धर्म

इस्लाम से पहले भी क़ुरैश मे उन की बड़ी इज़्ज़त थी और हया वाले और सख़ी थे

सय्यद आमिर सलाफ़ी
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आपका नाम, उस्मान और लक़ब ज़ुन्नूरैन है ।
आपका का नसब पांचवी पुश्त यानी अब्दे-मनाफ मे हुज़ूर अलैहिस्सलाम से जा कर मिल जाता है !

आपकी पैदाइश वाक़िअ-ए-फील के छ: साल बाद हुई,
हज़रत अबू बक्र रज़ी• की रहनुमाई करने के बाद इस्लाम ले कर आए !

आपका क़द मुतवस्सित (दरमियाना) था और रंग सफेद माइल ब’ज़र्दी था, सीना कुशादा (चौड़ा) था, दाढ़ी घनी थी, सर पर बाल रखते थे, अखीर उम्र मे बालों मे ज़र्द ख़िज़ाब लगाया करते थे और दांत को सोने के तार से बंधाया हुआ था !

इस्लाम से पहले भी क़ुरैश मे उन की बड़ी इज़्ज़त थी और हया (शर्म) वाले और सख़ी (फैय्याज़) थे ।
हुज़ूर आलैहिस्सलाम के दामाद थे और आपके निकाह मे एक के बाद एक हुज़ूर अलैहिस्सलाम की दो बेटियां आईं ।
पहले हज़रत रुक़य्या रज़ी• से आपका निकाह हुआ,

जब गज़व-ए-बद्र के मौक़े पर हजरत रुकैय्या रज़ी. का इंतिक़ाल हो गया तो फिर हज़रत उम्मे-कुलसूम रज़ी• आपके निकाह मे आईं, इसी लिए आपको ज़ुन्नूरैन (दो नूर वाले ) कहते हैं ।

हज़रत उस्मान के अलावा दुनिया मे और कोई नही कि जिनके निकाह मे एक नबी की दो बेटियां आई हों !

हज़रत उमर फारूक़ रज़ी• के बाद आप खलीफा के लिए चुने गए और तक़रिबन बारह साल (11 साल 353 दिन) खिलाफत करने के बाद 18 ज़िलहिज्जा सन 35 हिजरी को बड़ी मज़लूमियत के साथ बाग़ियों के हाथों शहीद हुए !

एक मुद्दत तक आपने वही ( क़ुरआन मजीद) की किताबत (लिखने) का काम भी किया , इसके अलावा हुज़ूर अलैहिस्सलाम के निजी ख़ुतूत लिखना भी आपके ही ज़िम्मे था !

नेकी के कामों मे अल्लाह की तरफ से आपको अज़ीमुश्शान तौफीक़ मिली हुई थी, तहज्जुद की नमाज़ का यह आलम था, कि रात को बहुत थोड़ी देर आराम करते थे और क़रीब क़रीब पूरी रात नमाज़ पढ़ते थे, साइमुद्दहर थे इय्याम ममनूआ (यानी जान दिनों मे रोज़ा रखना मना है) को छोड़कर हमेशा रोज़ा रखते थे, जिस दिन शहादत हुई उस दिन भी रोज़ा थे, सबका खैरात करने मे तो आंधी की तरह तेज़ थे हर जुमा को एक ग़ुलाम आज़ाद करते थे अगर किसी जुमा को गुलाम न मिलता तो दूसरे जुमा को दो आज़ाद करते ।

मस्जिद नबवी पहले बहुत छोटी थी क़रीब की एक ज़मीन बिक रही थी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि जो शख्स इस ज़मीन को खरीद कर मेरी मस्जिद मे शामिल करदे उसको जन्नत मिलेगी, हज़रत उस्मान रज़ी• ने बीस हज़ार ये पच्चीस हज़ार दिरहम मे वह ज़मीन खरीद कर मस्जिद मे शामिल करदी !

आपके दौर मे दो तरह की फुतूहात ( जीत ) हासिल हुई,
1;- कुछ मुल्क ऐसे थे जो हज़रत उमर रज़ी• के खिलाफत के ज़माने मे फतह हो चुके थे, फिर उन्होंने बगावत कर दी बाद मे हज़रत उस्मान रज़ी• ने दोबारा फतह किया,
2;- कुछ नए मुल्कों इसलाम के क़ब्ज़े मे आए !

हज़रत उस्मान रज़ी• के बारे मे हुज़ूर का फरमान

हज़रत आयशा रज़ी• फरमाती हैं कि हुज़ूर अलैहिस्सलाम ने हज़रत उस्मान रज़ी• के बारे मे फरमाया कि मैं उस शख्स से क्यूं हया न करूं जिससे फरिश्ते हया करते हैं !

हज़रत तलहा रज़ी• फरमाते हैं कि हुज़ूर अलैहिस्सलाम ने फरमाया कि हर नबीं के कुछ रफीक़ होते हैं मेरे रफीक़ जन्नत मे उस्मान हैं !

? ; सीरत खुलफाए राशिदीन , (सीरत-ए-ज़ुन्नूरैन) पेज न• 156 से पेज न• 188 तक
लेखक , इमाम-ए-अहले-सुन्नत हज़रत मौलाना अब्दुशशकूर साहब फारूक़ी लखनवी रह•

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