धर्म

अल्लाह वालो की सिफ़त : #सहारे #मत #तलाश #करो

आमिर हकीम आयुर्वेदाचार्य
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#सहारे #मत #तलाश #करो

*_ईरान का एक बादशाह सर्दियों की शाम जब अपने महल में दाखिल हो रहा था तो एक बूढ़े दरबान को देखा जो महल के सदर दरवाज़े पर पुरानी और बारीक वर्दी में पहरा दे रहा था।_*

*_बादशाह ने उसके करीब अपनी सवारी को रुकवाया और उस ज़ईफ़ दरबान से पूछने लगा ;_*

*_”सर्दी नही लग रही ?”_*

*_दरबान ने जवाब दिया “बोहत लग रही है हुज़ूर ! मगर क्या करूँ, गर्म वर्दी है नही मेरे पास, इसलिए बर्दाश्त करना पड़ता है।”_*

*_”मैं अभी महल के अंदर जाकर अपना ही कोई गर्म जोड़ा भेजता हूँ तुम्हे।”_*

*_दरबान ने खुश होकर बादशाह को फर्शी सलाम किया और आजिज़ी का इज़हार किया।_*

*_लेकिन बादशाह जैसे ही महल में दाखिल हुआ, दरबान के साथ किया हुआ वादा भूल गया।_*

*_सुबह दरवाज़े पर उस बूढ़े दरबान की अकड़ी हुई लाश मिली और करीब ही मिट्टी पर उसकी उंगलियों से लिखी गई ये तहरीर भी ;_*

*_”बादशाह सलामत ! मैं कई सालों से सर्दियों में इसी नाज़ुक वर्दी में दरबानी कर रहा था, मगर कल रात आप के गर्म लिबास के वादे ने मेरी जान निकाल दी।”_*

*_सहारे इंसान को खोखला कर देते है। उसी तरह उम्मीदें कमज़ोर कर देती है, अपनी ताकत के बल पर जीना शुरू कीजिए, असल सहारा उस मालिक़ का है जो ज़िन्दगी में भी हमारे साथ है और मरने के बाद भी जिसकी रहमत हम को तनहा नही छोड़ती।_*??

बेशक़

अल्लाह वालो की सिफत

एक बार हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अनहु बाज़ार में चल रहे थे।
वह एक शख्स के पास से गूज़रे जो दुआ कर रहा था।
“ऐ अल्लाह!! मुझे चन्द लोगों में शामिल कर।”
“ऐ अल्लाह मुझे चन्द लोगों में शामिल कर।”
उमर रज़ियल्लाहु अन्हु ने उससे पूछा।
“यह दुआ तुमने कहां से सीखी?”

वह बोला, अल्लाह की किताब से।
अल्लाह ने क़ुर्आन मे फरमाया है।
“और मेरे बन्दों में सिर्फ चन्द ही शुक्र गुज़ार हैं”
– (अल्-कुरआन34:13 )

हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अनहु यह सुन कर रो पडे और अपने आपको यह नसीहत करते हूए बोले,
ऐ उमर!! लोग तुमसे ज़्यादह इल्म वाले हैं, ऐ अल्लाह मुझे अपने चन्द लोगों में शामिल कर”

> हम देखते हैं कि जब हम किसी शख़स से कोई गुनाह का काम छोडने के लिए कहते हैं तो वह यही कहता है कि ये तो अकसर लोग करते हैं मैं कोई अकेला थोडी ना ऐसा करता हूं।

लेकिन अगर आप पवित्र क़ुर्आन में शब्द *”अकसर लोग”*
सर्च करें तो आप को यह उत्तर मिलेगा ।

“अकसर लोग नहीं जानते” – (अल्-क़ुर्आन7:187)

“अकसर लोग शुक्र अदा नहीं करते”
– (अल्-क़ुर्आन, 2:243)

“अकसर लोग ईमान नहीं लाए”
– (अल्-क़ुर्आन, 11:17)

“अकसर लोग शदीद नाफरमान हैं” – (अल्-क़ुर्आन, 5:59)

“अकसर लोग जाहिल हैं” – (अल्-क़ुर्आन, 4:111)

“अकसर लोग राहे हक से हट जाने वाले हैं” – (अल्-क़ुर्आन,21:24 )

> तो अपने आपको चन्द लोगों मे डालो जिन के बारे में अल्लाह ने फरमाया

“मेरे थोडे ही बन्दे शुक्र गुज़ार हैं” – (अल्-क़ुर्आन,34:13)

* “और कोई ईमान नहीं लाया सिवाय चन्द के” – (अल्-क़ुर्आन,11:40 )

“नेमत भरी जन्नतों में होंगे; अगलों में से तो बहुत-से होंगे, किन्तु पिछलों में से कम ही” – (अल्-क़ुर्आन, 56:12,13,14,)

तो लिहाजा मेरे अज़ीज़ भाइयो और बहनो!!
इन्हीं चन्द लोगो मे अपने आप को शामिल करें।
और इसकी बिल्कुल फरवाह न करें कि इस रास्ते पर आप अकेले हैं।
बिलाशुबा अक्सर हक़ के रास्ते पर चन्द (बहुत कम)होते हैं ।
मगर कामयाब भी हक पर चलने वाले ही होते हैं।
क्योंकि बेशक अल्लाह उनके साथ होता है।

“ऐ अल्लाह !!!
हमें भी हक़ पर चलने वाले उन चन्द कामयाब लोगों में शामिल कर,
जिन पर तेरा करम व फ़ज़ल और ईन्आम हुवा है।”

आमीन । या रब्बल्आलमीन।

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