साहित्य

हज़रत सुलेमान का सेब : कहानी पार्ट -1

प्राचीन काल में एक राजा था जिसके तीन बेटे थे।

उनके नाम मलिक मोहम्मद, मलिक इब्राहीम और मलिक जमशेद थे। राजा का एक बहुत बड़ा और अजीबो ग़रीब बाग़ था और क्योंकि उसका प्रवेश द्वार हमेशा बंद रहता था, इसलिए न वह ख़ुद उसमें जाता था और न ही कोई दूसरा राजा के भय से उसके निकट जाने की हिम्मत करता था। समय गुज़रता गया और राजा बूढ़ा हो गया और जब उसकी हालत ख़राब होने लगी और उसे लगा कि अब उसका अंतिम समय आ गया है तो उसने अपने तीनों बेटों को बुलाया और जब उसने अपने धन-दौलत और शासन की ज़िम्मेदारियां उनके बीच बाट दीं तो उन्हें वसीय करते हुए कहा कि कोई भी उस बाग़ का द्वार न खोले। राजा ने यह कहा और इस दुनिया से चला गया।

बेटों ने बाप का अंतिम संस्कार किया और समस्त रसमों को अंजाम दिया। जब वे यह रस्में करके निपट गए तो बड़े बेटे मलिक मोहम्मद ने सोचा, दुख की बात है कि यह बाग़ इसी तरह से बेकार पड़ा रहे। उसके आदेश पर बाग़ के द्वार को खोला गया और वह अपने वज़ीर, वकील और सेना के साथ उसमें गया। वे चलते गए चलते गए यहां तक कि पीछे वाले द्वार से बाहर निकल गए। वे इसी तरह जंगल में चलते रहे यहां तक कि अचानक उनकी नज़र एक सुन्दर हिरन पर पड़ी, वह आकर उनके सामने खड़ा हो गया और मलिक मोहम्मद की ओर देखकर कहा, तेरे सिर के ऊपर से कूदकर जाऊं या तेरे सैनिकों के। मलिक मोहम्मद ने कहा मेरे सिर के ऊपर से। हिरन उसके सिर के ऊपर से छलांग लगाकर भाग गया। कौन है जो इस हिरन को पकड़ कर लाएगा। उसने यह कहकर उसके पीछे अपना घोड़ा डाल दिया। उसका पीछा करते करते एक शहर के द्वार पर पहुंच गया, हिरन ने द्वार पर पहुंचकर फिर से कहा, मलिक मोहम्मद तू यहीं ठहर, मैं जाकर अभी वापस आता हूं। मलिक मोहम्मद कि जो आश्चर्यचकित और हैरान था, कुछ देर वहीं खड़ा रहा, कुछ देर बाद एक व्यक्ति उस शहर से बाहर निकला और उसने कहा, हे भाई राजा को तुझसे कुछ काम है, मेरे साथ चल।

वह व्यक्ति यह कहकर चल पड़ा। मलिक मोहम्मद भी उसके पीछे पीछे चल दिया, ताकि देखे कि क्या बात है। अब आगे सुनिए, इस शहर के राजा की एक लड़की थी कि जो वर्षों से कुछ नहीं बोली थी और उसने एक शब्द भी नहीं कहा था। जैसे ही मलिक मोहम्मद ने महल में प्रवेश किया राजा ने उसे अपनी बेटी के बारे में बताया और कहा, अगर सुबह होने तक तेरे प्रयास से यह लड़की बोलने लगी तो इस लड़की की शादी तुझी से कर दूंगा, लेकिन अगर तू सफल नहीं हो सका तो कल सुबह तेरा सिर शरीर से अलग कर दूंगा।

मलिक मोहम्मद यह बात स्वीकार करना नहीं चाहता था, लेकिन कुछ सिपाही आए और ज़बरदस्ती उसे लड़की के कमरे में ले गए और उसे अंदर धकेल कर दरवाज़ा बंद कर दिया।

मलिक मोहम्मद के बारे में आप लोगों को बाद में बतायेंगे, अब सुनि दूसरे दो भाईयों का क्या हुआ। मलिक इब्राहीम ने जब सुना कि उसके बड़े भाई के साथ क्या घटना घटी है तो कुछ समय तक उसने इंतेज़ार किया, बाद में सोचा कि हाथ पर हाथ धरे रहने से कोई फ़ायदा नहीं है। उसने शासन की ज़िम्मेदारी सबसे छोटे भाई मलिक जमशेद को सौंपी और अपने भाई की खोज में उसी रास्ते से जिससे बड़ा भाई गया था चल पड़ा।

वह चलता गया चलता यहां तक कि उसी स्थान पर पहुंच गया जहां मलिक मोहम्मद अपनी सेना से जुदा हुआ था। वहां पहुंचते ही एक हिरन उसके सामने आया और उसके सिर से छलांग लगाकर भाग खड़ा हुआ। मलिक इब्राहीम उसके पीछे दौड़ पड़ा और इतना दौड़ा कि अचानक उसने अपने आप को एक शहर के दरवाज़े पर देखा। वे कोई भी तरह हिरन ने उससे कहा कि यहीं खड़ा रहे ताकि वह वापस लौटकर आ जाए। मलिक इब्राहीम वहीं रुक गया और कुछ देर के बाद वही व्यक्ति आया और उसे राजा के पास ले गया। राजा वही बातें जो मलिक मोहम्मद से कही थीं, मलिक इब्राहीम से भी कहीं और कहा कि तेरा भाई मलिक मोहम्मद एक रात में मेरी बेटी को बुलवाने में सफल नहीं हो सका, मैंने भी उसका सिर क़लम करने का आदेश दे दिया। इस बार भी कुछ लोग आए और उन्होंने उसे पकड़कर कमरे में बंद कर दिया। इस बेचारे के पास भी लड़की को बुलवाने के लिए केवल सुबह तक का समय था। जब सुबह हुई और वह लड़की को बुलवाने में असफल हो गया तो उसकी भी गर्दन मार दी गई।

मलिक जमशेद ने जब देखा कि उसके दोनों भाईयों के बारे में कोई सूचना नहीं है। तो उसने सोचा कि वह अपने भाईयों को इसी तरह कैसे छोड़ सकता है। उसने अपना सामान तैयार किया और अपने भाईयों की खोज में चल पड़ा। वह भी उसी ओर चल दिया कि जिधर उसके दोनों भाई गए थे। वह चलता गय चलता गया यहां तक कि उसी जगह पहुंच गया जहां हिरन आता था और बात करता था। जैसे ही वह वहां पहुंचा हिरन उसके सामने आया और वही बातें कहीं। राजकुमार ने भी उसके पीछे अपना घोड़ा सरपट दौड़ा दिया।

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