियों के खिलाफ कुछ संगठनों ने इस पार्टी का विरोध किया। उन्होंने व्हाइट हाऊस के बाहर इफ्तार किया। नागरिक अधिकारों से संबंधित इन मुस्लिम संगठनों ने कहा कि ट्रम्प ने अमेरिकन मुस्लिमों के साथ हो रहे भेदभाव को बढ़ावा दिया है।