इतिहास

17 जुलाई का इतिहास : 17 जुलाई 1968 को इराक़ में अहमद हसन अलबक्र के नेतृत्व में विद्रोह करके बास पार्टी ने सत्ता पर क़ब्ज़ा किया

ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार 17 जुलाई वर्ष का 198 वाँ (लीप वर्ष में यह 199 वाँ) दिन है। साल में अभी और 167 दिन शेष हैं।

17 जुलाई की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ

1994 – धूमकेतू शुमेकर लेवी-9 का पहला टुकड़ा बृहस्पति से टकराया।
2002 – रूस की स्वेतलाना फीफाप्रोवा ने पोल वाल्ट स्पर्द्धा में नया यूरोपीय रिकार्ड क़ायम किया।
2003 – उत्तर पूर्व कांगो के दुनिया शहर में जातीय हिंसा में 54 लोग मारे गये।
2006 – कैप कनैवरल (फ़्लोरिडा) के स्पेस सेंटर में अपनी 13 दिन की अंतरिक्ष यात्रा पूरी कर डिस्कवरी अंतरिक्ष यान पृथ्वी पर सकुशल उतरा।
2008 – अफ़ग़ानिस्तान में नाटो सेनाओं ने पाकिस्तान में छिपे आतंकियों पर मिसाइलों व हेलीकॉप्टरों से हमला किया।

17 जुलाई को जन्मे व्यक्ति
1943 – फ़्लाइंग ऑफ़िसर निर्मलजीत सिंह सेखों – परमवीर चक्र सम्मानित भारतीय सैनिक
1923 – बेगम आबिदा अहमद – भारत के पाँचवे राष्ट्रपति फ़ख़रुद्दीन अली अहमद की पत्नी।

17 जुलाई को हुए निधन
2018 – रीता भादुड़ी – हिन्दी सिने जगत की जानीमानी अभिनेत्री थीं।
2013 – बरुन डे, प्रसिद्ध इतिहासकार
2005 – आई. जी. पटेल – भारतीय रिज़र्व बैंक के चौदहवें गवर्नर।
1992 – कानन देवी – भारत की प्रसिद्ध अभिनेत्री, गायिका और फ़िल्म निर्माता।
1790 – एडम स्मिथ – यह एक प्रसिद्ध स्कॉटिश नीतिवेत्ता, दार्शनिक और राजनैतिक अर्थशास्त्री थे।
1979 – लालमणि मिश्र – भारतीय संगीत जगत के ऐसे मनीषी थे, जो अपनी कला के समान ही अपनी विद्वता के लिए भी जाने जाते थे।
1972 – इंदुलाल याज्ञिक – गुजरात के प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ और ‘ऑल इंडिया किसान सभा’ के नेता।
1928 – अलेक्जेन्डर मडीमैन – उत्तर प्रदेश के राज्यपाल, गवर्नर जनरल की गृह विभाग की समिति के सदस्य।

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17 जुलाई सन 1968 ईसवी को इराक़ में अहमद हसन अलबक्र के नेतृत्व में विद्रोह करके बास पार्टी ने सत्ता पर क़ब्ज़ा कर लिया।

17 जुलाई सन 1712 को इंग्लैंड, पुर्तगाल और फ्रांस ने युद्धविराम संधि पर हस्ताक्षर किए।
17 जुलाई सन 1850 को हार्वर्ड वेधशाला ने तारे का पहला चित्र लिया।
17 जुलाई सन 1924 को ऑस्ट्रेलिया में संघीय चुनाव में मतदान अनिवार्य हो गया।
17 जुलाई सन 1947 को भारतीय यात्री जहाज़ रामदास मुम्बइ के पास तूफ़ान में फंसकर डूब गया जिसमें 625 लोगों की मौत हो गई।
17 जुलाई सन 2014 को मलेशिया एयरलाइंस के विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से २८३ यात्री और चालक दल के १५ सदस्यों की मौत हो गई।

17 जुलाई सन 1968 ईसवी को इराक़ में अहमद हसन अलबक्र के नेतृत्व में विद्रोह करके बास पार्टी ने सत्ता पर क़ब्ज़ा कर लिया। इसके बाद राष्ट्रपति अब्दुर्रहमान आरिफ़ को अपदस्थ कर दिया गया बास पार्टी के सत्ता में पहुंचने के बाद पार्टी के दूसरे नंबर के नेता के रूप में सद्दाम, ने विरोधियों का दमन आरंभ किया सद्दाम ने बड़ी ही बर्बरता का प्रदर्शन करके देश में आतंक फैला दिया। वर्ष 1979 में सद्दाम ने दबाव डालकर हसन अलबक्र को अपदस्थ कर दिया और देश की बागडोर अपने हाथ में ले ली। इसके बाद सद्दाम ने पार्टी के भीतर भी अपने विरोधियों का सफ़ाया आरंभ कर दिया। सद्दाम ने तानाशाह के रूप में शासन किया और इस शासन काल में इराक़ ने दो पड़ोसी देशों इस्लामी गणतंत्र ईरान और कुवैत पर आक्रमण किए जिससे पूरे क्षेत्र के लिए संकट उत्पन्न हो गया जबकि इराक़ अत्यंत दयनीय स्थिति में पहुंच गया। इस प्रकार फ़ार्स की खाड़ी के क्षेत्र में विदेशी सेनाओं को घुसने का अवसर मिल गया। अंततः अमरीका और ब्रिटेन ने इराक़ पर आक्रमण करके अप्रैल सन 2003 में सद्दाम शासन का अंत कर दिया किंतु अब भी बास शासन के बहुत से तत्व अमरीका के साथ सांठगांठ करके इराक़ी जनता का जनसंहार कर रहे हैं।

17 जुलाई सन 1790 ईसवी को स्काटलैंड के दार्शनिक व अर्थ शास्त्री एडम स्मिथ का निधन हुआ। वे सन 1723 ईसवी में जन्मे थे आरंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने ग्लास्गों और आक्सफोर्ड विश्वविद्यालयो में उच्च शिक्षा ग्रहण की और फिर ग्लास्गों विश्वविद्यालय में पढ़ाने लगे। वह वैसे तो दर्शनशास्त्र पढ़ाते थे किंतु साथ ही अर्थशास्त्र के भी अध्ययन में व्यस्त रहते थे। उन्हें नवीन अर्थ शास्त्र का जनक कहा जाता है। एडमस्मिथ आर्थिक स्वतंत्रता, व्यक्तिगत हित और व्यवसाय के सही विभाजन जैसे विचारों के पक्षधर थे।

17 जुलाई सन 1913 ईसवी को फ्रांस के विख्यात दार्शनिक व लेखक रोजर गैरोडी का मार्से नगर में जन्म हुआ। आरंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद वे विश्वविद्यालय पहुंचे जहां उन्होंने तीन विषयों दर्शनशास्त्र, साहित्य तथा संस्कृति व सभ्यता में डाक्ट्रेट किया। फ्रांस पर जर्मनी के अधिकार के दौरान उन्होंने हिटलर के फ़ासीवाद का विरोध किया जिसके चलते उन्हें वर्ष 1940 से 1943 तक जर्मनी की जेल में रहना पड़ा जो युद्ब बंदियों के लिए बनाई गई थी। 36 वर्षों तक वे फ्रान्स की कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य रहे जबकि 25 वर्ष वे पार्टी की केन्द्रीय कमेटी के सदस्य भी रहे। कम्युनिज़्म और लिबरलिज़्म से गैरोडी संतुष्ट नहीं हुए जिसके बाद उन्होंने इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया। वर्ष 1979 में ईरान में इस्लामी क्रान्ति की सफलता का इस्लाम की ओर उनके झुकाव में बड़ा प्रभाव रहा। उन्होंने ज़ायोनिज़्म के बारे में अपने विचार बड़े साहस के साथ व्यक्त किए उन्होंने इस्राईल की कहानी और ज़ायोनी राजनीति के नाम से एक पुस्तक लिखी जिसके चलते उन पर मुक़द्दमा चलाया गया। उनकी दूसरी पुस्तक इस्राईल के नीति निर्धारक के मिथक नाम से प्रकाशित हुई जिस पर ज़ायोनी बिफर उठे और हिटलर के हाथों साठ लाख यहूदियों की हत्या के अतिशयोक्तिपूर्ण दावे की पोल खोल देने के नाते उन्हें न्यायालय के कटहरे मे पहुंचा दिया गया। इस दार्शनिक ने अनेक पुस्तकें लिखी हैं जिनमें बीसवीं शताब्दी की कथा, अमरीका पतन का अगुवा और इस्लाम के वचन आदि का नाम लिया जा सकता है।


17 जुलाई सन 1945 ईसवी को दूसे विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन अमरीका और सोवियत संघ का पोट्सडैम शिखर सम्मेलन हुआ। इस सम्मेलन मे एक समझौते पर हस्ताक्षर हुए जिसके अन्तर्गत दूसरे विश्व युद्ध के दौरान की संयुक्त देशों की निरीक्षण परिषद और सम्मेलन में भाग लेने वाले तीनों देशों की सैनिक कमान और फ्रांस को कुछ अधिकार दिए गए। इन अधिकारों के आधार पर हर देश को जर्मनी के उस भाग का संचालन सौंपा गया जिसपर उसका अधिकार था किंतु सोवियत संघ और पश्चिमी देशों के बीच मतभेद उत्पन्न हो जाने के कारण इसे पूर्ण रूप से लागू नहीं किया जा सका।

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26 तीर सन 1352 हिजरी शम्सी को मुहम्मद दाऊद ख़ान ने अफ़ग़ानिस्तान में एक विद्रोह द्वारा मुहम्मद ज़ाहिर शाह को अपदस्थ कर दिया और वहॉं लोकतॉत्रिक शासन लागू किया। दो वर्ष पश्चात दाऊद ख़ान अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति बन गए और उन्होंने जनता के विद्रोह को कड़ाई से कुचल दिया। दाऊद ख़ान के काल में पूर्व सोवियत संघ ने अपने प्रतिद्वंद्वी अमरीका के मुक़ाबले में अफ़ग़ानिस्तान में अपना प्रभाव बढ़ाया। 1357 हिजरी शमसी में सोवियत संघ के जासूस नूर मुहम्मद टरकी ने एक और विद्रोह द्वारा दाऊद ख़ान की सरकार को गिरा दिया और अफ़ग़ानिसतान की सत्ता को अपने हाथ में ले लिया।

26 तीर वर्ष 1315 हिजरी शम्सी को ईरान के प्रसिद्ध सुलेखक व नस्तालीक़ लीपि में दक्ष मुह्म्मद हुसैन सैफ़ी क़ज़वीनी का जिनकी उपाधि इमादुल कत्ताब थी, निधन हुआ। उन्होंने युवाअवस्था में ज्ञान प्राप्त करने के अतिरिक्त अरबी तथा फ़्रांसीसी भाषाएं भी सीखना आरम्भ किया उस के बाद सैफ़ी क़ज़वीनी ईरान के महाकवि फ़िरदौसी की काव्य रचना शाहनामा लखने में व्यस्थ हो गए और तीन वर्ष की अवाधि में उन्होंने यह काम समाप्त कर दिया।

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14 ज़ीक़ादा सन 387 ईसवी को इराक़ के बग़दाद नगर में विख्यात धर्मगुरु और वक्ता इब्ने समऊन का निधन हुआ। उन्होंने ज्ञान प्राप्ति के लिए बहुत सी यात्राएं की जिसके परिणाम स्वरुप वे कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखने में सफल हुए।

उनकी पुस्तकों में अलअमाली नामक पुस्तक का नाम लिया जा सकता है। जो मुस्लिम धर्मगुरओं के बीच प्रसिद्ध पुस्तकों में से है।

14 ज़ीक़ादा सन 1294 ईसवी को मुसलमान विद्वान और कुशल शिक्षक आयतुल्ला जुन्नूरी का ईरान के उत्तर पश्चिमी क्षेत्र तबरेज़ में जन्म हुआ। उन्होंने तबरेज़ में रहकर धार्मिक विषयों और अरबी साहित्य की शिक्षा ली। और फिर उच्चस्तरीय शिक्ष के लिए इराक़ के नजफ़ नगर रवाना हो गये। नजफ़ में ज्ञान प्राप्ति के बाद वे ईरान लौटे और लोगों की शिक्षा एवं प्रशिक्षण में लीन हो गये। उनके कुशल शिष्यों की संख्या बहुत थी। उन्होंने कई लाभदायक पुस्तकें भी लिखी हैं।

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