दुनिया

जर्मन सरकार ने सीरिया में अपनी सेना भेजने से किया इंकार

 

अमेरिका पश्चिमी देशों के अगुवा के रूप में सीरिया में आतंकवादी गुटों का मुख्य समर्थक है

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अपने चुनावी वादों में घोषणा की थी कि वह दिसंबर 2018 में अमेरिकी सैनिकों को सीरिया से निकाल लेंगे।

इसके बावजूद वह इस संबंध में पुनर्विचार करने पर बाध्य हैं। ट्रंप सरकार का प्रयास है कि वह सीरिया के मामलों में अपने यूरोपीय घटकों को भी शामिल करे परंतु उसे अपने घटकों के विरोध का सामना है।

अमेरिका ने जर्मनी का आह्वान किया था कि वह अपने सैनिकों को सीरिया भेजे परंतु जर्मन सरकार के प्रवक्ता ने सोमवार को प्रेस कांफ्रेन्स में घोषणा की है कि उनका देश कोई भी सेना सीरिया नहीं भेजेगा और बर्लिन की यह नीति परिवर्तित नहीं होगी।

सीरिया के मामलों में अमेरिकी राष्ट्रपति के विशेष दूत जेम्स जेफ़री ने अभी हाल में जर्मनी का आह्वान किया था कि वह अपने सैनिकों को सीरिया भेजकर अमेरिका का सहयोग करे। साथ ही जेफ़री ने कहा था कि हम चाहते हैं कि जर्मन सैनिक सीरिया में हमारे सैनिकों का स्थान लें लें और हमें आशा है कि जर्मन सरकार हमारी मांग का जारी महीने में जवाब देगी।

वाशिंग्टन की इस मांग का जर्मन सरकार के अलावा इस देश की दूसरी पार्टियों ने भी विरोध किया है।

अमेरिका पश्चिमी देशों के अगुवा के रूप में सीरिया में आतंकवादी गुटों का मुख्य समर्थक है और अब भी वह सीरिया में आतंकवादी गुट दाइश से मुकाबले के बहाने अपनी ग़ैर कानूनी उपस्थिति जो जारी रखना और उसका औचित्य दर्शाना चाहता है।

साथ ही ट्रंप ने दो जून को कहा था कि सीरिया से अमेरिकी सैनिकों के निकल जाने के बाद भी अमेरिका सीरिया के कुर्दों की रक्षा करेगा।

बहरहाल अमेरिकी अधिकारियों के बयानों और क्रिया-कलापों के दृष्टिगत प्रतीत यह हो रहा है कि अमेरिका सीरिया में अपनी ग़ैर कानूनी उपस्थिति को जारी रखने पर आग्रह कर रहा है जबकि सीरिया ने राष्ट्रसंघ और विश्व समुदाय का आह्वान किया है कि वे अमेरिका का आह्वान करें कि वह अपने सैनिकों को जल्द से जल्द सीरिया से निकाल ले।

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