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सऊदी अरब और इमारात को हथियार बेचने के विरोध का प्रस्ताव फिर वीटो!

अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने विदेश नीति के व्यापारीकरण के परिप्रेक्ष्य में हथियारों की बिक्री को अपनी मुख्य प्राथमिकता बना रखा है और इसी परिप्रेक्ष्य में उन्होंने दो अरब देशों को हथियार बेचने के विरोध पर आधारित कांग्रेस के प्रस्ताव को वीटो कर दिया है।

ट्रम्प सरकार ने अमरीका के क्षेत्रीय घटकों के समर्थन और इसी तरह हथियारों की बिक्री से अधिक से अधिक आर्थिक लाभ उठाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा करके सऊदी अरब, संयुक्त अरब इमारात और जाॅर्डन को आठ अरब डाॅलर से अधिक के हथियार बेचे हैं। इसका अमरीकी सांसद कड़ा विरोध कर रहे हैं और उन्होंने कांग्रेस में प्रस्ताव पारित करके हथियारों के इन समझौतों को रद्द कराने की कोशिश की है लेकिन ट्रम्प ने उन प्रस्तावों को वीटो कर दिया है जिनमें मांग की गई थी कि राष्ट्रीय आपातकाल के बहाने सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात को हथियार न बेचे जाएं। ट्रम्प इससे पहले भी इन देशों का पक्ष लेते हुए कांग्रेस के प्रस्ताव को वीटो कर चुके हैं।

अमरीकी सांसदों ने जारी साल के अप्रैल महीने में भी यमन के ख़िलाफ़ सऊदी अरब के युद्ध में अमरीका की भागीदारी के ख़िलाफ़ प्रस्ताव पारित किया था। अमरीकी सेनेट के सांसद, चाहे वे डेमोक्रेटिक पार्टी के हों या रिपब्लिकन पार्टी के, राष्ट्रीय आपातकाल के नाम पर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े फ़ैसलों से कांग्रेस को दूर रखे जाने से अत्यधिक अप्रसन्न हैं। यमन युद्ध के बारे में कांग्रेस के प्रस्ताव के समर्थकों का कहना था कि इस युद्ध में अमरीका का शामिल होना देश के संविधान के विरुद्ध है क्योंकि संविधान में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि किसी भी युद्ध में अमरीका के शामिल होने के बारे में राष्ट्रपति नहीं बल्कि कांग्रेस फ़ैसला करेगी। बहरहाल ट्रम्प ने 16 अप्रैल को कांग्रेस के उस प्रस्ताव को वीटो कर दिया था जिसमें मांग की गई थी कि अमरीका, यमन युद्ध में सऊदी गठजोड़ का सैन्य समर्थन बंद करे।

इस समय भी ट्रम्प ने सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात को हथियार बेेचने पर प्रतिबंध के कांग्रेस के प्रस्ताव को वीटो करके वास्तव में सासंदों विशेष कर डेमोक्रेट्स को एक बार फिर यह याद दिलाया है कि हथियारों की बिक्री जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों के बारे में फ़ैसले की ज़िम्मेदारी राष्ट्रपति की है और कांग्रेस को इन मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

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