ब्लॉग

बलात्कार और राजनेता!

Joher Siddiqui
===========

आप कहते है ना, बलात्कार पर कठोर सज़ा का प्रावधान क्यों नहीं है? लंबी लंबी बहस चलती है, इस देश की तरह कानून होना चाहिए उस देश की तरह कानून होना चाहिए, बलात्कार पर प्रदर्शन करते है जुलूस निकालते हैं, बलात्कार पर खूब बात भी करते हैं, लेकिन असल मुद्दे को हम भूल जाते हैं, या उसपर बात करने की ज़रूरत भी महसूस नहीं करते हैं।

लेकिन सवाल ये है असल मुद्दा क्या है, बलात्कार? मैं मानता हूं, नहीं, असल मुद्दा है, बलात्कार होने की वजह। अरे नहीं मैं पहनावों को इसकी वजह नहीं बना रहा हूँ, मैं कहना चाहता हूं, असल वजह, वो बलात्कार के आरोपी राजनेता हैं, जो लोकसभा और राजसभा में बैठे हुए हैं।

मेरी अपनी एक समझ है, मैं मुद्दे के बजाय मुद्दे की वजह पर बात करना चाहता हूं। आप सोचिये, बलात्कार पर अंकुश कैसे लगेगा? इसपर कठोर कानून बना कर? उसपर सख़्ती से अमल कर के? लेकिन कानून कौन बनाएगा? वो कहाँ पास होगा? संसद भवन में न? वहां तो अच्छे तादात में बलात्कार के आरोपी बैठे हुए हैं, क्या वो खुद के ख़िलाफ़ कानून पास करेंगे?

जितने भी सांसद और विधायक उम्मीदवार चुन कर लोकसभा और राजसभा में पहुचे हैं, उनका आपराधिक रिकॉर्ड देखिए, लगभग आधे या उससे थोड़े कम पर बलात्कार जैसे संगीन आरोप लगे हुए हैं। फिर आप कैसे उम्मीद कर सकते हैं, देश मे बलात्कार जैसा अपराध कम या खत्म हो जाएगा?

हालांकि इसे ख़त्म करना बहुत आसान है, लेकिन अभी के भारत मे ये नामुमकिन जैसा है। क्या हो अगर लोकसभा या विधानसभा उम्मीदवार पर लगे सारे आरोपो के लिए एक अलग फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई हो, अगर वो दोष मुक्त हुए तो ही चुनाव लड़ सकते हैं नहीं तो वो चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। इसका लूप होल्स भी हो सकता है, लेकिन जब भारत मे बिना अपराध के 25-26 साल आतंकवाद जैसे सिर्फ़ झूठे आरोप की वजह से मुस्लमान नौजवान जेल में सज़ा काट सकते हैं, तो क्या ये राजनेता चुनाव लड़ने से रोके नहीं जा सकते है? आखिर कानून तो सबके लिए बराबर है ना?

उसके बाद जो राजनेता चुन कर संसद भवन पहुँचनेगे, मुझे नहीं लगता उन्हें बलात्कार जैसे घिनौने अपराध के लिए एक नए एक्ट बनाने में भी परेशानी होगी, जिसमे सेक्शन बाई सेक्शन क्लोज़ लिखा हो जिसपर कठोर सज़ा का प्रावधान हो, चाहे FIR में देरी हो, या जांच में कोताही या झूठा आरोप या सख़्त सज़ा।

अगर चाहा जाए तो सारी परेशानियों का हल है, लेकिन चाहने वाले खुद अपराध कर के बैठे हुए है, वो भला हमारे आपके लिए अपने आप को परेशानी में क्यों डुबोयेंगे! इसके लिए आपको ही कुछ करना पड़ेगा और हम आप तो सिर्फ ग़ुलाम है, जो हर 5 साल में वोट वाले दिन आज़ाद किये जाते हैं कि की जाओ आज तुम आज़ाद हो चुन लो आने वाले 5 सालों तक तुम्हे किसका ग़ुलाम बन कर रहना है।।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *