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एनआरसी को लेकर भाजपा के बदले सुर, लेकिन क्यों?

भारत के गृहमंत्री और भाजपा के पूर्व अध्यक्ष अमित शाह ने मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सितंबर 2018 में भोपाल में भाजपा कार्यकर्ता महाकुंभ रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि, भाजपा के लिए देश की सुरक्षा पहली प्राथमिकता है, भारत के नागरिकों पर रजिस्टर बनते ही अवैध घुसपैठियों की सूची बन जाएगी, पूरे देश से घुसपैठियों को निकालने की शुरुआत असम से की जाएगी।

प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, एनआरसी का पहला मसौदा जारी होने के बाद से अमित शाह समेत कई भाजपा नेता ‘घुसपैठियों’को निकालने के लिए पूरे देश में एनआरसी लाने की पैरवी कर रहे थे। अब असम में एनआरसी के प्रकाशन से पहले भाजपा ने इसके ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया है। असम में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीज़न्स (एनआरसी) राज्य में ‘विदेशियों’ की पहचान के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो रही है, लेकिन इसका उल्लेख अक्सर भाजपा नेताओं के चुनावी भाषण में उनकी उपलब्धि के बतौर होता रहा है। हालांकि अब जब एनआरसी के प्रकाशन में केवल दो दिन शेष हैं, भाजपा के सुर एनआरसी को लेकर बदले हुए हैं। उसका कहना है कि एनआरसी में मूल निवासियों और असली भारतीयों के नाम छूट गए हैं और ‘अवैध प्रवासियों’ के नाम शामिल हैं।

एबीवीपी के स्टेट जॉइंट सेक्रेटरी देबाशीष रॉय का कहना था कि बहुत से मूल निवासियों के नाम एनआरसी में नहीं आए हैं, बजाय इसके अवैध प्रवासियों के नाम इसमें जुड़ गए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रीवेरिफिकेशन के नाम पर ऐसी एनआरसी बनाई है, जिसमें अवैध प्रवासियों के नाम हैं और यह स्वीकार नहीं किया जायेगा। इस बीच असम के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता तरुण गोगोई इसे भाजपा सरकार की विफलता मानते हैं। उनका कहना है कि सरकार ‘बांग्लादेशियों को निकाल फेंकने’ के अपने वादे में नाकाम रही है। उन्होंने कहा, ‘वे एक सही एनआरसी बनाने में नाकाम रहे हैं। तरुण गोगोई ने कहा कि यह भारत सरकार के लिए शर्म की बात है कि पांच साल से अधिक समय में भी वे इसे नहीं कर पाए। उन्होंने कहा कि, मेरा सवाल है कि नए क़ानून की क्या ज़रूरत है? जब यह साफ़ है कि एनआरसी गड़बड़ है तो नए क़ानून लाने से क्या हो जायेगा?’

कांग्रेस इसे भाजपा का राजनीतिक पैंतरा मान रही है। गोगोई का कहना है, ‘अगर ग़लत नाम जुड़े तो इसका ज़िम्मेदार कौन है? भाजपा ने वादा किया था कि वे विदेशियों की पहचानकर उन्हें वापस भेजेंगे, पर अब वे मान रहे हैं कि एनआरसी में विदेशियों के नाम हैं। बीते चार वर्षों से वे एनआरसी पदाधिकारियों पर कोई आरोप नहीं लगा रहे थे लेकिन बीते तीन महीनों में उन्हीं पर आरोप लगाए जा रहे हैं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘इसके लिए गृह मंत्रालय ज़िम्मेदार है और उनका हिंदुत्व कार्ड बीच में आ रहा है, हमारा भी यही सवाल है कि ढेरों बंगाली हिंदुओं के नाम लिस्ट में नहीं हैं, वे भाजपा के समर्थक हैं, फिर भी हम चाहते हैं कि उनका नाम लिस्ट में आए, लेकिन हम धर्म को राजनीतिक मुद्दा नहीं बना रहे हैं।’

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