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2019-21 के बीच 35 हज़ार से अधिक छात्रों ने की आत्महत्या : भारतीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय

भारत के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने संसद को सूचित किया है कि देश में 2019, 2020 और 2021 में कम से कम 35 हज़ार 950 छात्रों की आत्महत्या से मृत्यु हुई।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों द्वारा की गई आत्महत्याओं की संख्या पर लोकसभा में जनता दल यूनाइटेड के सदस्य आलोक कुमार सुमन के एक सवाल का जवाब देते हुए, सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री अब्बैया नारायणस्वामी ने कहा कि इस बारे में डेटा उपलब्ध नहीं है।

भारत में राष्ट्रीय संस्थानों में सामाजिक भेदभाव को रोकने के लिए उठाए गए क़दमों के बारे में पूछे जाने पर मंत्री ने कहा कि उच्च शिक्षा विभाग ने परामर्श सेल और एससी/एसटी छात्र सेल, समान अवसर सेल, छात्र शिकायत सेल, छात्र सेल जैसे विभिन्न तंत्र स्थापित किए हैं।

यह सवाल कुछ प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में शैक्षणिक दबाव या छात्रों या फैकल्टी द्वारा भेदभाव का सामना करने में सक्षम नहीं होने के कारण वंचित पृष्ठभूमि के कुछ छात्रों द्वारा आत्महत्या करने की खबरों के बीच आया है।

सुमन ने यह भी जानना चाहा कि देश में कर्ज़, ग़रीबी और सामाजिक भेदभाव के कारण एससी और एसटी छात्रों द्वारा आत्महत्या की संख्या कितनी है? नारायणस्वामी ने कहा कि एनसीआरबी के पास कर्ज़ और गरीबी के कारण आत्महत्या करने वाले एससी और एसटी छात्रों की संख्या के विवरण के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

उन्होंने कहा कि 2019 में 10,335 छात्रों की आत्महत्याएं दर्ज की गईं, 2020 में 12 हज़ार 526 और 2021 में 13 हज़ार 89 दर्ज की गईं।

 

बलिया

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