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मरने से पहले, कालेश्वर सोरेन ने अपनी आख़री संपत्ति, पलाश के पेड़ को डेढ़ किलो चावल की क़ीमत पर बेच दिया

Rahul Vikas
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मरने से पहले, कालेश्वर सोरेन ने अपनी आखरी संपत्ति, पलाश के पेड़ को डेढ़ किलो चावल की क़ीमत पर बेच दिया। उनका राशन कार्ड 2016 में रद्द कर दिया गया था, वज़ह उन्हें पता नहीं चली। उन्हें लेकिन तब से राशन मिलना बंद हो गया था।

जियान किस्कू और उनकी पत्नी रसोड़ी हेम्ब्राम ने भी अपनी आखरी बची संपत्ति, आंगन में पले मुर्गे को, 5 किलो चावल के बदले बेच दिया। उस चावल को उन्होंने जंगली पेड़ से रिसने वाले पीप के साथ खाया। इसके बाद खाना कहाँ से आएगा उन्हें नहीं मालूम। वे अभी ज़िन्दा हैं। उनका राशन कार्ड भी राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून 2013 के तहत रद्द हो गया। उन्हें अब कोई राशन नहीं मिलता।

पड़ौस के गाँव में लगने वाले हाट में एक बड़े स्क्रीन वाला सरकारी एल ई डी टी वी लगा है जो स्थानीय आदिवासी भाषा में बताता रहता है कि कैसे नरेंद्र मोदी की केंद्रीय सरकार और रघुबर दास की राज्य सरकार का डबल इंजिन झारखंड को नई ऊंचाइयों तक ले गया है।

21 जून अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को प्रधानमंत्री ने झारखंड के लोगों के साथ मनाया था तब से वहां योग से बीमारियों के उपचार के प्रोग्राम एक दूसरे टी वी स्क्रीन पर सतत चालू रहते हैं।

कंगाली भुखमरी की भयावहता को जानने की इच्छा यदि आप में बची हुई है तो द हिन्दू में ग्राउंड ज़ीरो नाम से छपी इस रिपोर्ट Death by Digital Exclusion को ज़रूर पढ़ें।

आभार द हिन्दु
? Satya Veer Singh

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