इतिहास

तारीख़े इस्लाम : हज़रत आदम अ.स से ख़ातेमुल अम्बिया तक का ज़माना : पार्ट 7

मुख्तलिफ अम्बिया व औसिया
हज़रते सुलेमान की वफात के बाद तमाम दरिन्दे चरिन्दे परिन्दे देवज़ादे और जिन्नात वगैरा सब के सब आज़ाद हो गये थे। और सुलेमानी हुकूमत का दायरा इखतेयार सिमट कर सिर्फ इन्सानों पर हुक्म रानी तक महदुद रह गया था। ना वह दबदबए इख्तेदार था और न वह जाहो हशम। बहरहाल जो कुछ भी था उसके वारिस जनाबे सुलेमान के साहब ज़ादे जनाबे रहीम क़रार पाये और उऩ्होने 17 साल तक मस्नदे एख्तेदार पर रहकर कारे तब्लीग़ अन्जाम दिया। उनके बाद इनके साहब ज़ादे आफिया बिन रहीम बरसरे इक़तेदार आये और उन्होऩे 63 साल तक हुकूमत की इसके बाद इनके फ़रज़न्द असा बिन आफिया तख्ते हुकूमत पर मुतामुक्किन हुए उन्होने भी एक अरसए दराज़ तक तब्लीग़ी उमुर अन्जाम दिये।

इसी तरह बिला तरतीब यके बाद दीगरे सैकड़ो बरस तक हज़रते सुलेमान की नस्ल में हुकूमत चलती रही। फिर एक दो दौर ऐसे भी आये आबाओं अज़दाद के पुराने मसलक की तरफ पलटने लगे। तो इनके रोक थाम के लिए खुदा ने दो पैग़म्बरो को बयक वक्त उन्की हिदायत के लिए मअमूर किया। जिन्हे तारिख हज़रते हीकूक़ और हज़रते शैया के नाम से जानती है।

मगर इनके हालात वाक्यात से बे बहरा है। हज़रते शेबा के बाद खुदा ने बनी इस्राइल पर ह़ज़रते अरमिया को मामूर फरमाया जिन्का सिलसिलए नसब हज़रते हारुन बिन इमरान पर तमाम होता है। जनाबे आरमिया की इसलाही कोशिशों और तब्लीग़ी उमूर मे जैसे जैसे शिद्दत पैदा होती गयी वैसे वैसे उन्की क़ौम की सरकशी और जिद में इज़ाफा होता गया। यहां तक कि यह लोग एलानिया तौर पर बुत परस्ती पर आमादा हो गये। और किसी सुरत से राहे रास्त पर आने को तैयार न हुए तो परवरदिगार ने हज़रते आरमिया के ज़रिये इन्हे सख्त वारनिंग दी और फरमाया कि अगर तुम लोग राहे रास्त पर न आओगे तो हम ऐसे ज़ालिम व जाबिर को तुम पर मुसल्लत कर देंगे जो ज़नाज़ादा होगा। जिसकी परवरिश ग़लीज़ और बदतरीन ग़िज़ा की मरहुने मिन्नत होगी। और जो तुम्हारे मर्दों को क़त्ल तुम्हारी औरतों को असीर करेगा।

इसके बाद ख़ल्लाक़े आलम ने हज़रते अरमिया की ख़्वाहिश पर उन्हे उस बादशाह की ख़ुसुसी अलामतें और निशानियां बता दी.। नीज़ यह भी ज़ाहिर कर दिया था कि इसका नाम बखते नस्र होगा। वह तुम्हारे ही ज़माने में तुम्हारी ही क़ौम (बनी इस्राईल) पर खुरुज करेगा।

बखते नस्र के वाक़ेयात
मुताज़क्केरा बाला ख़बर के बाद हज़रते आरमिया को यह फिक्र लाहक़ हुई कि खुदा की बतायी हुई आलामतों और निशानियों की रोशनी में बख़ते नस्र को तलाश करना चाहिए। चुनान्चे आप उसकी जुस्तजु में निकल खड़े हुए और मुख़तलिफ मुक़ामात का सफर तय करते हुए बाबुल पहुंचे। वहां एक गाँव से गुज़र रहे थे तो आपने देखा कि चार पांच बरस का एक बच्चा मुख्तलिफ बीमारियों में मुब्तेला है इन्तेहाई हक़ीर हालत से एक मज़बिले (घूरे) पर पड़ा है और उसके ही क़रीब एक औरत बैठी हुई है जो कुत्तिया का दुध निकाल रही है। यह मन्ज़र देख कर आप ठहर गये। जब वह कुत्तिया का दुध निकाल चुकी तो इस औरत ने इस दुध में रोटीयों के चन्द टुकड़े भिगोये और उस लड़के को खिलाकर वहां से चली गयी। जब वह तन्हा रह गया तो हज़रते आरमिया उसके क़रिब गये ताकि उसका कुछ हाल मालूम करें चुनान्चे सबसे पहले आपने उसका नाम पुछा इसने कहां मेरा नाम बखते नस्र है लेकिन बद बख्ती का शिकार हुँ आप ने फरमाया इस हाल में क्यों पड़ा है। उसने कहा ज़िना ज़ादा हुँ लिहाज़ा इस जुर्म की सज़ा में यहा के लोगों ने मुधे इस मज़बले पर ड़ाल रखा है। सिर्फ कुत्तिया का दुध मेरी परवरिश का ज़रिया है.।

इतना सुन लेने के बाद जनाबे अरमिया को मज़ीद कुछ पुछने की हाजत न रह गयी। आप समझ गये कि यह वही लड़का है जिसकी अलामतें व निशानियां खुदा ने ज़ाहिर की थी। यह एक दिन बनी इस्राईल पर ग़लबा हासिल करेगा। इन पर अज़ाब बनकर मुसल्लत होगा। चुनान्चे उसकी तरफ से आपने आपनी पुरी तवज्जो मबजूल कर दी। उसी गांव में आप ठहर गये उसका इलाज कराया और उसकी खुर्दोनोश पर ध्यान दिया। यहां तक वह अच्छा भला न्दुरुस्थ हो गया। आप पांच बरस तक वहां मुक़ीम रहे और उसकी तालीम व तरबियत पर तवज्जो देते रहे।

जब वह तकरीबन ग्यारह बारह साल का हो गया तो आपने उससे अपना तअर्रुफ कराया और कहा मैं बनी इस्राईल का पैग़म्बर अरमिया हूँ। खुदा ने तुम्हारे मुताअल्लिक़ ख़बर दी है कि वह अन्क़रीब तुम्हे मिरी क़ौम पर मुसल्लत करे और तुम बादशाह होगे। मगर जब तुम्हें ग़लबा हासिल हो जाये तो मुझे भूल न जाना। इसने कहा कि भला यह क्यों कर मुमकिन है कि मैं अपने मोहसिन को भुल जाऊँ। आपने फ़रमाया कि अब मैं अपने वतन जाना चाहता हुँ। लिहाज़ा मेरी ख्वाहिश है कि तुम मुझे एक अमान नामा लिख दो ताकि वक़्त पर काम आये। ग़र्ज़ कि इसने एक आमान नामा लिख दिया जिसे लेकर आप वहां से वापस चले गये।

बख्ते नस्र जब जवान हुआ और उसने बनी इस्राईल के मज़ालिम की दास्ताने सुनी तो इसकी की तरफ से इसके दिल में नफ़रतैं पैदा हो गयी इसने इनके खिलाफ लोगों को उभारना शुरु किया। मशीयते इलाही भी यही थी। लिहाज़ा लोगों ने उसका साथ दिया यहां तक कि एक कसीर जमीयत इसके साथ हो गयी। जिसे मुनज़्ज़ करके उसने पहले अपने ही शहर बाबुल पर चढाई कर दी। और जब बाबिल पर मुक्कमल तसल्लुत हासिल हो गया और उसकी बादशाहत मुस्तहकम हो गयी तो उसने अपनी कूवत व ताक़त में खातिरे ख्वाह इज़ाफा करके बनी इस्राइल के दारुस सलतनत बेतुल मुक़द्दस पर हमला कर दिया। हज़रते अरमिया अ 0 भी उस वक़्त मौजूद थे जब आप को बकते नस्र के हमले का हाल मालूम हुआ तो उसके तहरीरकर्दा आमान नामा को लेकर उसके पास गये आपको देखते ही उसने फौरन पहचान लिया और बड़ी तकरीमों ताज़ीम के साथ पेश आया। इसने आपके तहफ़फुज़ का माकूल इन्तेज़ाम किया।

बनी इस्राइल ने पहले ही रेले मे सिपर ड़ाल दी थी। इसलिए बखते नस्र ने इन पर क़ाबू पाते ही उनके क़त्ले आप का हुक्म दे दिया। जिसके नतीजे में बैतुल मुक़द्दस की सर ज़मीन इन्सानों के खून से सुर्ख हो गयी। अल्लामा मजलिसी अ 0 र 0 ने साआलबी के हवाले से तहरीर फ़रमाया है कि बेशुमार क़त्लेआम के बाद जब लोग गिरफ़तार हुए तो उनमें से बच्चों की तादाद 70 हज़ार थी। तबरी का कहना है कि कैदियों में हज़रते अज़ीज़ और हज़रते दानियाल भी शामिल थे जो उस वक़्त बैतुल मुक़द्दस में तबलीग़ी उमुर अंजाम दे रहे थे , दीगर तारीखी शबाहिद से पता चलता है कि दो तिहाई आबादी शहर की ख़त्म हो चुकी थी और बैतुल मुक़द्दस का सारा क़ीमती असास लूट कर उसे बिल्कुल तबाह और बरबाद कर दिया गया था.। हज़रते अरमिया अर्ज़े मुक़द्स की तबाही और बरबादी को देखकर और दिल ही दिल मे सोचा करते थे कि शायद अब यह सरज़मीन पहले की तरह आबाद न हो सके।

आपकी इस कैफियत को देक कर परवरदिगार आलम ने फरमाया कि ऐ अरमिया तुम रन्जीदा और मलूल न हो हम इस शहर को उसी तरह दुबारा फिर आबाद करेंगे। और तुम देखोगे कि तुम्हारे खुदा ने अपना वादा किस तरह पूरा किया।

हज़रते अरमिया अ 0 एक रात जब सोये तो परवरदिगारे आलम ने इन पर सौ बरस की नींद तारी कर के इन्हें जिब्रील के ज़रिये दुनिया की निगाहों से पोशीदा कर दिया। और शाह फ़ारस को इस अम्र पर मामूर कर दिया कि वह अस्सरे नौ बैतुल मुक़द्दस की ज़मीन को आबाद करे। ग़र्ज़ कि उसने अपनी तमाम कोशिशें सर्फ करके 72 साल में अर्ज़े मुक़द्दस को पहले की तरह फिर आबाद कर दिया। और नजब सौ बरस का वक्फा रूरा हो गया तो मशीयते ख़ुदी वन्दी ने हजडरते अरमाया को फिर बेदार किया आपने शछहर को जब उसी तरह आबाद व बा रौनक़ देखा तो बेहद ख़ुश हुए और सजदए शुक्र किया इसके बाद हज़रते अरमिया अ 0 काफी अरसे तक हयात रहे। बाज़ मुफस्सेरीन ने इस वाक़ये को हज़रते अज़ीज़ अ 0 की तरफ मन्सूब किया है। जो मेरी तहक़ीक़ के लिहाज़ से ग़लत है।

हज़रते दानियाल अ 0
हज़रते दानियाल हज़रते याकूब अ 0 की नस्ल से हज़रते अरमिया के हमअस्र थे। इमामे जाफ़रे सादिक़ का क़ौल हे कि बचपने में ही आप के वालदैन का साया सर से उठ गया था। आप यतीम हो गये थे। बनी इस्राइल की एक बूढ़ी औरत ने आपकी परवरिश की थी। हज़रते मूसा अ 0 की शरीयत पर अमल पैरा थे और बनी इस्राइल को खुदा परस्ती का दर्स दिया करते थे। खुदा ने आपको अक़लो खेरद फहमो इदराक के साथ पैगम्बरी से सरफराज़ किया था। बख्ते नस्र बादशाह आपको बैतुल मुकददस में कैद करके अपने वतन (बाबूल) ले गया और उसने आपको वहां ऐसे अन्धे कुएं में डाल दिया था जो पहले से ही उसकी पली हुई एक खुंखार शेरनी का मसकन था। यह मसलहते इलाही थी कि शेरनी ने आप को कोई गज़न्द नही पहुचाया बल्कि खिलाफे फितरत उसने आपको दूध पिला पिला कर इस वक्त तक आपको ज़िन्दा रखा जब तक की खुदा ने आप को निकालने का कोई सबील पैदा न की। हज़रते दानियाल को इस कुंए से निजात क्योकर मिली। इस ज़िम्न में कहा जाता है कि बख्ते नस्र ने एक दिन ख्वाब में देखा कि आसमान से फरिश्तों की जमाअत इस कुएं पर आती है। वहां नमाज़ पढती है और फिर वापस चली जाती है। ख्वाब से जब ये बेज़ार हुए तो उसके दिल में हज़रते दानियाल का हाल मालूम करने कि जूसत जू पैदा हुई चुनान्चे रात ग़ूज़री और जब सुबह को उसे यह मालूम हुआ कि आप ज़िन्दा है। शेरनी ने आप को कोई ज़र नही पहुचाया तो उसके दिल में आपकी तरफ से हैबत पैदा हो गई और उसने इज़्ज़त व एहतेराम के साथ उस कुएं से निकलवाया लेकिन फिर भी उन्हे आज़ाद नही किया बल्कि अपने खुसुसी हिरासत में रखा ताकि आवाम से हज़रते दानियाल का कोई राब्ता क़ायम न हो सके।

कुएं के बाद जो आपको कैदखाना मिला था। एक कुशादा मकान की शक्ल में था। इसके चारो तरफ फौज का पहरा रहता था। ताकि वहां पर किसी शख्स का ग़ूज़र न हो। ग़र्ज़ कि आप सात बरस तक इसी कैद खाने में मसरुफे इबादत रहे।

एक दिन बख्ते नस्र ने फिर ऐसा ही ख्वाब देखा जिससे वह परेशान व खौफज़दा हुआ। लेकिन जब सुबह हुई तो वह उस ख्वाब को भूल गया और इन्तेहाई ग़ौरव ख़ौज करने पर भी याद न आया तो उसने तमाम मुनज्जिमों और काहीनों को जमा किया और उनसे कहा कि मैंने बहूत ही ख़ौफनाक ख्वाब देखा है मगर भूल गया हूं। तुम लोग अपने इल्म के ज़रिये बताओ कि मैंने क्या देखा। ख्वाब की ताबीर क्या है। उन लोगो ने कहा ख्वाब पता हो तो हम लोग ताबीर बता सकते है.। लेकिन ख्वाब का बताना हमारे लिए मुमकिन नहीं है। बखते नस्र ने कहा कि मैं तीन दिन का मौका तुम लोगो को देता हूं इस दरमियान तुम खूब ग़ौर कर लो और न बता पाये तो सोच लो मैं तुंम लोगो को क़त्ल कर दुंगा। ग़र्ज़ जब यह खबर मशहूर हुई जहां हज़रते दानियाल कैद थे वहां के किसी पहरे दार ने यह वाकया आपको सूनाया तो आपने फरमाया कि तू बादशाह से जा कर यह कह दे कि यह खवाब बता देना काहिनो और नज़ूमियो के बस में नही है। अलबत्ता वह मुझसे रुजू करें तो मैं इसका ख्वाब और इसकी ताबीर दोनों बता सकता हूँ।

बखते नस्र को जब यह मालूम हूआ तो उसने फौरन हज़रते दानियाल को क़ैद खाने से तलब किया और उनसे कहा बताइये कि मैने ख्वाब में क्या देखा है और इसकी ताबीर क्या है। आपने फरमाया कि तुने ख्वाब में यह देखा है कि तुने ख्वाब में एक ऐसे बूत को देखा है जिसका पैर ज़मीन पर है और सर आसमान पर है। इसका सर सोने का है दरमियानी हिस्सा चांदी का है। ज़ानू ताबें के हैं. पिंडलिया लोहे की है और क़दम मिट्टी के हैं जब तू इसे ग़ौर से देख रहा था तो नागहा आसमान से किसी ने उसके सर पर एक पत्थर मारा जिससे उसका कद इतना छोटा हो गया कि उसके सारे अज़ाए जिसमानी एक दुसर में पैवस्त हो गये। फिर तुने यह देखा कि जो पत्थर उसके सर पर मारा गया था वह बड़ा होने लगा और रफता रफ़ता तमाम कायनात पर मुहीत हो गया।

बखते नस्र ने कहा बेशक मैने यही ख्वाब देखा था। अब आप यह बताइये कि इसकी ताबीर क्या है ? आपने फरमाया कि ऐ बादशाह उस बूत से मुराद उम्मते है जो तेरे बाद दरमियान व आखिर में होंगी तलायी हिस्सा जिस्म से मुराद मौजूदा उम्मत और , तेरी बादशाही का ज़माना है नुक़रयी हिस्सा जिस्म से मूराद तेरे बेटे की हुकूमत का ज़माना होगा ताम्बे से मुराद अहले रुम है। लोहे से मुराद फारस और अज़म के लोग है। जिस पत्थर ने इस बुत के क़द को छोटा किया था उससे मुराद वह दीन है जो आखिरी दौरे पैग़म्बरी में उस वक्त की उम्मत पर नाज़िल होगा और दुसरे दीनों को खत्म कर देगा। अरब की सरज़मीन पर खुदा उस पैग़म्बर को मबउस करेगा। जो तमाम नबियों में आखरी नबी होगा। जिसका दीन तमाम दुनिया मं फैलेगा। जिस तरह वह पत्थर पूरी कायनात पर मुहित हो गया। उसी तरह आखरी नबी का दीन भी पुरी कायनात पर छा जाऐगा। बखते नस्र यह सुनकर बहूत मुताअस्सिर हुआ और कहने लगा कि ऐ दानियाल मैं आपसे बहुत शर्मिन्दा हूँ मैंने आप पर जुल्म के सिलसिले को रवा रखा। आज से आप आज़ाद है जहां चाहें जा सकते है। आपने फरमाया तुनें मैरा वतन उजाड़ दिया है। अब कहां जाउ यही रहना चाहता हूँ। जैसे भी तुम रखो। बिला आखिर बखते नस्र ने आपको अपना मुशीर खास मुकर्रर किया और तमाम अराकीने हुकूमत को यह हिदायत जारी कर दी कि वह हज़रते दानियाल से मशवेरा किए बगैर कोई काम न करें।

हज़रते दानियाल इस मन्सबे शाही पर तीस साल तक फ़ायज़ रहे। यहां तक कि बखते नस्र को उसीके एक गुलाम ने क़त्ल कर दिया। उसके बाद बख्ते नस्र का बेटा महरुया या फलशताश तख्त नशीं हुआ। उसने सत्तरह साल बीस दिन तक हुकूमत की। उसी ज़माने में हज़रते दानियाल ने बाबूल के एक मकाम सुस में इन्तेकाल फ़रमाया और वहीं दफन हुए। इमामे सालवी का कहना है कि हज़रते उमर के दौर में जब सुस फतेह हुआ और अबू मुसा अशरी वहां के हाकिम हुए तो दारुल अमारा के एक मुक़फ्फल कमरे में इन्हे तवीलुल क़ामत एक मय्यत रखी हुई मिली जिसका मुंह खुला था और लाश ख़राब होने से महफूज़ थी। उसने मय्यत का हाल मालूम करने में बहुत कोशिश की मगर जब कुछ पता न चला तो उसने इस वकये की तफसील से हज़रते उमर को आगाह किया और दरियाफत किया कि इस मय्यत के मताअल्लिक हम क्या करें। जब दरबारे खिलाफत में भी यह मसला हल न हुआ तो अमीरल मोअमेनीन हज़रते अली इब्ने अबूतालिब की तरफ रुजु किया गाया। आपने फ़रमाया कि वह लाश हज़रते हज़रते दानियाल की है जो बख़ते नस्र के ज़माने में थे। फिर आपने ह़ज़रते दानियाल की है जो बखते नस्र के ज़माने में थे। फिर आपने हज़रते दानियाल के हालात बयान किये और उमर को यह मशविरा दिया कि अबू मुसा को लिख दिया जाये कि वह इस मय्यत पर नमाज़ पढ कर ऐसी जगह दफन कर दे जहाँ अहले सूस की रसाई न हो। चुनान्चे अबू मूसा अशरी ने नहर के पानी को रोक कर उसके दरमियानी हिस्से में मय्यत को दफन करके नहर का पानी फिर बदस्तूर जारी कर दिया। इसी वजह से बाज़ मोहर्रेखीन ने लिखा है कि हज़रते दानियाल नहरे सूस में दफन है।

हज़रते अज़ीज़ अ 0
हज़रते अज़ीज़ अ 0 जनाबे हारुन की नस्ल से थे और अपने भाई उरज़ा के साथ जुड़वां पैदा हुए थे। आपके वालिद का नाम शरहिया था साहेबे रोज़तुस्तुस्सफा का कहना है कि आप अपने बचपन से जवानी के ज़माने तक बखते नस्र की कैद में रहे और जब रिहाई मिली तो अपने वतन तशरीफ ले गये।

कैद से छुटने के बाद आप दीन की तब्लीग़ में मसरुफ रहे। यहां तक की जब आपकी उम्र 50 बरस की हुई तो आपको एक सफर में जाने का इत्तेफाक हुआ। चुनान्चे आप गदहे पर सवार होकर रवाना हुए। रास्ते में एक ऐसी उजड़ी हुई बस्ती मिली जिसकी पुरी आबादी ताउन की बीमारी मे मुब्तेला होकर ख़त्म हो चुकी थी और लातादाद इन्सानी ढ़ाचे जां बजां बिखरे हुए पड़े थे। नीज़ इस सानेहे को इतनी मुद्दत गुज़र चुकी थी की उनके मकानों की छत और दीवारें मुनहदिम होकर खन्डरात में तबदील हो गयी। एक अरसए तवील गुज़र जाने के बाद यह देखकर आप पर हैरत व इत्तेजाब का एक आलम तारी हुआ और दिल पर एक ऐसा सदमा ग़ुज़रा कि आपके जिस्म से रुह परवाज़ कर गयी।

सौ बरस तक आप वहां मुर्दा पड़े रहे। आखिरकार मशीयते एज़दी ने आपको फिर ज़िन्दा किया और आपके साथ वह तमाम लोग भी ज़िन्दा हो गये। जो आपसे क़ब्ल मर चुके थे। अल्लामा मजलिसी का कहना है कि उनकी तादाद एक लाख थी। इस वाक्ये के बाद आप मजीद पचास साल तक ज़िन्दा रहे। आपका तज़केरा कुरआने मजीद में मौजूद है। यहूदी आपको ख़ुदा का बेटा कहते है।

हज़रते यूसुफ बिन मता अ 0
आप हज़रते मूसा की शरीयत के पाबन्द थे और बनी इस्राइल पर तबलीग़ के लिए मअमूर हुए थे यह वाकया बहुत मशहूर है कि आप एक मरतबा कशती पर सवार दरियाये दज़ला में महवे सफर थे कि अचानक वह कशती उलट गयी और दरिया में गिर गये गिरते ही आपको एक बहूत बड़ी मछली ने निगल लिया। तीन या सात रात या चालीस रोज़ तक आप उस मछली के पेट में मसरुफे इबादत रहे। यहां तक कि खुदा के हुक्म से उस मछली न आपको फिर उगल कर अपने शिकम से बाहर निकाला। इसी वजह से आपको जुननून और साहेबे हौत भी कहा जाता है। आपने 147 साल की उम्र में वफात पायी।

हज़रते ज़करिया अ 0
आप हज़रते सुलेमान की नस्ल में युहन्नाबिन ऊन के बेटे थे। आप की तारीखे विलादत के बारे में किलाबे खामोश है।

आप की ज़ौजा इमरान बिन मतान की बेटी और मरयम मादरे ईसा की हकीकी बड़ी बहन थी। लेकिन इनके नाम में इखतेलाफ है। बाज़ मोअर्रेखीन ने इसाअ बाज़ ने हनाना और बाज़ ने उम्मे कुल्सुम तहरीर किया है लेकिन मेरे नज़दीक आखिउज़जिक्र ज्यादा मुस्तनद है।

आप चुंकि हज़रते सुलेमान की नस्ल से थे इसलिए बैतुल मुकददस के मुन्तज़िम व मुतावल्ली भी थे। जब आपकी उम्र 98 साल की हो गयी और आप नेअमते औलाद से महरुम रहे। तो आपको यह तशवीश पैदा हुई कि मेरे बाद मेरा वारिस और खुदा के घर का मुतवल्ली कौन होगा। चुनान्चे आपने बारगाहे इलाही में दुआ की जो कुबूल हुई और खुदा वन्दे आलम ने आपको यहिया जैसा बेटा अता किया जिसका तज़केरा क़ुरआने मजीद में इन अलफ़ाज़ के साथ मौजूद है।

जब जनाबे ज़करिया ने अपने परवरदिगार को धीमी आवाज़ से पुकारा और अर्ज़ कि ऐ मेरे पालने वाले में तेरी बारगाह में दुआ करके आज तक महरुम नही रहा हुं बुढापे की वजह से मेरी हडडियां कमज़ोर हो चुकी है. और सर के बाल सफेद हो चुके है। अपने मरने के बाद मैं अपने वारिसों की तरफ से फिक्रमंद हुँ वह दीन को बरबाद न कर दे। मेरी बीवी बांझ है। बस तू अपनी कुदरते कामेला से एक ऐसा फइज़ब्त अता फरमा जो मेरी और याक़ूब की मीरास का वारिस हो।

खुदा ने फरमाया हम तुमको एक फरज़न्द की वेलदत की खुशखबरी देते है। इनको एक नेक और सालेह बेटा अता फरमाया जिसका नाम यहिया होगा। और हमनें इससे पहले किसी को सका हमनाम नही पैदा किया ज़करिया ने कहा परवरदिगार लड़का क्योकर होगा मेरी बीवी बांझ है और मै हद से ज़्यादा बूढ़ा हुँ। इरशाद हुआ ऐसा ही होगा यह बात मेरे लिए बहुत आसान है। हज़रते यहिया की विलादत से क़ब्ल आपने हज़रते मरयम मादरे ईसा को भी अपनी औलाद की तरहं पाला था। चुनान्चे जब वह सिने बुलूग़ तक पहूचीं तो मसलहते इलाही ने उनके बदन मे बगैर किसी मर्द का साया पड़े हज़रते ईसा का हमल कर दिया। जब वह वाज़ह हुआ तो जाहिलों ने आप (ज़करिया) पर मरयम से नाजायज़ तअल्लुकात का इल्ज़ाम आयद किया और आपको घेरकर आपको क़त्ल करना चाहा।

चुनान्चे आप इस खौफ से भागे इसी असना में एक दरखत बहुकमे खुदा दरमियान से शिगाफता हुआ और आप इसी मे दाखिल हुए तो वह फिर अपनी असली हालत में आ गया। क़ज़ाये कार कि आपके दामन का एक कोना बाहर ही निकला रह गया। जिसकी वजह से मुखालेफीन समझ गये कि आप इसी दरखत में पौशीदा है। ग़र्ज़ कि उन लोगो ने दरखत को मय आपके आरे से चीर दिया जिसके नतीजे मे आप शहीद हो गये। इस वक्त आपकी उम्र सौ साल की थी और हज़रते ईसा पैदा हो चुके थे।

हज़रते यहिया बिन ज़करिया अ 0
हज़रते यहिया अ 0 हज़रते ईसा इब्ने मरियम से छह माह कल्ब पैदा हुए चार साल की उम्र मे आपने तौरेत हिफ़ज़ की , दस साल की उम्र में तमाम अहकाम से वाक़िफ होकर मन्सबे नबूवत पर फ़ाएज़ हुए। और बनी इस्राइल के दरमियान बाक़ायदा तबलीग़ की तरफ मुतावज्जा हो गये।

ज़ोहद तक़वा और परहेज़गारी आपका तुर्ररए इमतेयाज़ था लेकिन इसके साथ खौफे खुदा भी आपके दिल मे इस क़द्र था कि तमाम उम्र आपको किसी ने हंसते नही देखा ख़ुश्क रोटी खाते टाट के कपड़े पहनते और तौरेत में जब आज़ाबे इलाही का तज़केरा पढते या अपने बाप ज़करिया की ज़बानी सुनते तो इस क़द्र रोते थे कि आपके रुखसारों का गोश्त गल गया था। और दांत नुमाया हो गये थे। हज़रते ज़करिया ने एक बार अपने वाज़ में जहन्नुम का तज़केरा किया तो रोते पीटते आप सहरा की तरफ निकल गये।

आपके वालदेन जब तलास में निकले तो तीन दिन के बाद सजदे की हालत में आपको बेहोश पाया आपने इस क़द्र गिरया किया कि उस जगह की मिट्टी आंसुओ से तर होकर कीचड़ हो गयी थी। चुनान्चे आपकी वालिदा ने जब आपके गर्द आलूदा चेहरे को साफ करना चाहा तो आपने यह समझा कि इज़राइल है। फरमाया कि बस इतना ठहर जा कि मैं अपने वालदैन से एक बार मिल लूँ मां ने कहा बेटा मैं तेरी मां हूँ। यह यह सुनकर आप ने आँखे खोली और सहरा की तरफ फिर भागने का क़स्द किया। मगर उन्की मां ने उन्हे मजबूर करके उनहे अपने घर ले आयी। इस वाक्ये से आपकी खुदा परस्ती रहम दिली पाकीज़गी और परहेज़गारी नुमाया है. जैसा कि परवरदिगारे आलम कूरआने मजीद में इरशाद फरमाता है। कि-

हमने इन्हे बचपने ही मे अपनी बारगाह से नबूअत, रहमदिली पाकीज़गी अता फरमायी और वह ख़ुद भी परहेज़गार और अपने वालदैन के हक़ में सआदत मंद थे। हमारी तरफ से इल पर बराबर सलाम है।

आपकी शहादत का वाकेया यह बयान किया जाता है कि आपके दौर मे हरदुस नामी एक इस्राइली बादशाह था।

जिसने अपने भाई क़ैसुस की खुबसुरत हसीन व जमील बेवा हैरदोआबा से अक़द कर लिया था। क़ैसुस से एक लड़की भी थी जो हरदुस की सगी भतीजी थी। चुनान्चे जब वह लड़की जवान हुई तो हरदूस ने उनकी मां की मरज़ी से इसे अपने तसर्रुफ में लेना चाहा तो लोगों ने कहा कि शरीयत के लिहाज़ से यह तुझ पर हराम है। इससे अक़द जायज़ नही है। मगर चुंकि इसकी तबीयत अपनी भतीजी की तरफ रुजू हो चुकी थी नीज़ इसकी मां ने भी कहा कि यह लड़की आपके नुत्फे से होती तो हराम करार पाती। लेकिन जब आपके नुत्फे से नही हैं तो फिर क्योकर हो सकती है। बेहतर यह है कि आप इस मसले को यहिया से मालूम करे। चुनान्चे उसने हज़रते यहिया को तलब किया और उससे दरियाफत किया कि मैं इस लड़की से शादी कर सकता हूँ या नहीं। आपने फरमाया कि शरीयत के तहत यह आप कर क़तई जायज़ नही है।

उस लडकी की मां ने भी अपने शौहर की इस शैतानी ख्वाहिश की हिमायत में हज़रते यहिया से भी खुब तकरार की यह लडकी जब बादशाह के नुत्फें से नही है तो फिर किस तरह इनके लिए हराम हो सकती है। हज़रते यहिया ने फरमाया कि हुक्मे खुदा यही है जो मै बयान कर रहा हूँ और इस अम्र मे मुदाखेलत का हक़ किसी को नही है।

हज़रते यहिया तो यह कह कर चले गये मगर बादशाह और उसकी बीवी को यह फैसला इन्तेहाई शाक़ गुज़रा। उसकी बीवी ने कहा कि जब भाई की बीवी के साथ अकद हो सकता है तो भाई की लडकी क्यो कर हराम हो सकती है।यह तो यहिया की सरासर ज़्यादती मालूम होती है। अगर यहिया की तरफ से आपको कुछ अन्देशा है तो उन्हे क़त्ल कराके अक़द कर सकते है।

बादशाह पर नफ़सानी ख्वाहिश की तकमील के लिए इस लड़की की तरफ से इश्क का भूत बूरी तरह सवार था। लिहाज़ा वह अपनी बीवी के इस जाहिलाना मशविरे पर तैयार हो गया और उसने यहिया के क़त्ल का फरमान जारी कर दिया और आखिरकार वह इबादत की हालत मे क़त्ल कर दिये गये। और इनका सर काट कर एक तश्त में रखकर बादशाह के सामने दरबार में पैश कर दिया गया। तारिखी शवाहिद से पता चलता है कि जिस वक्त हज़रते यहिया का सर उसके सामने रखा गया वह शराब पी रहा था और नशे की हालत मे था चुनान्चे उसने आपके सर के साथ जब तौहीन आमेज़ गैर शाइस्ता रवैया इख्तेयार किया तो सर से आवाज़ आयी कि ऐ बादशाह मेरे क़त्ल के बाद भी वह लड़की तुझ पर जायज़ नही हो सकती मगर उस बदबख्त पर इस आवाज़ का कोई असर न हुआ और वह दुसरे ही दिन अपनी सगी भतीजी पर मुतासर्रिफ हो गया।

हज़रते यहिया अ 0 के खूने नाहक का असर यह हुआ कि पत्थरों से खून जारी हुआ और चालीस दिन तक आफताब को गहन लगा रहा नीज़ परवरदिगार ने इस खून का बदला इस तरह लिया कि शाहे रुम तैतुस के ज़रिये हरदुस और इस कौम के 70 आदमियों को क़त्ल करा दिया।

इमामे हाकिम वग़ैरा ने इब्ने अब्बास से रवायत की है कि खुदा ने हज़रते रसूले खुदा से वही के ज़रिये फरमाया है कि मैनें यहिया बिन ज़करिया के खून के एवज़ 70 हज़ार आदमियो को क़त्ल कराया है और तुम्हारे फ़रज़न्द हुसैन के खून के एवज़ एक लाख चालीस हज़ार आदमियों को क़त्ल कराउँगा। तबरी का कहना है कि हज़रते यहिया के खून का क़ेसास परवरदिगार ने यूं लिया कि तैतुस क़ैसरे रुम ने मुल्क शाम पर चढायी की और बैतुलमुक़ददस को तबाह व बरबाद कर दिया। क़त्लेआम के नतीजे में बैशुमार लोग मारे गये।

वाकेयात में हमआंहगी और यकसानियत
हज़रते यहिया अ 0 और हज़रते इमामे हुसैन अ 0 के हालात और वाकेयात में मुन्दरजा जैल हमआंहगी और यकसानियत पायी जाती है।

1. हज़रते यहिया अ 0 और हज़रते इमाम हुसैन आ 0 दोनों ही छह माह की मुददत हमल मे मुतावल्लिद हुए।

2. हज़रते यहिया जिस तरह से दींन और शरीयत के मामले में क़त्ल किये गये उसी तरह हज़रते इमाम हुसैन अ 0 भी दीन व शरीयत के लिये शहीद हुए।

3. हज़रते यहिया अ 0 का सर जिस तरह तन से जुदा होने के बाद तश्त मे हरदूस के सामने पेश किया गया उसी तरह हज़रते इमामे हुसैन अ 0 का सर भी तन से जुदा करके तश्त मे यज़ीद मलउन के सामने दरबार में पैश किया गया।

4. हज़रते यहिया अ 0 का क़ातिल हरदूस शराबी और बदकार था उसी तरह यज़ीद भी शराबी और बदकार था।

5. हज़रते यहिया अ 0 के सर से जिस तरह हरदूस ने बेअदबी और गुस्ताखी की उसी तरह यज़ीद भी हज़रते इमाम हुसैन अ 0 के सरे अक़दस से बेअदबी और गुस्ताखी का मुरतकिब हुआ।

6. हज़रते यहिया अ 0 के सर ने जिस तरह तन से जुदा होने के बाद भी कलाम किया इसी तरह हज़रते इमाम हुसेन अ 0 के सरे अक़दस ने कलामें पाक की तलावत की।

7. हज़रते यहिया अ 0 की शहादत के बाद जिस तरह पत्थरों से खुन जारी हुआ इसी तरह मज़लूमें करबता की शहादत के बाद पत्थरों से खुन जारी हुआ और आसमान व ज़मीन ने गिरया किया।

8. हज़रते यहिया अ 0 की शहादत के बाद जिस तरह गहन आपताब को लगा उसी तरह हज़रते इमामें हुसैन अ 0 की शहादत के बाद आफताब व महताब को गहन लगा और सारी दुनिया अंधेरे में डूब गयी।

ग़ालेबन यही वजह थी कि हज़रते इमामें हुसैंन अ 0 अपने सफर करबला के दौरान हज़रते यहिया को बार बार याद करते थे।

हज़रते ईसा इब्ने मरियम
हज़रते मरियम खुदा की कुदरते कामेला से शौहर के बगैर जिस वक्त हामेला हुई इस बक्त आप की उम्र 11या 13 या 15 और 20 साल की बतायी जाती हैं.। इस तरह हमल की मुददत में भी इख्तेलाफ है। मोहक़्क़ेक़ीन व मुफ़स्सेरीन में से किसी ने 6 माह किसी ने 8 माह और किसी ने 9 माह और किसी ने सिर्फ 9 घण्टेँ तहरीर किये है।

बत्ने मरियम में स तकरारे हमल और विलादते ईसा के बारे में खुदा की तरफ से जो रुदाद कुरआने मजीद में मज़कूर हुई है उसका खुलासा यह है कि हज़रते मरियम एक दिन अपने हुजरे ए इबादत से निकल कर मकान के मशरिकी हिस्से मे तशरीफ ले गयी और वहां उन्होने खलवत इख्तेयार की तो परवरदिगार ने जिबरईल को इन्सानी शक्ल में उनके पास भेजा जब वह वारिद हुए जनाबे मरियम उन्हे देखकर घबरायीं और कहने लगीं कि अगर तू परवरदिगार है तो मैं तुझसे ख़ुदा की पनाह मांगती हुँ। जिबरईल ने कहा घबराओ नहीं में तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से भेजा हुआ एक फरिशता हुँ और तुम्हारे बत्न से एक पाको पाकीज़ा लड़के की विलादत की बशारत देने आया हूँ। यह सुनकर जनाबे मरियम ने फरमाया न मै बदकार हूं और न ही किसी मर्द का साया मुझ पर पड़ा है तो मेरे बत्न से लड़का पैदा होने का क्या सवाल है। जिबरईल ने कहा तुम ठीक कहती हो लेकिन तुम्हारा परवरदिगार कहता है कि बिन बाप के लड़का पैदा करना मेरे लिए बहूत आसान है। मै चाहता हूँ कि इसे अपने कूदरत की निशानी करार दूं और अपनी रहमते खास का ज़रिया बनाऊं और यह अम्र यक़ीनी और तय शुदा है।

इसके बाद हज़रते मरियम मशीयत के इशारे से खुद ब खुद हामेला हो गयीं मगर हमल उस वक्त जाहिर न हुआ जब तक कि हज़रते ईसा की विलायत का वक्त बिलकुल क़रीब नही आया।

चुनान्चे जब आपको तकलीफ महसुंस हुई और दर्दे ज़ेह मे मुबतेला हुई तो घर से निकल कर बैतुलमुकददस में तशरीफ लायीं। मगर वहां एक गैबी आवाज़ ने आपको मुतानब्बे किया कि ऐ मरियम यह विलादत की जगह नही है। बल्कि इबादत का मुक़ाम है लिहाज़ा आप फौरन इसके हुदूस से निकल जाइये। यह बात सुनकर आप पर खौफ़ तारी हुआ और मायूसी की हालत में आप वहां से निकलकर उलटे पाँव वापस आयीं। इसके बाद दर्द की शिद्त ने आप को दुसरा ठिकाना ढूंढने पर मजबूर किया। तो आप किसी महफूज़ जगह की तलाश में एक ना माकूल मुक़ाम की तरफ रवाना हुई रास्ते में कुछ लोगों से मुलाक़ात हुई जो क़ौम के जुलाहे थे। उन लोगों ने आपका मज़ाक उड़ाया आपने उन्हें बद्दुआ दी और आगे बढी तो फिर कुछ ताजिरों से मुलाक़ात हुई तो उन्होंने एक खजूर के दरख्त का पत्ता बताया आप इन्हें दुआऐं देती हुई जब इस दरख़त के क़रीब पहुंची तो वह बिलकुल खुश्क था। जैसे ही आप इसकी जड़ से लग कर बैठी वह हरा भरा हो गया। इसकी शाखें फ़ूटी और आप को चारों तरफ से घेर कर परदें में ले लिया फिर ख़ोशे निकले और फल तैयार हुए। जो आपकी ग़िज़ा क़रार पायी। खुदा ने आबे शीरीं का एक चश्मा जारी कर दिया जो पिने के काम आया ग़र्ज़ कि हूरों की मदद से हज़रते ईसा इसी मुक़ाम पर पैदा हुए। बाज़ मुफ़स्सेरीन ने तहरीर किया है कि इस मुक़ाम का नाम नासेरा था। इसी वजह से वहां के लोगों ने खुद को अन्सार उल्लाह कहा जो बाद में नसारा हुआ।

विलादत के बाद हज़रते मरियम की नज़र जब अपने फ़रज़न्द पर पड़ी तो उनके दिल में यह ख़याल पैदा हुआ कि ख़ुदा ने इस बच्चे को बग़ैर बाप के पैद तो कर दिया है मगर जब मेरी क़ौम इसे देखेगी तो मेरे बारे में क्या सोंचेगी। काश मैं पहले ही मर गयी होती यह दिन देखना मुझे नसीब न होता। नागहा एक आवाज़ आयी ऐ मरियम तुम फ़िक्र मंद क्यों हो खुदा तुम्हारी इज़्ज़तो अज़मत का निगेहबान व मुहाफिज़ है। तुम इस नेअमत के एवज़ तशक्कुर का रोज़ा रखो। और अगर तुमसे कोई कुछ पुछे तो क़तई जवाब न दो।

तीसरे दिन मरियम अपने फ़रज़न्द ईस को गले से लगाये हुए जब अपने घर में दाखिल हुए तो बनी इस्राईल के मर्दो और औरतों ने इन्हे चारो तरफ से घेर लिया लानतो मलामत करने लगे और कहने लगे कि ऐ मरियम तूने बहूत ही बुरा का किया है। ऐ हारुन की बहन न तो तेरी मां बदकार थी न तेरा बाप ही बुरा आदमी था। मगर तुने बनी इस्राइल की नाक कटवा दी। आखिर तुने यह क्या किया।

चुंकि उस वक़्त आप रोज़े की हालत में थी इसलिए कोई जवाब देने के बजाये आपने बच्चे की तरफ इशारा किया जिसका मक़सद यह था कि जो तुम्हें पूछना है इस बच्चे से पूछ लो। इस पर लोगों ने कहा कि यह नौज़ाएदा और शीर ख्वार बच्चा क्योंकर बात कर सकता है। मालूम नही मरियम को क्या हो गया है।

बस यह वह मौक़ा था कि जब हुक्में इलाही से हज़रते ईसा अ 0 ने ज़बान खोली और बोल उठे ऐ बनी इस्राइल के सरकश लोग होश में आओं मैं ख़ुदा का बन्दा हुँ उसने मुझे बा बरकत क़रार दिया है। नबी बनाया है और किताब अता की है। उसने मुझे हुक्म दिया है कि मैं ता ज़िन्दगी नमाज़ व ज़िक़ात अदा करुँ और अपनी मां के साथ नेकियों का बरताव करुँ। मुझे मेरे खुदा ने बद बख्त ज़ालिम और जाबिर नही बनाया है। मुझ पर सलामती है कि जब मै पैदा हुआ जिस दिन मरुंगा और जिस दिन फिर ज़िन्दा किया जाऊंगा। लोगों ने जब ईसा अ 0 की गुफ्तगू सुनी तो कहने लगे कि मरियम बेगुनाह है। और यह सब खुदा का मौजज़ा है।

बतने मरयम में हज़रते ईसा अ 0 का हमल बरोज़े चुमा मुस्तक़िर हुआ और पच्चीस ज़ीक़ाद बरोज़े मंगल आप की विलादत अमल में आयी। आप बनी इस्राइल के आख़री उलुल अज़म पैग़म्बर थे। आपके और हज़रत मूसा अ 0 के दरमियान खुदा की तरफ से छह सौ पैग़म्बर और भी तशरीफ लाये जिन्की तादाद का तज़केरा तो मिलता है लेकिन चन्द के आलावा बाक़ी पैग़म्बरों के नाम और हालात की सराहत किताबों में नही है।

हज़रते मरियम की हिजरत
हज़रते ईसा की विलादत और उनके ज़ैल में रुनुमा होने बले वाकेयात की खबरें जब वहा के बादशाह बहरुस की कानों तक पहुंची तो उसने इरादा किया कि इन्हे क़त्ल कर दे। खुदा ने बीबी मरियम को हुक्म दिया कि वह ईसा अ 0 को लेकर शाम से मिस्र की तरफ हिज़रत कर जायें चुनान्चे वह अपने रिश्ते के एक भाई यूसुफ निजार के महराह मिस्र की तरफ चली गयी। और वहां बारह साल तक रही। यहां तक की जब बहरुस मर गया तो अपने वतन वापस आयीं एक शरीफ इन्सान ने अपने मकान में आपको ठहरने की जगह दे दी थी। क़सबे माश के लिए आपने सम्भल की फराहमी और कपड़े की बिनाई का काम शुरु कर दिया था। जिससे गुज़र बसर होती थी।

हज़रते ईसा और इब्तेदाई तालीम

मिस्र में आपने क़याम के दौरान बीबी मरियम ने हुसूले तालीम के लिए हज़रते ईसा को एक बाईमाल मोअल्लिम के सिपुर्द कर दिया था। चुनान्चे पहले दिन जब उस मोअल्लिम ने हज़रते ईसा को पढ़ाना शुरू किया तो उसने कहा कि कहो बिस्मिल्ला हिर रहमानिर रहीम आपने कहा बिस्मिल्ला हिर रहमानिर रहीम फिर उसने कहा कहो अब जद आपने फ़रमाया अब जद और इसके साथ ही यह सवाल कर बैठे कि अब जद में जो अलाहदा अलाहदा हुरूफ है इनके माइने क्या है। यह सुनकर मोअल्लिम ने कहा मैं जो पढ़ा रहा हुँ वो पढ़ो। बिला वजह कठ हुज्जती मत करो। आप ने फरमाया अच्छा तो फिर यह बताइये कि बिस्मिल्लाह हिर रहमानिर रहीम में ब सीन और मीम के क्या मानी है। आप की यह बातें सुनकर मोअल्लिम को सख्त गुस्सा आया उसने कहा तुम पढ़ने आये हो या मेरा इम्तेहान लेने। आपने फरमाया कि अगर आप को नहीं पता तो मैं बताऊँ। वह और बरहम हुआ और हज़रते ईसा को लेये हुए बीबी मरियम के पास आया और कहने लगा तुम्हारा फ़रज़न्द वह जानता है जो तुम्हें नहीं मालूम लेहाज़ा मैं इसे नही पढ़ा सकता

हज़रते ईसा के मोअज़िज़े
हज़रते ईसा को जो मोअज़िजे खुदा की तरफ से अता हुए थे। इनमें से मुर्दो को ज़िन्दा करना और बीमारों को शिफा देना और पत्थरों को जवाहेरात में तबदील करना , पानी पर चलना , ग़ैब का हाल बताना , मिट्टी के परिन्दे बना कर इन्में जान पैदा करना वग़ैरह शामिल है इन मोअजिज़ात के अलावा भी हस्बे ज़रुरत मामूली मामूली आपके मोअजिज़े आप की ज़ात से ज़हुर पज़ीर हुआ करते थे। मसलन यह वाक़या बहूत मशहूर है कि जब आप कमसिन थे उस वक़त आप की मादरे गिरामी ने आपको कपड़ा रंगने वाले एक शख्स के यहा मज़दूरी पर रख दिया था। एक दिन इस रंग रैज़ ने आपको कुछ कपड़े दिये और कहा कि हर कपड़े के साथ एक रंगीन धागा बन्धा हुआ है। इसी धागे के मुताबीक़ इन कपड़ो पर रंग चढ़ाओ। यह कह कर वह कहीं चला गया आपने सारे कपड़े उठाये और एक ही रंग के मठके में इन्हे ड़ाल दिया और जब वह वापस आया तो उसने पुछा कि क्या कपडे रंग गये तो आपने फरमाया कि हां रंग गये। उसने पुछा कि कहा हैं आपने मठके कि तरफ इशारा कर के बताया कि उस मठके में पड़े है। यह सुनकर उसने मुंह पीट लिया और कहने लगा तुम्ने तो सब चौपट कर दिया। मैने अलग अलग रंगो मैं रंगने को कहा था और तुम्ने एक ही रंग के मटके में झोक दिया अब में ग्राहकों को क्या जवाब दुंगा आप ने मुस्कुराते हुए फरमाया कि ए भाई इस कद्र ख़फ़ा क्यो होते हो इन्हे मटके से बाहर निकाल कर तो देखो ग़र्ज़ कि जब उसने यह कपड़े मटके से निकाले तो हैरत अंगैज़ माजरे को देख कर शशदर रह गया। सब का रंग अलग अलग और इनमें बन्धे धागों के मुताबिक थे। चुनान्चे वे उसी वक़्त हज़रते ईसा पर ईमान ले आया।

सदक़े की अहमियत
एक शादी के मौक़े पर हज़रते ईसा ने फरमाया कि ये दुल्हा कल मर जाएगा। आप की इस बात से तमाम अफराद के दरमियान रंज व ग़म की एक लहर दौड़ गयी। दुसरे दिन जब वे ज़िन्दा सलामत व बखैरियत रहा तो लोगों ने आप को बुरा भला कहना शुरू किया यह सुनकर आप ने इस तकज़ीब करने वालो को अपने हमराह लिया और इस दुल्हे के घर तशरीफ ले गये। दुल्हन को बुलाया और उससे फरमाया कि रात में जो कुछ तुमने कारे खैर अंजाम दिया हो उसे बयान करो। उसने कहा कि मैनें खुदा के नाम पर एक फक़ीर को खाना खिलाया था। इसके अलावा कुछ नही हुआ। फिर आपने बढ़कर उस दूल्हा का बिस्तर हटाया तो लोगो ने देखा कि उसके पास एक खतरनाक किस्म का साँप मौजूद है। आप ने फरमाय कि इसी साँप के ज़रियें दुल्हा की मौत थी मगर इसकी बीबी के सदक़े में इसकी जान बच गयी। चुँकि खिदा की राह में दिया हुआ सदक़ा तमाम बलाओं को दुर करता है।

नुज़ूले माएदा
हज़रते ईसा की दुआओं के बदौलत उसकी उम्मत पर नुज़ूले माएदा का ज़िक्र कुरआने मज़ीद में इजमालन मौजुद है। जिसकी तफ़सील में मुफ़स्सेरीन का कहना है कि एक दिन हज़रते ईसा ने अपने कुछ हवारीन की ख्वाहिश पर खुदा की बारगाह में नुजूले माएदा की इसते दुआ की चुनान्चे एक ख्वान आसमान से उतरा जिसमें एक भुनी हुई मछली, कुछ मुख्तलीफ किस्म की सब्ज़िया, पांच अदद रौंगनी रोटियां, नमक, लहसुन और सिरका रखा हुआ था। चुनान्चे जब खाने का वक्त आया तो आपके हवारीन ने कहा कि ऐ खुदा के रसूल हमारी ख्वाहिश है कि हम इस ख्वान की मछली को ज़िन्दा देखे। यह सुनकर आपने बिस्मिल्लाह कह कर इस पर अपना हाथ फैरा और बा हूक्में खुदा का वह ख्वान पर चलने फिरने लगी। दुबारा फिर अपने हाथ फेरा तो वह जैसी थी वह वसी ही हो गयी। आपके इस मोजिज़े को देख कर सब के सब हैरत ज़दा रह गये।

इसके बाद जिसने यह खाना खाया फ़ायदे में रहा इसमें अगर कोई बीमार था तो इसे शिफा मिल गयी परेशान हाल था तो ख़ुश हाल हो गया, नादार थआ तो मालदार हो गया। और बावजूद कि कसीर तादाद ने इस खाने को खाया और शिकम सेर हुए। मगर इसमें कोई कमीं वाके न हुई । रवायतों से पता चलता है कि इस मायदे का नुज़ूल बराबर 40 दिन तक होता रहा। और तमाम शहर के लोग इससे शिकम सेर हुए। मुस्तफीज़ होने वालों में चुंकी दौलत मंद तब्का भी शामिल होने लगा इस लिए ईसा ने खुदा की हूकमत से इसे सिर्फ ग़ुरबा व मसाकिन के लिए मखसूस कर दिया जिसका नतीजा यह हुआ कि लोग नारारज़ हो कर दीन से फिर गये और बग़ावत कर आमादा हो कर हज़रते ईसा की तकज़ीब करने लगे। और यहूदियों की तरह साहिर व जादूगर कहने लगे। नीज़ इस ख्वाने नेअमत का मज़ाक उड़ाने लगे। इस्राइलियों की यह बात खुदा वन्दे आलम को इस कद्र नाग़वार ग़ुज़री की उसने यह सिलसिला बन्द कर दिया और बग़ावत और सरकशीरी करने वालों को इस अज़ाब में मुब्तेला कर दिया कि वह रात में अच्छें भले इन्सान की तरह सोये लेकिन जब सुबह उठे तो लोग बन्दर, सुअर, रीछ और ना जाने क्या क्या बन चुके थे.।

तफसीर हज़रते इमामे अस्करी हज़रते रसूले खुदा ने मन्कूल है कि नुजूले माएदा की नाकदरी और हज़रते ईसा को बूरा भला कहने की वज़ह से खुदा ने इन्हे चार सौ किस्म के हैवानों की सुरत में मस्ख कर दिया था। और वह लोग तीन दिन तक इसी हालात में रहने के बाद हलाक़ हो गये।

तब्लीग़ी सरगरमियां
हज़रते ईसा यूं तो बचपन चही चसे कारे तब्लाग़ की अन्जाम दे ही में मसरुफ रहे लेकिन जब आप की उम्र तीस साल की हुई तो आपने एतेराफ और जवानिब में अपने नायेबीन भेजने शुरू किये और ब हुक्में खुदा इन्हे अपने मोअज़िज़ात के इस्तेअमाल की इजाज़त भी दे दी ताकि तब्लीगी उमूर में इन्हें कोई दुशवारी न हो।

आपने दीगर शहरों के साथ शहरे अन्ताकिया में भी सादिक और सिददीक़ नामी अपने दो नाएबीन भेजे जहां का फरमान रवां ख़ुदा भी बुत परस्त था और अपनी रियाया को भी बुतपरस्ती के लिए मजबूर करता था। जब यह दोनें अन्ताकिया शहर के नज़दीक पहुंचे तो उनकी मुलाकात सबसे पहले एक बूढ़े शख्त से हुई जो अपनी बकरियां चरा रहा था। इन लोगों ने इसे सलाम किया इसने जवाबे समाल दिया। और पुछा कि तुम कौन हो और कहां से आ रहे हो। इन लोगों ने कहा कि हम हज़रते ईसा के नायब हैं और तब्लग़ी की ग़रज़ से यहां आये है। इसने कहा कि तुम्हारे पास क्या इसका क्या सबूत है.। तो उन्होने कहा कि इब्ने मरियम ने हमें मोअज़िज़े देकर भेजा है। हम बीमारों को शिफा और अंधो को आंखे दे सकते है। बूढ़े शख्स ने कहां कि मेरा बेटा मुददत से बीमार है। क्या तुम लोग इसे शिफा दे सकते हो ? इन लोगों ने कहा हमें अपने घर ले चलो।

चुन्नाचे वह इन्हे अपने घर ले आया सादिक और सिददीक़ ने खुदा की बारगाह में दुआ कि और लडके के सर पर हाथ फेरा कूदरते इलाही से उसी वक्त अच्छा भला हो गया और उसकी सारी बीमारी दूर हो गयी। यह देख कर पूरे घर ने इस दिन से मसीही दिन इख्तेयार कर लिया। इस बूढ़े शख्स का नाम हबीब निज़ार था.। जिन्हे मोमिने आले यासीन के नाम से दुनिया याद करती है। लड़के का शिफा याब होना था कि उसकी शोहरत तमाम शहर में हुई लोग सादिक़ और सिददीकी के गिर्दे जमा होने लगे और बीमारों को शिफा और अन्धों को आँखे मिलने लगी। यहां तक की हज़ारों लोगों ने हज़रते ईसा का दीन इख्तेयार कर लिया और बुत परस्ती से मुन्हरिफ हो गये। रफ्ता रफ्ता यह खबर वहा के बादशाह जिसका नाम शलाखिन था को मालूम हुई तो इन दोनो मुबल्लेग़ीन को गिरफ्तार करा करा कर शाही बुत खाने में क़ैद कर दिया। हज़रते ईसा को जब यह इत्तेला फ़राहम हूई कि सादिक़ और सिददकी को अन्ताकिया के बादशाह ने क़ैद कर लिया है तो आपने सुलूम नामी एक तीसरे शख्स को अपना नायब बना कर वहां रवाना किया। और यह हिदायत कर दी कि वह अपना दीन न ज़ाहिर करे बल्कि तक़य्ये की हालत में रह कर ख़ुफिया तौर पर कारे तब्लीग़ अन्जाम दे और उन दोनों नायबीन को बादशाह की क़ैद से छुड़ाने की कोशिश भी करे।

सलूम जब अन्ताकिया पहुंचे तो उन्होने भी मरीज़ो को शिफ़ा देने और अंधों को अच्छा करने का काम शुरू कर दिया। जिन्की वजह से इन्की बहूत जल्द शौहरत हो गयी मगर उन्हे अपने मसीही मस्लक़ का इज़हार नही किया बल्कि ज़ाहिर यही किया कि हमारा मज़हब वही है। जो यहां के बादशाह का।

जब बादशाह से लोगो ने बताया कि एक नया शख्स शहर में दाखिल हुआ है। और वह भी मरिज़ो को शिफ़ा और अंधों को आँखे देता है। लेकिन वह ईसाई नही है। बल्कि उसका भी मज़हब वही है। जो हमारा है। तो वह बहुत खुश हुआ। और सलूम को अपने पास तलब कर के उसने बचशम खुद बीमारो को अच्छा करते हुए देखा तो अपना मुकरिबे खास बना लिया।

सुलूम ने वहां रहकर जब खुफिया तरीके से पता लगाया कि सादिक व सिद्दीक शाही बुतखाने में कैद हैं तो एक दिन उन्होने बादशाह से कहा कि मैं शाही बूतखाने में इबादत करना चाहता हूँ। बादशाह की तरफ से इजाज़त मिल गयी। इसलिए वह वहां आने जाने लगे। चुनान्चे मौका पाकर उन्होनें इन दोनों मुबल्लेगीन से गुफतुगू की इनके हालात मालूम किये और उनके साथ ही यह ताकीद भी कर दी कि कभी यह ज़ाहिर न होने पाये कि हम एक दूसरे को जानते हैं। या एक ही मज़हब से हमारा तअल्लुक है।

मुख़तसर यह कि सुलूम ने वहां रहकर बादशाह पर जब अपना काफी असर जमा लिया तो मौका महल देखकर एक दिन उसने उससे दरियाफ़त किया कि वह दो आदमी कौन है ज़ो बुतखाने में कैद हैं। बादशाह ने कहा कि वह लोग भी आपकी तरह मरीजों और अंधो को अच्छा करते हैं। लेकिन वह हमारे खुदाओं को बुरा भला कहते हैं। और अपने खुदा की परस्तिश कराना चाहते हैं। यहां के लोगों ने उनकी करामात देख देख कर हमारे खुदाओं को छोड़ कर उनका मज़हब कुबूल करना शुरू कर दिया। तो हमने इन्हें कैद कर लिया ताकि यहां के आवाम से इनका कोई राबेता न रह जाये। यह सुनकर सुलूब ने कहा अगर आप मुनासिब समझें तो इन्हें किसी दिन अपने दरबार में बुलायें और हम मुबाहेसा करें ताकि हक़ और बातिल का पता चले। नीज़ उनकी अच्छाईयों और बुराईयों के बारे में कोई नज़रिया कायम हो सके।

बादशाह ने सुलूक की तजवीज़ मान ली और दूसरे ही दिन सादिक और सिद्दीक दरबार में तलब किये गये। बादशाह और दरबारियों की मौजूदगी में सुलूम ने इनसे पूछा कि तुम लोग कौन हो और यहां तुम्हारे आने का मकसद़ क्या हैं। उन्होनें कहा कि हम लोग खुदा के रसूल हज़रते ईसा अ 0 के फ़रिस्तादा हैं और यहां तब्लीग की रहे हो। उहोंने कहा कि हम लोग बुतपरस्तों को ख़ुदा परस्ती की दावत देते हैं। और इसकी दलील में मोजिजे़ से काम लेते हैं।

सुलूम ने कहा कि तुम लोग किस किस्म के मोज़िज़े ज़ाहिर करते हो। उन्होने कहा हम बीमारो को अच्छा करते हैं और अंधों को आंखें देते हैं और अपाहिजों और कोढ़ियों को शिफा अता करते हैं सुलूम ने कहा यह सब कुछ तो हमें भी आता है कोई नई बात बताओ जो इन्सान से मुमकिन न हो। उन लोगों ने कहा हमारे बादशाह का एक बेटा मर चुका है। और वह फुलां मुकाम पर दफन है अगर तुम उसे जिन्दा कर दो तो हम वादा करते हैं कि हम लोग भी तुम्हारा दीन क़ुबूल कर लेंगे वरना तुम्हारी गर्दनें उड़ा दी जायेंगी।

ग़र्ज़ कि बहामी मुहायदा और कौलो इक़रार के बाद सादिक़ और सिद्दीक़ ने दो रकत नामज अदा की और सजदे में बादशाह के उस लड़के के ज़िन्दा किये जाने की दूआ की जिसे मरे हुऐ काफी अरसा हो चुका था.। इसके बाद उन्होने कहा कि बादशाह का लड़का ज़िन्दा होकर कब्र से बाहर आ चुका है। कुछ लोगों को वहां भेजिये कि वह उसे यहां ले आयें। सुनकर बादशाह ख़ुद अपने लड़के कि कब्र की तरफ भागा उसके पीछे और लोग दौड़े वहां पहुंच कर उन लोगो ने देखा कि वह लड़का अपनी कब्र के पास खड़ा हुआ अपने चेहरे और सर से गर्दों गुबार झाड़ रहा है। बादशाह ने दौड़ कर इसे गले से लगा लिया और पूछा कि बेटा तुम क्योंकर ज़िन्दा हुए उसने कहा कि मैंने मुर्दा हालत में यह देखा कि दो आदमी सजदे में मेरे ज़िन्दा किये जाने की दुआ मांग रहे है।

बस उनकी दुआ कुबूल हुई और हमें ज़िन्दा कर दिया गया। फिर दो आदमियों ने हमारी कब्र खोद कर हमें बाहर निकाल कर खड़ा कर दिया। और ग़ायब हो गये। यह वाक़या सुनकर बादशाह के रोंगटे खड़े हो गये। उसने पूछा कि क्या तुम उनहे पहचानते हो। लडके ने कहा हां यक़ीनन मैं उन्हे पहचान लूंगा। दुसरे दिन बादशाह ने दोनो मुबल्लेग़ीन क़ैदियों सादिक़ और सिददक़ के हमराह अपने रियाया को भी एक बड़े मैदान में जमा किया और अपने लड़के को ले कर एक मक़ाम पर खड़ा हो गया। एक शख्स जब उस लड़के के सामने से गुज़रता रहा। वह कहता रहा कि यह नही है और जब वह दोनों कैदी सादिक़ और सिददीक़ इसके सामने से गुज़रने लगे तो उसने कहा कि यह यही है।

बादशाह ने उनके साथ जो नारवा सुलूक किये थे उन पर वह नादिम हुआ और उसी वक्त उस ने मसीही दीन इख्तेयार करने का एलान कर दिया। इसके साथ उसकी रियाया में भी हज़ारो लोग ईमान ले आये। लेकिन यहूदियों ने ईसा की तक़जीब की जिस पर हबीबे नज्जार बिगड़ गये और उन्होने कहा कि ऐ यहूदियों इन पैग़म्बरो का इत्तेबा करो। क्योकि यह हिदायत याफ़ता है और तुमसे कोई अज्र नही मांगते। यह सुनकर एक यहूदी आगे बढ़ा और इसने हबीब को वहीं क़त्ल कर दिया। इस ख़ुन के बदले में खुदा ने इन पर अज़ाब नाज़िल किया और वह सब के सब हलाक हो गये। इसके बाद तीनो मुबल्लेग़ीन सुलूम, सादिक़ और सिददीक़ अन्ताकिया से वापस आये और हज़रते ईसा से सारे वाक़ेयात बयान किये।

हज़रते ईसा के हव्वारीन
इस अम्र मे कोई इख्तेलाफ नही है कि आपके खुसूसी हवारीन की तादाद बारह ती अलबत्ता इनके नामों में मोअर्रेखीन ने इख्तेलाफ किया है बहर हाल जिन नामों पर मोअर्रेखीन की अकसरियत मुत्तफिक़ है वह दर्ज ज़ैल है।

1 याकूब ज़बदी

2 शमउन क़ेनाली

3 अनोराउस

4 शमुन बिन हमून

5 याक़ूब बिन हलफी

6 पुलूस

7 हरतोलूमाउस

8 युहन्ना

9 यहूदा

10 मता

11 मारकूस

12 लुक़ा

सालबी का कहना है कि यह ऐसे असहाब थे जिन पर हज़रते ईसा को बड़ा ऐतमादो भरोसा था। और यहीं बारह आदमी आप पर सबसे पहले ईमान लाये। मौलाना फरमान अली साहब कुरआने मजीद में सुरह आले इमरान के हाशिये पर एक जगह रक़म तराज़ है कि वह बारह आदमी जो सबसे पहले आप पर ईमान लाये हवारी कहलायेय़। इब्रानी ज़बान में हूर के माने खालिस सफेदी के है। पस इन्हे हवारी इन्हे इस वजह से कहते है कि पहले यह लोग धोबी का पेशा करते थे। औप कपड़ो को निखार कर सफ़ेद करने की वजह से यह नाम हुआ हो।

इस वजह से कि हज़रते ईसा ने इऩ्हे ग़ुस्ले इस्तेबाग़ दिया था। जो अब तक नस्रानियों में जारी है। यह इस वजह से कि हज़रते मरियम ने हज़रते ईसा को काम सिखाने की ग़रज़ से एक रंग रेज़ के पास रख दिया था। या फिर इस लिए कि वह नुफूस को गुनाहों की आमोजिश से पाक व साफ रखते थे और दुसरों को भी पाक करते रहते थे। इस वजह से इन्हे हवारी कहते है। यह लोग ज़बर्दस्त वायज़ थे खुसुसन लूका। जिनकी तरफ इन्जील का एक हिस्सा मन्सुब है। यह भी याद रखने की बात है। कि जिस तरह बनी इस्राइल के बारह नक़ीब थे। हज़रते ईस के बारह हवारी थे। इसी तरह उम्मते मुस्लेमा के भी बारह आईम्मा है। मौलाना ने हवारीन के बारे में जों मुख्तलिफ बयानात बयान फरमाये है। इससे पता चलता है कि मुअर्रेखीन इस अम्र में सही नतीजा नही अक़ज़ कर सके है कि हवारीन कहलाने का असल सबब क्या है। और शायद यह वजह है कि गलत फहमी के बिना पर हज़रते ईसा के हवारीन को किसी ने धोबी और किसी ने अंग्रेज़ तसव्वर किया है। मेरी तहक़ीक के मुताबिक़ हवारीन के लुग़वी मानी मददगार के है।

लिहाज़ा ज्यादा करीने क़यास बात यही है कि हज़रते ईसा के जो सच्चे मोईन व मदद गार थे वही हवारीन कहलाये। जैसा कि इमामे रज़ा अ 0 के इस क़ौल से साबित है कि हज़रते ईसा को अस्हाबे खास को हवारीन इस लिए कहा जाता है। कि वह मवाएज़ और नसीहतों के ज़रीये गुनाहो से दुर रखते और हज़रते ईसा के मोईन व मदद गार थे। हवारीन के माने चुँकि साफ करने वाले के भी है। इसलिए लोगों ने धोखा खाया। इसलिए किसी ने धोबी किसी ने रंगरेज़ लिख दिया।

हज़रते ईसा अ 0 का आसमान पर उठाया जाना

हज़रते ईसा जब शामून बिन हामुन को अपना खलीफा और जानशीन मुकर्रर कर चुके तो आप ने हवारीन को हुक्म दिया कि तुम लोग अतराफे आलम में तब्लीग़ व हिदायत के लिए फैल जाओ चुनान्चे जब वह लोग ग़ैर मुल्को में चले गये तो आपको तनहा देखकर इस्राइली यहूदी ने जिनकी फ़ितरत और सरिश्त में शरारत और शैतनत भरी हुई थी। एक मन्सूबा तैयार किया कि किसी तरह क़त्ल कर दिया जाये। चुनान्चे मुखतलिफ़ हीलों बहानों से एक शब इन लोगों ने आपकों गिरफ्तार करके एक घर में मुकय्यद कर दिया। खुदा का करिश्मा देखिये कि जिब्रील आये और एक रौशन दान से निकल कर आपको आसमान पर ले गये।

जब सुबह तड़के यहूदी हज़रते ईसा को फांसी देने के इरादे से वहां पहुंचे तो उनका एक सरदार जिसका नाम यहूदा था आपको बाहर लाने के लिए घर के अन्दर दाखिल हुआ। खुदा ने अपनी कुदरत से यहूदा को हज़रते ईसा की शक्ल में तब्दील कर दिया। हज़रते ईसा को न पाकर जब वह अपने साथियों से माजरा बयान करने बाहर निकला तो इसे देखते ही ईसा समझ कर इसके उपर टूट पड़े दबोच लिया और वह लाख चीख़ता चिल्लाता रहा कि मैं ईसा नहीं हुं बल्कि तुम्हारा साथी यहूदा हूँ।

आखिर इसे सुली पर चढ़ा ही दिया जब उसका काम तमाम हो गया तो इऩ बदबख़तों ने इसकी लाश पर तबर भी बरसाये। जब यह सब कुछ हो चुका तो खुदा ने फिर यहूदा को उसकी अपनी असली शक्लों सूरत में कर दिया। यह देख कर उन लोगों ने अपना मुंह पीट लिया और हाथ मल कर रह गये। यह वाक्या 21 रमज़ानुल मुबारक का बताया जाता है।

हज़रते ईसा के बारे में यहूद नसरा दोनों ही शुबहे में पड़े हुए थे। यहूदी आपके बारे में बेहूदा ख्यालात रखते थे जबकि नसारा आपको खुदा का बेटा कहते थे। परवर दिगार ने ह़रते आदम की मिसाल देकर दोनों की तशफफी कर दी यहूदियों को यह करहर मुतमइन कर दिया कि जब आदम की खिलकत मिट्टी से हो सकती हो तो ईसा का ब़गैर बाप के पैदा होना तअज्जुब खेज़ क्यों। और नसारा को यह कह कर समझा दिया कि ईसा का बग़ैर बाप का पैदा होना खुदा या खुदा का बेटा होने की दलील हो तो हज़रते आदम के मां और बाप दोनों ही नही थे। लिहाज़ा सबसे पहले इन्हे खुदा या ख़ुदा का बेटा होना चाहिए था।

हज़रते ईसा के आसमान पर उठा लिये जाने क् बाद शमून अपनी पूरी ज़िम्मेदारीयों के साथ बहैसियते वसी अपने फ़राज़ और तब्लीग़ उमूर अन्जाम देते रहे। और उनकी वसीयत के सिलसिलें इनके बाद भी हज़रते सरकारे कायनात रसूले खुदा स 0 अ 0 की बेसत तक बराबर जारी व सारी रहा। और शमून इब्ने हमून के बाद यहिया बिन ज़करिया मंज़र बिन शमउन सलेमा बिन मन्ज़र बरज़ा बिन सलमा, अबी बिन बरज़ा, दुस बिन अबी, असीद बिन दोस, होफ बिन असीद यहिया बिन होफ। बजीरा राहिब और बाज़ रवायात की बिना पर जनाबे सलमान फ़ारसी बित्तरतीब एके बा दीगरे एक दुसरे के वसी मक़र्रर होते रहे। और यह तमाम हज़रात तालीमातो शरीयत ईसा की तब्लीग़ के सिलसिले के साथ पैग़म्बरे आख़्रुज़मा की बशरत भी किया करते थे। जनाबे सलमाने फ़ारसी वही बुज़ुर्ग हैं जो बाद में मुशर्रफ ब इस्लाम हुए और ईमान के दस दरजे पर फ़ायज़ थे। और इऩ्ही के बारे में हज़रते रसूले ख़ुदा स 0 अ 0 ने फरमाया था कि सलमान मेरे अहलेबैत में से है।

यह बात भी तय शुदा है कि क़रीब क़यामत जब आख़री इमाम हज़रते मेंहदी आखिरउज़्ज़मा जूहुर फरमायेगें तो हज़रते ईसा भी आसमानें चहारूम से ज़मीन पर तशरीफ लायेंगे। उनकी इमामत की तस्दीक़ करेंगे और उन्ही की इमामत में नमाज़ पढ़ेगे।

इमामे फ़ख़रुद्दीन राज़ी अपनी तफसील में लिखते हैं कि जिस वक्त इमामें मेंहदी का जुहूर होगा हज़रते ईसा अर्शे चहररुम से ज़मीन पर तशरीफ लायेगें। तो उस वक्त उनकी हैसियत एक उम्मती से ज़्यादा न होगी।

मौलाना फरमान अली साहब कुरआने मजीद में सुरह आले इमरान के हाशिये पर एक जगह रक़म तराज़ है कि वह बारह आदमी जो सबसे पहले आप पर ईमान लाये हवारी कहलायेय़। इब्रानी ज़बान में हूर के माने खालिस सफेदी के है। पस इन्हे हवारी इन्हे इस वजह से कहते है कि पहले यह लोग धोबी का पेशा करते थे। औप कपड़ो को निखार कर सफ़ेद करने की वजह से यह नाम हुआ हो।

इस वजह से कि हज़रते ईसा ने इऩ्हे ग़ुस्ले इस्तेबाग़ दिया था। जो अब तक नस्रानियों में जारी है। यह इस वजह से कि हज़रते मरियम ने हज़रते ईसा को काम सिखाने की ग़रज़ से एक रंग रेज़ के पास रख दिया था। या फिर इस लिए कि वह नुफूस को गुनाहों की आमोजिश से पाक व साफ रखते थे और दुसरों को भी पाक करते रहते थे। इस वजह से इन्हे हवारी कहते है। यह लोग ज़बर्दस्त वायज़ थे खुसुसन लूका। जिनकी तरफ इन्जील का एक हिस्सा मन्सुब है। यह भी याद रखने की बात है। कि जिस तरह बनी इस्राइल के बारह नक़ीब थे। हज़रते ईस के बारह हवारी थे। इसी तरह उम्मते मुस्लेमा के भी बारह आईम्मा है। मौलाना ने हवारीन के बारे में जों मुख्तलिफ बयानात बयान फरमाये है। इससे पता चलता है कि मुअर्रेखीन इस अम्र में सही नतीजा नही अक़ज़ कर सके है कि हवारीन कहलाने का असल सबब क्या है। और शायद यह वजह है कि गलत फहमी के बिना पर हज़रते ईसा के हवारीन को किसी ने धोबी और किसी ने अंग्रेज़ तसव्वर किया है। मेरी तहक़ीक के मुताबिक़ हवारीन के लुग़वी मानी मददगार के है।

लिहाज़ा ज्यादा करीने क़यास बात यही है कि हज़रते ईसा के जो सच्चे मोईन व मदद गार थे वही हवारीन कहलाये। जैसा कि इमामे रज़ा अ 0 के इस क़ौल से साबित है कि हज़रते ईसा को अस्हाबे खास को हवारीन इस लिए कहा जाता है। कि वह मवाएज़ और नसीहतों के ज़रीये गुनाहो से दुर रखते और हज़रते ईसा के मोईन व मदद गार थे। हवारीन के माने चुँकि साफ करने वाले के भी है। इसलिए लोगों ने धोखा खाया। इसलिए किसी ने धोबी किसी ने रंगरेज़ लिख दिया।

हज़रते ईसा अ 0 का आसमान पर उठाया जाना
हज़रते ईसा जब शामून बिन हामुन को अपना खलीफा और जानशीन मुकर्रर कर चुके तो आप ने हवारीन को हुक्म दिया कि तुम लोग अतराफे आलम में तब्लीग़ व हिदायत के लिए फैल जाओ चुनान्चे जब वह लोग ग़ैर मुल्को में चले गये तो आपको तनहा देखकर इस्राइली यहूदी ने जिनकी फ़ितरत और सरिश्त में शरारत और शैतनत भरी हुई थी। एक मन्सूबा तैयार किया कि किसी तरह क़त्ल कर दिया जाये। चुनान्चे मुखतलिफ़ हीलों बहानों से एक शब इन लोगों ने आपकों गिरफ्तार करके एक घर में मुकय्यद कर दिया। खुदा का करिश्मा देखिये कि जिब्रील आये और एक रौशन दान से निकल कर आपको आसमान पर ले गये।

जब सुबह तड़के यहूदी हज़रते ईसा को फांसी देने के इरादे से वहां पहुंचे तो उनका एक सरदार जिसका नाम यहूदा था आपको बाहर लाने के लिए घर के अन्दर दाखिल हुआ। खुदा ने अपनी कुदरत से यहूदा को हज़रते ईसा की शक्ल में तब्दील कर दिया। हज़रते ईसा को न पाकर जब वह अपने साथियों से माजरा बयान करने बाहर निकला तो इसे देखते ही ईसा समझ कर इसके उपर टूट पड़े दबोच लिया और वह लाख चीख़ता चिल्लाता रहा कि मैं ईसा नहीं हुं बल्कि तुम्हारा साथी यहूदा हूँ।

आखिर इसे सुली पर चढ़ा ही दिया जब उसका काम तमाम हो गया तो इऩ बदबख़तों ने इसकी लाश पर तबर भी बरसाये। जब यह सब कुछ हो चुका तो खुदा ने फिर यहूदा को उसकी अपनी असली शक्लों सूरत में कर दिया। यह देख कर उन लोगों ने अपना मुंह पीट लिया और हाथ मल कर रह गये। यह वाक्या 21 रमज़ानुल मुबारक का बताया जाता है।

हज़रते ईसा के बारे में यहूद नसरा दोनों ही शुबहे में पड़े हुए थे। यहूदी आपके बारे में बेहूदा ख्यालात रखते थे जबकि नसारा आपको खुदा का बेटा कहते थे। परवर दिगार ने ह़रते आदम की मिसाल देकर दोनों की तशफफी कर दी यहूदियों को यह करहर मुतमइन कर दिया कि जब आदम की खिलकत मिट्टी से हो सकती हो तो ईसा का ब़गैर बाप के पैदा होना तअज्जुब खेज़ क्यों। और नसारा को यह कह कर समझा दिया कि ईसा का बग़ैर बाप का पैदा होना खुदा या खुदा का बेटा होने की दलील हो तो हज़रते आदम के मां और बाप दोनों ही नही थे। लिहाज़ा सबसे पहले इन्हे खुदा या ख़ुदा का बेटा होना चाहिए था।

हज़रते ईसा के आसमान पर उठा लिये जाने क् बाद शमून अपनी पूरी ज़िम्मेदारीयों के साथ बहैसियते वसी अपने फ़राज़ और तब्लीग़ उमूर अन्जाम देते रहे। और उनकी वसीयत के सिलसिलें इनके बाद भी हज़रते सरकारे कायनात रसूले खुदा स 0 अ 0 की बेसत तक बराबर जारी व सारी रहा। और शमून इब्ने हमून के बाद यहिया बिन ज़करिया मंज़र बिन शमउन सलेमा बिन मन्ज़र बरज़ा बिन सलमा, अबी बिन बरज़ा, दुस बिन अबी, असीद बिन दोस, होफ बिन असीद यहिया बिन होफ। बजीरा राहिब और बाज़ रवायात की बिना पर जनाबे सलमान फ़ारसी बित्तरतीब एके बा दीगरे एक दुसरे के वसी मक़र्रर होते रहे। और यह तमाम हज़रात तालीमातो शरीयत ईसा की तब्लीग़ के सिलसिले के साथ पैग़म्बरे आख़्रुज़मा की बशरत भी किया करते थे। जनाबे सलमाने फ़ारसी वही बुज़ुर्ग हैं जो बाद में मुशर्रफ ब इस्लाम हुए और ईमान के दस दरजे पर फ़ायज़ थे। और इऩ्ही के बारे में हज़रते रसूले ख़ुदा स 0 अ 0 ने फरमाया था कि सलमान मेरे अहलेबैत में से है।

यह बात भी तय शुदा है कि क़रीब क़यामत जब आख़री इमाम हज़रते मेंहदी आखिरउज़्ज़मा जूहुर फरमायेगें तो हज़रते ईसा भी आसमानें चहारूम से ज़मीन पर तशरीफ लायेंगे। उनकी इमामत की तस्दीक़ करेंगे और उन्ही की इमामत में नमाज़ पढ़ेगे।

इमामे फ़ख़रुद्दीन राज़ी अपनी तफसील में लिखते हैं कि जिस वक्त इमामें मेंहदी का जुहूर होगा हज़रते ईसा अर्शे चहररुम से ज़मीन पर तशरीफ लायेगें। तो उस वक्त उनकी हैसियत एक उम्मती से ज़्यादा न होगी।

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