कश्मीर राज्य

क्या अमेरिका अफ़ग़ानिस्तान से निकलने की क़ीमत ‘कश्मीर’ पाकिस्तान को देकर चुकाना चाहता है : रिपोर्ट

कश्मीर को लेकर तरह तरह की ख़बरें मीडिया और सोशल मीडिया में आ रही हैं, वहां पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ़्ती समेत कई अन्य नेताओं को नज़र बंद कर दिया गया है, स्कूल/कालेज बंद करने का आदेश दिया गया है, इंटरनेट/मोबाइल सेवा बंद कर दी गयी है, श्रीनगर में धारा 144 लागू कर दी गयी है, 35 हज़ार अर्धसैनिक बालों को अतरिक्त तैनात किया गया है, तमाम अमरनाथ यात्रियों को घाटी से निकलने का आदेश दिया गया है, सभी पर्यटकों को बहार जाने का आदेश दिया गया है

लोग परेशान इस बात से हैं कि कश्मीर में हो क्या रहा है, केंद्र सरकार की तरफ से अभी तक कोई बयान नहीं आया है, हर तरफ ‘पैनिक’ है, कोई कहता है 370 और 35A को भारत सरकार ख़त्म करने जा रही है, कोई कहता है PoK पर कब्ज़ा हो कर रहेगा, खैर मीडिया और सोशल मीडिया पर ये चलता रहेगा जब तक सरकार साफ़ नहीं करती है कि ‘होने वाला’ क्या है?

कश्मीर में फिलहाल जो आग लगी है वो ‘ट्रम्प’ की लगायी हुई है, इमरान खान से मुलाकात के मौक़े पर ट्रम्प का बयान कि ‘मोदी ने उनसे कश्मीर समस्या के समाधान में मदद के लिए कहा था’, असल ‘जड़’ ये है, इसकी वजह से ‘कश्मीर’ में उथल पुथल जारी है

पुलवामा आतंकवादी हमले के बाद तीसरी जंग हिंदी ने ‘पुलवामा की पड़ताल’ की दस किश्त पब्लिश की थीं जिसमे समझाने की कोशिश की थी कि इस वक़्त दुनियां के तमाम बड़े देश युद्ध कर रहे हैं और यह युद्ध दूसरे देशों में लडे जा रहे हैं,

दुनियां इस समय दो क्लब में बंटी हुई है
1 – अमेरिका और उसके मित्र देश ( इस्राईल, UK, फ्रांस, स्पेन, सऊदी अरब, UAE, भारत आदि)
2 – रूस और उसके सहियोगी देश ( चीन, तुर्की, ईरान, सीरिया, यमन, क़तर, सऊदी अरब, वैनाजुला आदि)

सीरिया, इराक, यमन में अमेरिका या उसके सहियोगी युद्ध हार चुके हैं, अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिका और उसके सारे मित्र देश युद्ध हार चुके हैं

कश्मीर में हलचल क्यों बढ़ी है
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पुलवामा आतंकवादी हमले से शुरू करते हैं, यह हमला 14 फरवरी को हुआ था जिसके बाद 27 फरवरी को भारत ने पाकिस्तान के ‘बालाकोट’ पर हवाई कार्यवाही की थी, जवाब में अगले दिन पाकिस्तान ने कार्यवाही की जिसमे भारत के सैनिक ‘अभिनन्दन’ को पाकिस्तान ने पकड़ लिया था, भारत का विमान भी नष्ट हुआ था, तब अमेरिका ने ‘सुलह’ करवा कर अभिनन्दन को रिहा करवा दिया था, और भारत में हुए चुनावों में भारतीय जनता पार्टी पूर्ण बहुमत के साथ दुबारा सत्ता में आ गयी,

पुलवामा आतंकवादी हमले की जांच रिपोर्ट अभी तक नहीं आयी है, जबकि उस समय हमारे टीवी चैनलों ने हमले के तमाम ज़िम्मेद्दारों  की लम्बी लिस्ट जारी कर दी थी, युद्ध का रिहर्सल टीवी स्टूडियो में हो रहा था, सेना के पूर्व अधिकारी चिल्ला चिल्ला कर बता रहे थे ‘ये कोई रंडी ख़ाना है’, पाकिस्तान का नामो निशान मिटाने पर तुले टीवी चैनलों के एंकर सेना की वर्दी पहन कर लाइव शो कर रहे थे

सरकार को पुलवामा हमले के बारे में कम से कम देश को अब तो बताना चाहिए, कि हमला किया किसने था!

रूस और अमेरिका दुनियां की बड़ी ताक़त हैं, कोई भी देश कुछ भी कहे मगर जो ये दो देश चाहते हैं दुनियां को वही करना पड़ता है, अमेरिका इस समय अफ़ग़निस्तान से ‘भागने’ के रास्ते तलाश रहा है, पाकिस्तान जोकि कुछ हद तक अलग थलग हो गया था एक बार फिर से उसकी अहमियत बढ़ गयी है, अफ़ग़ानिस्तान में अमरीका तालिबान के सामने बेबस है,

कश्मीर में क्या होने वाला है को सीधे अफ़ग़ानिस्तान शांति वार्ता के साथ रख कर देखें तो बहुत कुछ साफ़ हो जायेगा, ट्रम्प को पाकिस्तान की मदद चाहिए, ट्रम्प कहते हैं ‘कश्मीर में बम्ब फूट रहे हैं’, वो कश्मीर समस्या के समाधान में मदद करना चाहते हैं, आखिर ऐसा क्या हुआ है जो ट्रम्प ‘कश्मीर’ की बात कर रहे हैं, इस का जवाब है ट्रम्प डबल गेम खेल ‘गये’, एक तरफ उन्होंने पाकिस्तान को तालिबान से बात कर ‘सॉफ्ट’ करने को कहा है वहीँ कश्मीर की बात कर के ‘भारत’ के हाथ-पांव फुला दिए हैं

ट्रम्प की चाल क़ामयाब रही है, भारत के अंदर कश्मीर को लेकर जो ‘चकल्लस’ जारी है वो CIA/मोसाद के ज़रिये पैदा की गयी ‘अफ़वाहें’ हैं, सूत्रों के मुताबिक इस्राईल के ज़रिये अमेरिका ने भारत को जानकारी भिजवाई है कि ‘सरहद पार’ से कश्मीर में बड़ी घुसपैठ हो सकती है, यह जानकारी ‘गुप्त’ रखी गयी है, जब भारत कश्मीर में सुरक्षा के इंतिज़ाम करेगा तो पाकिस्तान को खतरा दिखा कर अमेरिका अफ़ग़ानिस्तान में अपना काम करवाने में कामयाब हो जायेगा,

अमेरिकी राष्ट्रपति से मुलाक़ात के बाद पाकिस्तान ने सरहद पर ‘एक्टिविटी’ बढ़ा दी हैं, भारत को बड़ा खतरा अफ़ग़ानिस्तान तालिबान से अमेरिका के समझौता हो जाने के बाद पैदा होने वाले हालात से है, भारत ने अफ़ग़ानिस्तान में ‘बहुत बड़ा’ ‘इन्वेस्टमेंट’ किया हुआ है, वो सब तहसनहस हो जायेगा, साथ ही तालिबान के लड़ाके ‘कश्मीर’ की तरफ भी अपना रुख कर सकते हैं

रूस, चीन, तुर्की, ईरान ख़ामोशी से तमाशा देख रहे हैं, सूत्रों के मुताबिक चीन ने कुछ ‘इनपुट’/जानकारियां रूस को उपलब्ध करवाई हैं, वो जानकारी रूस ने भारत को दी हैं, इन जानकारियों के मुताबिक अमेरिका अफ़ग़ानिस्तान से निकलने की क़ीमत ‘कश्मीर’ पाकिस्तान को देकर चुकाना चाहता है

सऊदी अरब की यहाँ बड़ी भूमिका है, वैसे तो अमेरिका सऊदी अरब का दोस्त है लेकिन अंदरख़ाने अरब में अमेरिका का सबसे बड़ा दुश्मन ‘सऊदी अरब’ है, पाकिस्तान ‘नुक्लेअर’ शक्ति है, सऊदी अरब को नुक्लेअर पॉवर’ की ज़रूरत है, सऊदी अरब ने अमेरिका और पाकिस्तान के मध्य ‘विवादों’ को सुलझाया है, इमरान खान की अमेरिकी यात्रा बिन सलमान के कहने पर हुई थी, ट्रम्प की बेटी ‘इवांका’ के पति के ज़रिये इमरान ख़ान ने ट्रम्प से कश्मीर मामले को हैंडल किया , ट्रम्प कारोबारी व्यक्ति हैं वो ‘लेनदेन’ अच्छी तरह से समझते हैं जैसे हम लोग ‘रिश्वत’ के लेनदेन को समझते हैं

कश्मीर में जो हो रहा है वो अफ़ग़ान शांति वार्ता का ‘असर’ है, 370 और 35A को लेकर अगर इस वक़्त भारत सरकार कोई क़दम उठती है तो वो ग़लत समय पर किया गया ‘कार्य’ होगा, भारत को संजीदगी के साथ समस्या का समाधान करना चाहिए, अमेरिका अपने मतलब के लिए किसी भी देश को दोस्त बना लेता है, चीन और रूस पहले ही पाकिस्तान के साथ हैं, ईरान के मसले पर भी पाकिस्तान ने बहुत साफ़ तरीके से अपना पक्ष रखा है, यहाँ भारत सरकार को यह देखना ज़रूरी है कि ‘पुलवामा’ से ‘सत्ता’ तक पहुँचने के बाद कहीं फिर ‘बालाकोट’ जैसी कोई ग़लती तो नहीं होने जा रही है.

BBC News اردو
@BBCUrdu
انڈیا کے زیر انتظام کشمیر میں نیشنل کانفرنس کے رہنما عمر عبداللہ، پیپلز ڈیموکریٹک پارٹی کی محبوبہ مفتی اور جموں کشمیر پیپلز کانفرنس کے صدر سجاد لون کو ان کے گھروں میں نظربند کر کے دفعہ 144 نافذ کر دی گئی ہے۔

Asif Ghafoor
@peaceforchange
Humanity is a common fundamental of all religions. Atrocities in IOJ&K and lynching of muslims should be seen in the same context. Human conscience should react against such inhuman treatment of humans.

Humans do posses conscience.

ANI
@ANI
Sushma Chauhan, Deputy Commissioner, Jammu: Mobile internet services have been suspended in Jammu.

ANI Digital
@ani_digital
Tharoor shows solidarity to Omar Abdullah over alleged house arrest, says ‘you’re not alone’

Shama Junejo
@ShamaJunejo
@narendramodi
is deliberately escalating the tension in the region that the world community forces to bring India on table to negotiate on Kashmir to counter internal pressure in India on BJP. Modi is eventually going for same solution, what Mush-Bajpayi agreed.
#KashmirBleeds

 

“काश्मीर में कुछ बड़ा होने जा रहा है”

Shamsher Ali Khan
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यह आज के तमाम समाचार पत्रों की प्रमुख हेडलाइन है।

क्या बड़ा होने की संभावना है ? यह ना तो वहाँ के राज्यपाल को पता है ना भारतीय संविधान में विश्वास करने वाली वहाँ की दोनों रीजनल पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्लाह को है। सेना के अधिकारी भी केवल सुरक्षा कारणों की बात कर रहे हैं।

अमरनाथ यात्रा के रास्ते के आसपास एक “स्नाईपर गन” पाई गयी जिससे डर कर पूरा काश्मीर खाली करा लिया गया, फिर सुनिए, पूरा काश्मीर । ₹25-25 हजार की एयर टिकट लेकर लोग वहाँ से भागे, शेष काश्मीरी एटीएम और पेट्रोल की लंबी लाइन में लगे रहे। इस अफरा तफरी की वजह? किसी को नहीं पता।

धारा 35-A हटाने और जम्मू लद्धाख और काश्मीर को तीन भागों में बाँटने की हवा उड़ी है। हवा उड़ाने वाले ना तो सच्चाई जानते हैं ना इसको करने की प्रक्रिया। बस वह कुछ बड़ा होने की उम्मीद में खुश हुए जा रहे हैं।

35-A हटाने पर उच्चतम न्यायालय सुनवाई कर रहा है और ऐसा वह पूर्व में चार बार सुनवाई कर चुका है और चारो बार 35-A ना हटाने के पक्ष में फैसला दे चुका है, अब पाँचवी बार फिर सुनवाई हो रही है तो सरकार फैसला आने तक कुछ नहीं कर सकती।

जम्मू काश्मीर को तीन भागों में बाँटने की चर्चा भी बेवकूफी ही है क्युँकि इसके लिए राज्य विधानसभा से प्रस्ताव पास कराकर केन्द्र को भेजना पहली प्रक्रिया है और जम्मू काश्मीर विधानसभा भंग है।

तो फिर बड़ा होगा क्या ? डाईनासोर का अंडा
दरअसल अगले 5 वर्ष ऐसे माहौल को देखने की आदत डाल लीजिए क्युँकि देश के गृहमंत्री अमित शाह हैं, और वह इस खेल के माहिर खिलाड़ी हैं। आपको दिखाएँगे कुछ और इसी दिखाने में कुछ छुपा देंगे।

जम्मू काश्मीर में केन्द्र सरकार को एक बात ध्यान रखना होगा कि तमाम अलगाववादी और आतंकवादी प्रयासों के बावजूद वहाँ उनके साथ 2% काश्मीरी भी नहीं, काश्मीरियों का समर्थन भारत के संविधान को मानने वाले महबूबा मुफ्ती, फारूख और उमर अब्दुल्लाह जैसों के साथ है जो भारत की व्यवस्था में

भरोसा रखते हैं, संविधान और भारत के लोकतंत्र पर भरोसा रख कर चुनाव लड़ते हैं जीतते हैं, संसद और विधानसभा में आते हैं। हिन्दू को पत्नी , बहनोई और दामाद बनाते हैं।

कुछ बड़ा करने के प्रयास में इनका विश्वास मत खो देना वर्ना देश के लिए काश्मीर को पुर्ण रूप से पाना और मुश्किल हो जाएगा। बाकी देश का ध्यान दूसरे मुद्दों से हटाने के लिए ऐसा खेल खेलते रहिए।

उम्मीद है गृहमंत्री अमितशाह “कुछ बड़ा” करने के चक्कर में इनको अलगाववादियों के पाले में नहीं ढकेलेंगे, काश्मीर और भारत के बीच की यही सबसे मज़बूत कड़ी हैं।

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