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सुप्रीम कोर्ट ने मॉब लिंचिंग पर मांगा केन्द्र और राज्यों से जवाब

मॉब लिंचिंग रोकने के लिए उठाए गए कदमों पर सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र और 10 राज्यों को नोटिस जारी किया है।

हिंदुस्तान के अनुसार भारत के सुप्रीम कोर्ट ने मॉब लिंचिंग को लेकर पेश की गई एक याचिका पर सुनवाई करते हुए केन्द्र सरकार और दस राज्यों से पूछा है कि उन्होंने मॉब लिंचिंग को रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं?

याचिका में यह आरोप लगाया गया था कि इन राज्य सरकारों ने ऐसी भीड़ हिंसा या मॉब लिंचिंग को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट की तरफ से जारी 10 सूत्रीय निर्देश का पालन नहीं किया है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल मॉब लिंचिंग के बढ़ते मामलों को देखते हुए इसे रोकने के लिए कुछ क़दम बताए थे। कोर्ट के अनुसार इनमें से एक कदम यह था कि ऐसे अपराधों से निपटने के लिए कड़ाई से क़ानून का पालन किया जाए जो क़ानून के सिद्धांत और देश के सामाजिक तानेबाने के लिए ख़तरा हैं।

शुक्रवार को भारत के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली एक बेंच ने केन्द्र, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान सहित 10 राज्यों को याचिका पर कार्रवाई को लेकर नोटिस जारी किया था।

ज्ञात रहे कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से यह नोटिस ऐसे समय जारी किया गया है कि भारत की 49 हस्तियों ने इस देश के प्रधानमंत्री मोदी के नाम खत लिखा है। इस खत में मुस्लिम, दलित और अन्य समुदायों के खिलाफ हो रही मॉब लिंचिंग पर रोक की मांग की गई है।

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