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धारा 370 को ख़त्म करना देश के लिये सही नहीं मानते पत्रकार अमरेश मिश्रा : गिनाए 32 कारण

अमरेश मिश्रा
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जम्मू एंड कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाली धारा 370 को मोदी सरकार ने लगभग खत्म कर दिया है, इसके साथ ही धारा 35 ए खुद ब खुद खत्म हो गई है। धारा 370 भाजपा के हमेशा चुनावी घोषणा पत्र में शामिल रहती आई थी, जिसे इस बार मोदी सरकार ने खत्म कर दिया है, इससे जहां एक बहुत बड़ा वर्ग खुश है वहीं ऐसे लोगों की तादाद भी कम नहीं है जो धारा 370 को खत्म करना देश के लिये सही नहीं मानते। पत्रकार अमरेश मिश्रा ने ऐसे 32 कारण गिनाए हैं और मोदी सरकार की जमकर आलोचना की है।

1. कुछ लोगों को यह समझ मे नही आ रहा कि किस तरह 370 को हटाना देशद्रोह है। और अब कैसे हमारे PoK पर से सारे दावे खत्म हो गये।

2. लोग यही नही जानते कि जम्मू-कश्मीर पूरे भारत का हिस्सा बना कैसे। 1947 तक समझिये, जम्मू-कश्मीर एक अलग देश, एक अलग राष्ट्र था, जिसका अपना अलग राजा और कानून था। जब अँग्रेज़ हिन्दुस्तान छोड़ कर जाने लगे तो जम्मू-कश्मीर के सामने तीन विकल्प थे: भारत मे विलय, पाकिस्तान मे विलय, या अपने को स्वतंत्र राष्ट्र घोषित करना।

3. 26 अक्टूबर 1947 को कश्मीर के राजा हरी सिंह ने भारत मे विलय हेतु ‘सम्मिलन के दस्तावेज़ (Instrument of accession)’ पर साइन किया। यह दस्तावेज़ मेरे पास है। इसके संभाग 7 मे साफ लिखा है कि जम्मू-कश्मीर का भारत मे विलय कुछ शर्तों पर हो रहा है, जिसमे सबसे बड़ी शर्त ये है, कि भारतीय संविधान जम्मू-कश्मीर विलय के लिये कुछ ‘खास प्रयोजन (Special Provision or status)’ तैय्यार करे।

4. 27 अक्टूबर 1947 को भारत के तत्कलीन गवर्नर-जनरल मौन्टबैटिन ने हरी सिंह को पत्र लिखा, जिसमे साफ कहा गया, कि जम्मू-कश्मीर का भारत मे विलय ‘खास’ है। भारत द्वारा यहां plebiscite यानी जनमत संग्रह कराया जायेगा।

5. धारा 370, ‘सम्मिलन के दस्तावेज़ (Instrument of accession)’, मे शामिल, जम्मू-कश्मीर की ‘खास’ हैसियत, बनाये रखने की legal and constitutional (कानूनी एवं संवैधानिक) अभिव्यक्ति (expression) थी।

6. भारत 370 के बजाय उसका नाम 403 या कुछ और भी रख सकता था। नाम कुछ भी हो, संविधान मे ये बात आनी थी कि जम्मू-कश्मीर बाकी राज्यों की तरह नही है, वो ‘खास’ है।

7. अमित शाह ने Parliament मे कहा की भारतीय संविधान की प्रस्तावना यानी Preamble मे जम्मू-कश्मीर का नाम 15 नम्बर पर, भारत के एक राज्य के रूप मे आता है। preamble मे लिखे सारे राज्यों पर भारत का संविधान लागू है। ये बात सही है। लेकिन उसी संविधान मे ये भी लिखा है कि जम्मू-कश्मीर विशेष या खास है।

8. भारतीय संसद 370 हटा सकता है। पर उसे 370 की जगह, जम्मू-कश्मीर के लिये फिर कोई विशेष या खास व्यवस्था करनी होगी, जो अन्य राज्यों से भिन्न है। अगर भारत ऐसा नही करता, तो फिर ‘सम्मिलन के दस्तावेज़ (Instrument of accession)’, जिसके तहत जम्मू-कश्मीर का भारत मे विलय हुआ था, बेमानी हो जाता है।

9. 370 अस्थाई नही था। नेहरु ने इसे अस्थाई एक खास संदर्भ मे कहा था। उनका मानना था कि जम्मू-कश्मीर का हमेशा विशेष दर्जा रहेगा। अब इस विशेष दर्जे का रूप 370 हो या कुछ और। नेहरू ने कभी ‘विशेष दर्जे’ को अस्थायी नही कहा था।

10. इसी आधार पर 1949 मे भारतीय संविधान मे 370 शामिल किया गया। इस धारा मे स्पष्ट लिखा है कि विदेश मामले, रक्षा और संचार के इलावा, भारतीय राज्य को जम्मू-कश्मीर के बारे मे कानून बनाने का अधिकार नही है। बिना जम्मू-कश्मीर विधान सभा की इजाज़त के, कोई भी भारतीय कानून, वहां लागू नही होगा।

11. 1947-48 मे पाकिस्तान ने काश्मीर के एक बड़े हिस्से पर, जो हरी सिंह ने 370 लागू करने की शर्त पर भारत को पूरा का पूरा दिया था, कब्ज़ा किया।

12. भारत इस मसले को UNO, एक विवाद के रूप मे, ले गया।

13. इस विवाद मे भारत ने UNO मे कहा कि जो ‘पूरा कश्मीर’, राजा हरी सिंह ने भारत मे संधी के आधर पर विलय किया था, वो भारत का है। पाकिस्तान ने भारत के हिस्से पर कब्ज़ा किया है। UNO मे भारत ने पाकिस्तान द्वारा हथियाए गये हिस्से को पाकिस्तान का हिस्सा मानने से इंकार कर दिया। उस हिस्से को भारत ने ‘पाक-अधिकृत कश्मीर (PoK)’ कहा।

14. साफ शब्दों मे भारत ने पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) पर अपना हक़ ‘सम्मिलन के दस्तावेज़ (Instrument of accession)’, उसके पास होने के आधार पर जताया। जैसा ऊपर लिखा है, कश्मीर को विशेष या खास दर्जा देने की बात ‘सम्मिलन के दस्तावेज़ (Instrument of accession)’ मे लिखी है। धारा 370, विशेष दर्जे की अभिव्यक्ति है।

15. तो मतलब भारत ने PoK पर अपना हक़, भारत के संविधान मे कश्मीर को विशेष दर्जा देने के आधार पर, यानी 370 की भारतीय संविधान मे मौजूदगी के आधार पर, जताया।

16. अब अगर भारतीय Parliament 370 हटाता है, तो उसे कश्मीर के लिये, कोई दूसरा विशेष प्रावधान लाना होगा। जम्मू-कश्मीर को यूनियन टेरीटिरी बनाना कोई विशेष प्रावधान नही है।

17. अब चूंकि 370 हट गया है, तो भारत ने जम्मू-कश्मीर के भारत मे विलय होने के आधार–सम्मिलन के दस्तावेज़ (Instrument of accession)–का भी निशेध कर दिया।

18. ध्यान दीजियेगा बिना कोई और विशेष दर्जा दिये, भारत ने अगर 370 हटा दिया, तो फिर सम्मिलन के दस्तावेज़ (Instrument of accession) का भी निशेध हो गया।

19. अगर सम्मिलन के दस्तावेज़ (Instrument of accession) का निशेध हो गया, तो जम्मू-कश्मीर के भारत के विलय का भी निशेध हो गया। अगर जम्मू-कश्मीर के भारत मे विलय का निशेध हो गया, तो फिर PoK पर भारत के दावे का भी निशेध हो गया!

20. या तो भारत सरकार तुरंत जम्मू-कश्मीर के लिये कोई दूसरा विशेष दर्जा लाये। या फिर 370 बहाल करे।

21. वर्ना PoK ही नही, श्रीनगर पर भी भारत का अधिकार बेमानी हो जायेगा। फिर ये माना जायेगा कि भारत ने कश्मीर को जबर्दस्ती अपने मे मिला रखा है।

22. इसका मतलब ये निकलेगा कि अगर कल को कोई दूसरा देश, जैसे अमेरिका या पाकिस्तान भारत के हिस्से वाले कश्मीर पर जबरन अधिकार करता है, तो भारत के पास दुश्मन को काउंटर करने हेतु, कोई संविधानिक आधार नही रह जायेगा।

23. ऐसे मे, भारत युद्ध तो कर सकता है–पर यह युद्ध बिना किसी देश के समर्थन या किसी legal आधार पर नही होगा।

24. अगर मोदी सरकार की यही मंशा है कि हम जबरन जम्मू-कश्मीर पर कब्ज़ा जमाये–तो ठीक है–मोदी-शाह को संसद मे खुल कर कहना चाहिये कि हम सम्मिलन के दस्तावेज़ (Instrument of accession) को नही मानते। हम PoK पर भी चढ़ाई कर के उसे भी हासिल करेंगें।

25. अगर मोदी-शाह खुल कर ऐसा नही कहते तो यही माना जायेगा कि उनका अमेरिका या पाकिस्तान से गुप्त समझौता है–कि भारत का जम्मू-कश्मीर पर सारा संविधानिक और कानूनी दावा समाप्त कर दो।

26. किसान की ज़मीन तभी तक उसकी है, जब तक उसका उसपे कानूनी अधिकार है। जिस दिन कानूनी अधिकार समाप्त हो गया–कोई भी जबरन उसपे कब्ज़ा कर सकता है।

27. उसी प्रकार से, जम्मू-कश्मीर पर अब कोई भी कब्ज़ा कर सकता है। भारत के पास बल प्रयोग के अलावा कोई नैतिक या संविधानिक प्रक्रिया नही बची।

28. जब तक 370 था, भारत कश्मीरीयों पर भी दबाव बनाता था–कि तुमने भारत से संधी की है। तुम्हे भारत ही मे रहना होगा। इसी संधी के आधार पर भारत PoK को लेने के लिये हमला भी कर सकता था।

29. अच्छा-भला सब कुछ चल रहा था। कश्मीर मे जितना भी आतंकवाद हो, 370 की वजह से political initiative और narrative पर hold भारत का था। धीरे-धीरे हम PoK को हथियाने की तरफ बढ़ रहे थे।

30. मोदी-शाह ने भारत को एक सभ्य सुपरपावर से जो पूरे भारतीय उप-महाद्वीप पर अपना कानूनी तौर पर अधिपत्य बना रहा था, को अचानक जंगल का जानवर बना दिया–जिसको कोई भी शिकारी मार सकता है!

31. मोदी-शाह ने 370 इसलिये हटाया जिससे अमेरिका-पाकिस्तान को फायदा हो। अब पाकिस्तान खुल कर तो कहेगा नहीं कि उसे फायदा है। लेकिन असलियत सभी जान रहे हैं।

32. RSS और भाजपा अंग्रेजों के पिट्ठू रहे हैं। आज भी हैं। इनका राष्ट्रवाद छद्म है। इनका असली ऐजेंडा है भारत के टुकड़े-टुकड़े करना! इसिलिये 370 हटाया गया है और कश्मीर को विभाजित किया गया। ये वैसी ही बात है, की पहले सरकार खुद रेल्वे या बिजली विभाग ने भ्रष्टाचार फैलाये–उसकी छवि खराब करे। फिर उसे निजी हाथो मे बेच दे।

33. मंगल पांडे सेना और हर राष्ट्रवादी को भारत विरोधी इस कृत्य का विरोध करना होगा। वर्ना देशद्रोही कहलाओगे!

(लेखक मंगल पांडेय सेना के 1857 एंव वरिष्ठ पत्रकार हैं, ये उनके निजी विचार हैं उनसे 9005711100 पर संपर्क किया जा सकता है)

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