साहित्य

कुर्बानी, खाल, दफन, 200 रुपया, भसड़ : Eat the frog किताब में एक बात लिखी है


जान अब्दुल्लाह
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कुर्बानी, खाल, दफन, 200 रुपया, भसड़
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Eat the frog किताब में एक बात लिखी है,

अगर आप अपग्रेड नही हो रहे तो इसका मतलब आप डिग्रेड हो रहे हो

इसको हिंदी में कहँगे कि अगर आप बढ़ नही रहे तो आप घट रहे हो क्योकि दुनिया लगातार बढ़ रही है ऐसे में बिना घटे, दुनिया की तुलना में आप घट जाओगे।

क्योकि आप जब पैदा हुए थे और आपके 2 साल बाद जो पैदा हुआ था, वो तकनीक में आपसे 2 साल आगे है।

यानी अगर आपने 2010 में बी टेक की थी तो आप खुद ब खुद उससे पीछे हो जिसने 2014 में बीटेक की है।

अब तकनीक की बात क्यों कर रहा हूँ?

आजकल बहुत से लोग यह दावा कर रहे है कि चमड़ा खरीदार किसी कोपचे मे बैठ कर प्लांनिग करके मदरसो से चमड़ा कम दाम पर ले रहे है।

यानी किसी भी चमड़े को बेचने का जो मदरसा के पास समय है उसको खत्म करने का दबाव मदरसे पर डालो, इससे मजबूरी में वह सस्ते दाम में देने को राजी हो जाएगा

इस तरह मदरसे से सस्ते में लेकर करोड़ो छाप लो।

इसलिये मुसलमानो को चाहिए कि इस साजिश का भंडा फोड़े

और वह कैसे??

चमड़े को ज़मीन में दबाकर और 200 रुपया मदरसे में देकर

हो गया हल, देखिये कितना बढ़िया हल निकाला, लेकिन क्या यही एक रास्ता है??

नही।

मुझे इतना पता है कि कोई भी चीज़ जिसपर वैल्यू एड् किया जाए वह कम से कम दुगना दाम में बिकता है। जो मदरसे आज तक चमड़े पर निर्भर थे उनके सामने अगर ऐसी विकट परिस्थिति है तो उनको इससे लड़ने की आवश्यकता है। वह मदरसे यदि चाहे तो बहुत छोटा सा स्किन टैनिंग का कोर्स अपने बालको को करवा सकते है। स्किन tann होने के बाद वह आराम से पूरे साल भी बेच सकते है ( क्योकि चमडा खराब नही होगा, जैसे आम का अचार बनाकर डालने पर अचार विक्रेता पूरे साल आराम से बेचता है)

या खुद skill develop करके उनसे टोपी बनाकर ऑनलाइन बेचा जा सकता है।

दारुलउलूम देवबंद इतना बड़ा ब्रांड है कि यदि वह अमज़ॉन की तरह एक सेल्लिंग प्लेटफार्म बना ले, जिसमे भारत भर के तस्बीह, जा नामज़, टोपी, बुर्के इत्यादि के मैन्युफैक्चरिंग वालो को जोड़ ले

तो जिस जिस देश में जमात जाती है वहा वहां यह एप पहुँच जाएगा

ऐसा करने से मैन्युफैक्चरिंग से लेकर डिलीवरी तक, सारा ताम झाम मुसलमानो के हाथ मे ही रहेगा और एक करकोली टोपी जो 1000 से 3000 की बिकती है ( कभी शरीफ मंज़िल ,बल्ली मारान जाकर निज़ाम काबुली की दुकान पर रेट देख लेना) आसानी से सभी सेक्टर को मुनाफा दे सकती है।

लेकिन यह काम effort मांगता है, खुद को अपग्रेड करने की कला मांगता है

पर हम तो है ही सबसे आगे और कितना आगे जाए, हम तो सबसे लेटेस्ट software पर है कितना अपग्रेड होए।

ठीक है फिर हर साल रोते रहो, कीमती चमड़े को गाड़ते रहो

ना उसके मोज़े बनाना, न टोपी, घड़ी के पट्टे, ना पासपोर्ट के कवर, न मोबाइल के कवर

यह सब चीन से लेते रहना फिर चीन पर भी मुसलमानो को सुवर की खाल की टोपी बेचने का आरोप लगाना फिर कही और मुँह कर लेना

करलो भाई आराम से करलो, जो मन मे आये करलो

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