देश

जिस विधायक ने गुरुग्राम की #मस्जिद में ताला लगवाया उसकी बेटी ने जो किया पूरा देश देख रहा है : देश की कई अहम् ख़बरें पढ़िये!


एक और आसिफ़ा
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झारखंड के जमशेदपुर से दिल दहला देने वाली खबर,
तीन साल की मुस्लिम बच्ची रफिदा खातून को टाटा नगर रेलवे स्टेशन से रिंकू साहू और कैलाश कुमार नाम के लोगों ने अगवा कर उसका रेप किया और फिर उसकी हत्या कर दी।
हैरानी की बात ये है कि आरोपी रिंकू की मां हवलदार और कैलाश के पिता CPRF के जवान है। पीड़ित मरहूमा बच्ची के माता पिता पश्चिम बंगाल के रहने वाले हैं।


Shamsher Ali Khan
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कुदरत का इंसाफ़ तो देखिए
जिस विधायक ने गुरुग्राम के #मस्जिद में ताला लगवाया
उसकी बेटी को नंगे जिस्म में
पूरा हिंदुस्तान देख रहा है

Chandrashekhar Pathariya
#गुडगाँव #भाजपा #नेत्री पल्लवी

अबे #BJP #RSS के लोगो अब बस करो यार…सभी देशवासियों को और सभी हिन्दुओं को पता चल गया है की तुम हिंदू सभ्यता और ब्राह्मणों की संस्कृति को बचा रहे हो और इसी तरीके से चलते रहे तो एक दिन जरूर बचा लोगे.
#राष्ट्रीय_सैक्स_संघ_RSS

 

NDTVKhabar.com
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ऑनलाइन फूड वेबसाइट जोमेटो (ZOMATO) पर एक व्यक्ति ने खाना ऑर्डर किया और जब उन्हें मैसेज के जरिए पता चला कि एक मुस्लिम डिलीवरी बॉय उनका खाना लेकर आ रहा है तो उन्होंने सावन होने का हवाला देते हुए जोमेटो से डिलीवरी बॉय बदलने को कहा. जोमेटो ने इससे इनकार कर दिया और ऑर्डर कैंसिल कर दिया. जोमेटो ने शख्स को ट्विटर पर करारा जवाब भी दिया है. जोमेटो ने लिखा, ‘खाने का कोई धर्म नहीं होता, खाना ही धर्म है. ‘

पक्ष-विपक्ष: क्या धर्म हुआ समाज पर हावी?

ऑनलाइन फूड वेबसाइट जोमेटो (ZOMATO) पर एक व्यक्ति ने खाना ऑर्डर किया और जब उन्हें मैसेज के जरिए पता चला कि एक मुस्लिम डिलीवरी बॉय उनका खाना लेकर आ रहा है तो उन्होंने सावन होने का हवाला देते हुए जोमेटो से डिलीवरी बॉय बदलने को कहा. जोमेटो ने इससे इनकार कर दिया और ऑर्डर कैंसिल कर दिया. जोमेटो ने शख्स को ट्विटर पर करारा जवाब भी दिया है. जोमेटो ने लिखा, 'खाने का कोई धर्म नहीं होता, खाना ही धर्म है. '

Posted by NDTVKhabar.com on Wednesday, July 31, 2019

Sikander Kaymkhani
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तीन तलाक बिल: इस दिन विपक्ष के ये 20 सांसद सदन से गायब रहे, जानना नहीं चाहेंगे क्यों?

विपक्ष के कड़े विरोध के बावजूद केंद्र सरकार ने मंगलवार को तीन तलाक विधेयक राज्यसभा से पारित करा लिया। लोकसभा में पहले ही यह बिल पारित हो चुका है अब राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बन जाएगा। इसके बाद एक साथ तीन तलाक देना कानूनन अपराध होगा। तीन तलाक विधेयक पर राज्यसभा में वोटिंग के दौरान कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के पांच-पांच सांसदों सहित विपक्ष के करीब 20 सांसद नदारत रहे। यह जानकारी सूत्रों ने दी।

कांग्रेस के राज्यसभा सदस्यों को अब पार्टी को कारण बताना पड़ेगा क्योंकि विधेयक पर वोटिंग के दौरान सभी सांसदों की सदन में मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस ने व्हिप जारी किया था। सत्तारूढ़ दल ने मुस्लि’म महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक को राज्यसभा में 84 के मुकाबले 99 वोट से पारित करा लिया। सूत्रों ने बताया कि विपक्ष के सदस्य अगर सदन में मौजूद होते तो यह विधेयक को प्रवर समिति के पास भिजवा सकता था।

बता दें कांग्रेस के जो पांच सदस्य गैर हाजिर रहे उनमें विवेक तनखा, प्रताप सिंह बाजवा, मुकुट मिथी और रंजीब बिस्वाल के अलावा संजय सिंह भी हैं। संजय सिंह ने इससे पहले आज ही कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। कांग्रेस और सपा सदस्यों के अलावा राकांपा के वरिष्ठ नेता शरद पवार और प्रफुल्ल पटेल भी सदन में अनुपस्थित रहे। इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक, आईयूएमएल और केरल कांग्रेस के एक एक सदस्य भी वोटिंग के दौरान गैर हाजिर रहे।

वोटिंग के दौरान के टी एस तुलसी भी अनुपस्थित थे जो नामित सदस्य हैं लेकिन वह विधेयक का विरोध करते रहे थे। विपक्षी दल के सदस्यों की गैर हाजिरी के अलावा अन्नाद्रमुक बसपा और टीआरएस के सदस्य भी सदन में नहीं थे जिससे सरकार ने ऊपरी सदन में इस विधेयक को पारित करा लिया। गौरतलब है कि सत्तारूढ़ दल के पास ऊपरी सदन में बहुमत नहीं है।

Tanveer Fatima
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1) Article 371A – Rest of Indians can’t buy property or settle down in Nagaland. Even to enter this state rest of Indians need an inner line of permit.
2) Article 371B- In certain districts of Assam like Karbi Anglong, rest of Indians can’t buy land.
3) Article 371C- Rest of Indians can not buy property or settle in Manipur.
4) Article 371F- Rest of Indians can not buy property or settle in Sikkim.
5) Article 371G- Rest of Indians can not buy property or settle in Mizoram.
6) Article 371H- Rest of Indians can not buy property or settle down in Arunachal Pradesh. Even to enter this state rest of Indians need an inner line of permit.

Here are some other facts:
– 90% of the central government assistance given to states of north-east India is treated as grant and remaining 10% is considered as loan. For rest of India states including Kashmir it is 30% grant and 70% loan.
– People in Sikkim don’t pay income tax like rest if Indians.
– People from rest of India can’t buy land in many parts of Himachal Pradesh and Uttarakhand.
– Non-islander Indians need a permit to visit many islands in Andamans and Lakshwadeep.
– Imagine the security and social implications and unrest if all of these articles – Article 370 as well as Articles 371A to H are abrogated .

Mohd Zahid ???
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“शाहबानो” का नाम सबने सुना होगा , मुसलमान इसी नाम के कारण पिछले 35 साल से इस देश में गाली खा रहे हैं। और संघ गिरोह को इस नाम से बेहद हमदर्दी है।

आपने कभी “गरिमा सिंह” का नाम सुना है ? नहीं सुना होगा क्युँकि उनके नाम से मुसलमानों को गाली देने की कोई संभावना नहीं थी। तो आईए सुनाते हैं “गरिमा सिंह” की कहानी।

गरिमा सिंह “अमेठी राजघराने” की बहू और राजा संजय सिंह की पत्नी थीं या हैं , यह कनफर्म नहीं। राजा संजय सिंह ने जब अमिता मोदी से शादी की तो अपनी इस पत्नी और चार बच्चों को हवेली से निकाल दिया।

यह पूरा परिवार सड़क पर आ गया , शाहबानो तो 60 साल की औरत थी जिनके शादी शुदा बच्चे उनकी देखभाल कर रहे थे परन्तु गरिमा सिंह 4 छोटे छोटे बच्चों को लेकर 40 साल की उम्र में सड़क पर आ गयीं और अपना हक माँगने के लिए पिछले 24 साल से अदालत में लड़ाई लड़ रही हैं।

उनके बच्चे हवेली मे घुसने के लिए अदालत के चक्कर लगा रहे हैं और यहाँ तक कि अपनी बेटी की शादी में यही संजय सिंह शामिल तक नहीं होते , कन्यादान तक नहीं करते।

पिता से सभी बच्चे नफरत करते हैं और पिता अपनी कन्यादान की गयी कन्या के साथ विवाह करके मस्त है। गरिमा सिंह के अनुसार वह अभी भी संजय सिंह की पत्नी हैं और अमिता सिंह तो पत्नी हैं ही।

इसके बावजूद कि हिन्दू ऐक्ट में दो पत्नियाँ की इजाज़त नहीं , संजय सिंह की खुलेआम दो पत्नियाँ हैं पर एक को कोई हक नहीं और उनके बच्चों को कोई हक नहीं।

एक शाहबानो यह भी हैं , दो आँसू इन पर भी गिरे

Shamsher Ali Khan
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आज वक़्फ़ बोर्ड की 75% सम्पत्ति पर नाजायज क़ब्ज़ा है। ऐसे नाजाइज़ कब्जेदार को कभी भी हटाया जा सकता है।
1975 में पुरातत्व विभाग ने 174 सम्पतियों को अपने कब्ज़े में ले लिया जिनमें 90 प्रतिशत पर विवाद चल रहा है।
1955 में DDA बनने के बाद दिल्ली की 75 प्रतिशत बची हुई वक़्फ़ भूमि को हाउसिंग एजेंसी को दे दिया गया जब कि DD Act के सेक्शन 55 D में साफ तौर पर उल्लेख किया गया है कि किसी भी धार्मिक संपति , कब्रिस्तान, मस्जिद ,दरगाह , मंदिर आदि को अधिग्रहित नहीं किया जा सकता ।
दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड के एक ज़िम्मेदार अधिकारी के अनुसार 600 से अधिक मुग़ल कालीन वक़्फ़ सम्पतियों को आज भी दिल्ली में खोजा जाना बाकी है।एक RTI के जवाब में दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड ने बताया 114 वक़्फ़ संपत्तियां DDA के कब्जे में हैं , 156 वक़्फ़ सम्पतियों पर पुरातत्व विभाग का कब्ज़ा है जबकि 388 वक़्फ़ सम्पतियों पर अन्य सरकारी महकमों और एजेंसियों का कब्ज़ा है । इन से मुत्तालिक बहुत से मुक़दमे वक़्फ़ ट्रिब्यूनल व दीवानी अदालतों में विचाराधीन हैं।
अगर कोई ऐक्शन नही लिया गया ये क़ब्ज़ा ऐसे ही चलता रहा तो एक दिन वक़्फ़ की सारी संपत्ति पर नाज़ायज़ क़ब्ज़ा हो जाएगा…


Journalist Jafri
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उन्नाव रेप पीड़िता के परिवार ने एक साल में 35 बार पुलिस से की थी शिकायत, एसपी ने कहा नहीं नजर आया उनमें दम

जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही हादसे में घायल उन्नाव रेप पीड़िता को लेकर पूरे देश में रोष है। हर तरफ पीड़िता और उसके परिवार को न्याय दिलाने की मांग है। ये मांगें शायद पहले ही पूरी हो जातीं अगर समय रहते स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने पीड़िता के परिवार की शिकायतों पर ध्यान दिया होता। उन्नाव गैंगरेप पीड़िता के परिवार ने पिछले एक साल में 35 बार स्थानीय पुलिस और प्रशासन को लिखित रूप से विधायक और उनके आदमियों से खतरा होने के डर के बार में बताया था। पीड़िता के एक रिश्तेदार के मुताबिक, परिवार ने आशंका जताई थी कि गैंगरेप में आरोपी बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर उनको निशाना बना सकते हैं। उन्होंने पुलिस और प्रशासन से लिखित शिकायत की लेकिन उनकी ओर से सालभर में कोई कार्रवाई नहीं हुई।

रेप पीड़िता के रिश्तेदार के मुताबिक पिछले साल सीबीआई द्धारा मामले की जांच शुरू होने के बाद से ही परिवार डर के साए में जी रहा है। उन्हें जान से मारे जाने की धमकी मिली। डर इतना ज्यादा था कि उन्होंने उन्नाव जिले के माखी स्थित अपने घर को भी छोड़ दिया। उधर, उन्नाव के एसपी एमपी वर्मा ने स्वीकारा कि पुलिस को 33 शिकायतें मिली थीं लेकिन उन्में कोई दम नजर नहीं आया इसलिए उन पर ध्यान नहीं दिया गया।

लखनऊ जोन के एडीजी राजीव कृष्ण का कहना है कि पिछले एक साल में भजी गई शिकायतों की दोबारा जांच होगी। अगर जिला पुलिस के किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आई, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्‍होंने कहा कि लखनऊ रेंज के आईजी एसके भगत को उन्‍नाव जिले भेजा गया था ताकि परिवार की सभी शिकायतों की फिर से जांच की जा सके।

वहीं पीड़िता के रिश्तेदार का कहना है कि सेंगर के आदमी सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में भी आते थे और धमकी देते थे। इसकी वीडियो पुलिस को दिखायी गई थी लेकिन माखी के एसएचओ ने मामला दर्ज नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को भी पत्र लिखकर मामले से अवगत कराया गया था मगर इसके बाद भी कार्रवाई नहीं हुई।

गैंगरेप पीड़िता के एक्सीडेंट से कुछ दिन पहले ही उसके परिवार वालों ने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई को पत्र लिखकर आरोपियों की धमकी और उनसे होने वाले खतरों से अवगत कराया था। यह पत्र 12 जुलाई को लिखा गया था। इस पत्र को इलाहाबाद उच्च न्यायालय और उत्तर प्रदेश सरकार के अन्य प्राधिकारियों को भेजा गया है। पत्र के अनुसार 7 जुलाई को बलात्कार मामले में एक आरोपी के बेटे नवीन सिंह, विधायक की करीबी शशि सिंह, अन्य आरोपी मनोज सिंह और कन्नू मिश्रा उनके घर आए थे और उन्हें धमकी दी थी। इसके अगले दिन एक अन्य व्यक्ति भी उनके घर आया था। पीड़ित और उसके परिवार ने कहा कि पत्र के साथ उस कार का विडियो भी संलग्न किया गया था, जिसमें ये लोग उनके घर आए थे। पत्र में उन्हें धमकी देने वाले व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया। पत्र पर पीड़ित, पीड़िता की मां और चाची के हस्ताक्षर हैं।

Shamsher Ali Khan
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मेरे सपनो का भारत
वो मस्जिद का पैरोकार था, उसके जनाज़े में मंदिर वाले आंसू बहा रहे थे

होनी को कौन टाल सकता है, ये बात कभी अम्मी से सुनी तो कभी किसी बुजुर्ग से। इस होनी को आज यही मंजूर था कि हाशिम अंसारी इस दुनिया में नहीं रहे। बाबरी मस्जिद के सबसे पहले मुद्दई। 60 साल तक थका देने वाली कानूनी लड़ाई लड़ने वाले। राजनीतिक रोटियां सेंकने वालों से चिढ़ने वाले।

हाशिम अंसारी

हाशिम अंसारी सारी ज़िंदगी बाबरी के हक के लिए लड़े
हाशिम अंसारी जो सारी ज़िंदगी अयोध्या में बाबरी के हक के लिए लड़े, उनका जनाज़ा उठा तो उसमें साधुओं ने भी शिरकत की। ये है हिंदुस्तानी तहजीब। हाशिम अयोध्या में मंदिर और मस्जिद दोनों ही देखना चाहते थे, मगर अपनी आंखों से इसे देखने की खुशनसीबी उनके हिस्से नहीं आई। काफी वक्त से बीमार थे, उम्र का भी तकाजा था। 96 साल की उम्र में ये बुजुर्ग मंदिर-मस्जिद की हसरत लिए इस दुनिया से कूच कर गया।

जब हाशिम का जनाजा उठा तो उसकी शान अलग ही थी। सर पर टोपी लगाए लोगों की भीड़ थी तो गेरुए पहनावे वाले भी कम नहीं थे। मुसलमानों के जनाजे में साधुओं को देखना एक दुर्लभ मौका है। मैंने अब से पहले नहीं देखा था। ये सिर्फ अवध की मिट्टी का असर नजर आता है।

दंगो को भड़काने वालों को सबक है ये। एक बुजुर्ग का जनाज़ा और उसमें साधु-संतों की मौजूदगी। आंखें नाम थीं। इसकी वजह यही थी कि हाशिम अंसारी ने कभी मंदिर-मस्जिद के झगड़े और निजी दोस्ती का कोई घालमेल नहीं किया। वो कानूनी लड़ाई लड़ते रहे। जब-जब उन्हें हिन्दुओं ने दावत पर बुलाया तो हमेशा शरीक रहे।

डिस्क्लेमर : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखकों के निजी विचार हैं. तमाम लेख/पोस्ट/समाचार सोशल मीडिया में वॉयरल हैं, इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति तीसरी जंग हिंदी उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार तीसरी जंग हिंदी के नहीं हैं, तथा तीसरी जंग हिंदी उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है

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