साहित्य

घर की संसद में पत्नी सत्ता है…पति विपक्ष है, हक्का-बक्का है!

Vibhuti Mishra
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घर की संसद में पत्नी सत्ता है
पति विपक्ष है, हक्का-बक्का है
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घर की संसद में
विपक्ष कमज़ोर है
निर्दल बच्चों का
बहुत ज़ोर है

सत्ता बहुत बली है
वही पेश करती बिल
उसी की चली है

विपक्ष सत्ता से बहुत प्यार करता है
जब-तब पास बुलाता है
वो प्रश्नकाल लाती है
ख़ुद वॉक आउट कर जाती है

कई सवाल अनुत्तरित हैं
ज़रूरी कार्यवाही स्थगित है

सता स्वयं इस्स ! पीकर है
विपक्ष का काम हस्ताक्षर है

सब सत्ता की सुनते हैं
विपक्ष को ही धुनते हैं

एक बार का ही चुनाव है
सदैव, सता को पुलाव है
विपक्ष डरा, सहमा है
सत्ता का ही कानून, उसी का महकमा है

ग्रोथ रेट या पड़ोसी के मुकाबले रुपये जब कम होते हैं
सत्ता की ओर से विपक्ष को ज़ोरदार नारे मिलते हैं
कुछ करो या मरो
निकम्मों तुम घर छोड़ो

विपक्ष कहता है, मेरा घर महान
उठ जवान, जय भाग्यवान

प्रायः बिन विपक्ष संसद चलती रहती है
सत्ता घरहित में गरजती, रोती रहती है

सता ही ऊपरी-निचली अदालतें और सुप्रीम कोर्ट
दिखता है इनको विपक्ष में खोट ही खोट

चुनाव में सत्ता ने कहा था
तुम मुझे चुन लो, मैं तुम्हें हसीन वादी दूंगी
अब मानो कहती है
तुम मुझे ख़ून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगी

विपक्ष रक्तदान कर रहा है
संसार महादान कह रहा है

दुखी विपक्ष जनता से मिला है, अनशन पर तुला है
सत्ता क्रोधित है, भौं तनी है, विपक्ष पर गाल फुला है
सत्ता कभी टस से मस नहीं हुई, ना ही हृदय पिघला है
प्रायः इन प्रयासों पर विपक्ष को गरल ही मिला है

विपक्ष कुल मिला कर राष्ट्रपति है
हां हां है
ससम्मान, राजनीति इति है

दया याचिका भी सत्ता ही रखती है
जो भी करती है, घरहित में करती है
-विभूति

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