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#मुसलमान_न_होते_तो_दुनियां_कैसी_होती, जानते हैं, अगर नहीं तो जानना चाहिये!

आज के समय में मुस्लमान और इस्लाम के खिलाफ विश्व स्तरीय झूठा प्रोपेगंडा चल रहा है, यह काम बहुत पहले, कई सदियों से जारी है मगर हाल के कुछ दशकों में इसने बहुत तेज़ी और तीखापन अपना लिया है, अनेक असामाजिक शक्तियां/संगठन मिल कर इस्लाम विरोधी कार्यों को कर रही हैं

भारत धार्मिक सद्भाव और गंगा-जमुनी तहजीब का देश है। यहां मंदिर से आरती और मस्जिद से अजान सुनाई देती है तो चर्च से प्रार्थना के वचन और गुरुद्वारे में गुरुग्रंथ साहब की अमरवाणी गूंजती है।

इस्लाम धर्म इस सृष्टि की रचना और धरती पर प्रथम मानव के आगमन के समय से मौजूद है, हज़रत आदम और बीवी हव्वा के धरती पर आने के साथ ही इस्लाम मज़हब शुरू होता है, फिर जब इंसानों की आबादियां फैलने लगी तो उन जगहों पर अल्लाह ने अपने अवतार अपना सन्देश लेकर समय समय पर भेजे, ये सभी अवतार एकईश्वर की इबादत का सन्देश लेकर आये, इस्लाम धर्म का मूल ‘एकईश्वरवाद’ है, धरती पर इंसानों ने अल्लाह के बताये रास्ते/तरीके/क़ानून के खिलाफ अपने मनगढ़त तरीके भी अपनाये जिससे समय में खराबियां पैदा होती रहीं, अंत में अल्लाह ने मुहम्मद मुस्तफ़ा को अपनी निशानियां, सन्देश और किताब लेकर भेजा ताकि लोग गुमराही/बुराई से निजात/छुटकारा पा लें, और जब दीन क़ायम हो गया उसके बाद मुसलमानों ने कई सदियों तक दुनियां की लीडरशिप की, ये समय भारत के इतिहास का ‘गोल्डन ऐरा’ कहलाता है, इसी काल में भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था, महान मुग़ल साशक अकबर के समय में ‘इंग्लैंड’ को धरती के नक़्शे में नहीं दर्शाया जाता था, वोह एक अति पिछड़ा जंगली लोगों का टापू कहा जाता था, उस समय भारत की GDP दर 27 फीसद थी

विश्व के बड़े बड़े कार्य मुसलमानों ने अंजाम दिए, विश्व को ने ज्ञान से मुसलमानों ने अवगत करवाया, नयी नयी खोज और आविष्कार मुस्लिम वैज्ञानिक/जानकारों ने की, विज्ञानं में इस क़ौम ने बड़ा योगदान दिया, गाडित के अनेक नियम/फार्मूले/थेओरम मुस्लिम्स ने दीं

खान, पान, लिबास, ज़बान, भवन निर्माण, सिलाई, खेती, हथियार, तोपखाना, सेना का निर्माण और उसकी ट्रेनिंग, आबपाशी, नाप, बाग़ात, दरिया समेत अनेक ऐसे फीलड हैं जिसमे मुस्लिमस ने विश्व का मार्ग दर्शन किया, सबसे पहले गेहूं की फसल सीरिया में पैदा होना शुरू हुई थी, सेब की फसल तज़ाकिस्तान के पहाड़ी इलाके में शुरू हुई, जलेबी, समोसा, दूध की खीर, चपाती ईरान से शुरू हुईं, बिरियानी और नान रोटी/ख़मीरी रोटी अफ़ग़ानिस्तान से, अरब से तहज़ीब, दीन, अख़लाक़, भाईचारा, उम्दा घोड़े, फ़र्सी, कहवा दुनियां मिला, ईरान ने बड़े बड़े वैज्ञानिक, साहित्कार, संगीतकार, गायक, कवि, लेखक दिए, सच ये है कि एक छोटे से लेख में इनके कामों को समाया नहीं जा सकता,

भारत के लोग दो पीस में कपड़ा शरीर पर डाले रखते थे, क्यूंकि उन्हें कपड़ों की सिलाई की कला नहीं आती थी, जब अरब के व्यापारी यहाँ आना शुरू हुए तब उनके साथ ‘सुई -धागा’ आया और फिर कपडे सिलना शुरू हुआ, पहले हमारे यहाँ के लोग कंद-मूल/जड़ आदि कच्चे या पानी में उबाल कर खाते थे, अरब व्यापारियों आने से यहाँ गरम मसाले और खाना बनाने की विधि आयी, इसी तरह से अन्य संस्कृतियों से भी भारत को बहुत कुछ प्राप्त हुआ विशेषकर ब्रिटिशर्स के राज में अंग्रेजी भाषा, विज्ञानं, मैथ, युद कला, अच्छे हथियार/बंदूकें, सलीका, कपडे पहनने के तौर तरीके, शिक्षा क्रांति, पुल और भवन निर्माण कला आदि

 

#तमाम_दुनिया_मुसलमानो_की_कर्जदार_है

अगर मुसलमान न होते, तो इन सब बेहद ज़रूरी चीज़ों से महरूम रहती दुनिया, ज़िन्दगी ज़िन्दगी न रहती

सोशल मीडिया पर इन दिनों मुस्लिम धर्म से जुड़ी एक पोस्ट वायरल हो रही है। इसमें बताया गया है कि अगर इस दुनिया में मुसलमान नहीं होते तो कैसा होता। इसके लिए एक लंबी पोस्ट लिखी गई है। दरअसल, यह पोस्ट उन लोगों के लिए लिखी गई है जो कोई भी आतंकी हमला होने पर मुस्लिम लोगों को शक की निगाहों से देखना शुरू कर देते हैं।

ऐसी कई घटनाएं हैं जिनमें नेताओं और आम लोगों को मुस्लिम के खिलाफ नकारात्मक रवैया जाहिर करते हुए देखा गया है। अमेरिका में राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ रहे रिपब्लिकन कैंडिडेट डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी रैलियों में कई बार मुसलमानों को ‘खतरा’ बताया है। अपने भाषणों में उन्होंने अमेरिका में मुसलमानों के घुसने पर बैन लगाने की वकालत भी की है।

वहीं, 2015 में हुए पैरिस अटैक के बाद वहां रह रहे मुसलमानों पर सवाल उठे। आतंकी संगठन आईएस के हर हमले के बाद मुस्लिम विरोधी संगठन उभर आते हैं। हालांकि, इसको रोकने के लिए कई लोग आगे आए। उनमें से एक न्यू यार्क यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और राजनीतिक चिंतक इएन ब्रीमर भी थे। उन्होंने बताया था कि आईस में शामिल आतंकियों में मुसलमानों की संख्या कुल 0.00625 प्रतिशत है।

टम्बलर एक फेसबुक जैसी ही सोशल साईट है, उस पर एक यूज़र ने यह फोटो लगाकर सवाल किया की “मुसलमानों के बिना दुनिया की कल्पना कीजिये” उसने इस तस्वीर के जरिये दर्शाया की ट्विन्स टावर सही सलामत रहता ! मुस्लिम विरोधी लोगों ने लिए लिखे गए इस ब्लॉग में ब्लॉगर ने शुरुआत एक ताना मारने के साथ की है। वह लिखता है, ‘चलिए देखते हैं कि मुसलमानों के बिना दुनिया कैसी होगी।’ इसके बाद ब्लॉगर कई सारी चीजों का नाम लिख देता है।

 

इसमें कॉफी, शैंपू, चेस, इत्र, पैन, कालीन, यूनिवर्सिटी, अल्जेब्रा, टूथब्रश और हॉस्पिल जैसी कई चीजों का नाम लिखा हुआ है। ब्लॉगर के मुताबिक, उन सभी चीजों का अविष्कार मुसलमानों ने किया था। उदाहरण के लिए सबसे पहले हॉस्पिटल के रूप में हम लोग Ahmad ibn Tulun Hospital को जानते हैं। उसका अविष्कार 872 में मुसलमानों ने किया था।

इसके अलावा किन चीजों का जिक्र है देखिए- . उसके बदले में जो रिस्पोंस मिला वो यह लिस्ट थी जिसे मुस्लिमो या इस्लामिक वर्ल्ड के द्वारा बनाया गया या विकसित किया था – (मतलब की “अगर दुनिया में मुस्लिम ना होते तो क्या क्या ना होता” ?)

अलगोरिदम (आप आज जिस कंप्यूटर पर मजे से टाइपिंग कर रहे हैं, बिना अल्गोरिदम के इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी) कॉफ़ी कैमरा (पहला ऑप्टिक कैमरा – इब्न अल हैतम) प्रायोगिक भौतिकी शतरंज (चेस) साबुन परफ्यूम/स्पिरिट सिंचाई ताले सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट्स एनेस्थीसिया विंड मिल (पवन चक्की ) काऊपॉक्स (छोटी माता) का इलाज फाउंटेन पेन अलजेब्रा/त्रिग्नोमेट्री 3 समय के खाने का नियम क्रिस्टल ग्लास कारपेट (कालीन) बैंकिंग का चेक सिस्टम पहला डिग्री देने वाला स्कूल (यूनिवर्सिटी) संगीत के नोट्स टूथब्रश हॉस्पिटल सॉफ्ट ड्रिंक लिपस्टिक/आई लाइनर प्लास्टिक सर्जरी कैलीग्राफी पेपर और कपड़ा पैराशूट एक्सपेरीमेंटल फीजिक्स शैंपू परफ्यूम/इत्र सिंचाई क्रैंक-शाफ्ट, आंतरिक दहन इंजन, वॉल्वस, पिस्टंस कॉम्बिनेशन ताले आर्किटेक्चरल इनोवेशन (यूरोपियन गोथिक कैथेड्रल्स ने इस टेक्नीक को अपना लिया क्योंकि इससे बिल्डिंग ज्यादा मजबूत बन गई,

खिड़कियां बनने लगीं, गुबंद वाली बिल्डिंग्स और राउंड टावर्स आदि बनने लगे) सर्जिकल यंत्र एनेस्थेसिया विंडमिल ट्रीटमेंट ऑफ काउपॉक्स फाउंटेन पेन गिनती प्रणाली अल्जेबरा/ट्रिग्नोमेट्री आधुनिक क्रिप्टोलॉजी तीन नियमित भोजन (सूप, मांस/मछली, फल/नट्स) क्रिस्टल ग्लास कारपेट चेक बगीचे का आयुर्वेद और किचेन के बजाय खूबसूरती और मेडिटेशन के तौर पर प्रयोग यूनवर्सिटी ऑप्टिक्स म्यूजिक हॉस्पिटल्स नहाना रजाई ओढ़ना समुद्र यात्रियों का कंपास सॉफ्ट ड्रिंक पेंडुलम ब्रेल कॉस्मेटिक्स प्लास्टिक सर्जरी हस्तलिपि पेपर और कपड़े की मैन्युफैक्चरिंग अगर दुनिया में मुसलमान ना होते यह सब ना होते !

(तो सोचिये फिर आप क्या करते ? ) ये मुस्लिम ही थे जिन्होंने बताया कि रोशनी हमारी आंखों में प्रवेश करती है, जबकि ग्रीक लोगों का मानना था कि हमारी आंखें रोशनी निकालती हैं, और इस खोज से कैमरे का आविष्कार हुआ. सबसे पहले 852 में उड़ने की कोशिश एक मुस्लिम ने ही की थी, भले ही इसका श्रेय राइट ब्रदर्स ने लिया. जीबर इब्न हय्यान नामक मुस्लिम को आधुनिक केमस्ट्री का पिता माना जाता है.

उन्होंने एल्केमी को केमिस्ट्री में परिवर्तित किया. उन्होंने डिस्टलेश, प्यूरीफिकेशन, ऑक्सीडेशन, वाष्पीकरण और फिल्टरेशन का आविष्कार किया. साथ ही उन्होंने सल्फरिक और निट्रिक एसिड की भी खोज की. अल-जाज़ारी नामक मुस्लिम को रोबोटिक्स के पिता के तौर पर जाना जाता है. हेनरी पांचवें के किले का आर्किटेक्ट एक मुस्लिम ही था. आंखों से मोतियाबिंद को खत्म करने के लिए खोखली सुइयों का आविष्कार एक मुस्लिम ने ही किया था, एक ऐसी तकनीक जिसे आज भी प्रयोग किया जाता है.

काउपॉक्स के इलाज का टीक एक मुस्लिम ने खोजा था न कि जेनर और पॉस्टर ने. पश्चिम ने इसे तुर्की से अपना लिया. ये मुस्लिम ही थे जिन्होंने अल्जेबरा और ट्रिगनोमेट्री में काफी योगदान दिया, जिसे 300 साल बाद फिबोननैकी और बाकियों से यूरोप ले जाया गया. गैलीलियों से 500 साल पहले ये मुस्लिम ही थे जिन्होंने ये खोज लिया था कि धरती गोल है. लिस्ट और भी है….

मुस्लिमों के बिना दुनिया की कल्पना करिए. मेरा ख्याल है कि आपका मतलब था कि बिना आतंकियों के दुनिया की कल्पना करो. और तब मैं आपसे सहमत होऊंगा, दुनिया उन घटिया लोगों के बिना एक बेहतर जगह होगी. लेकिन कुछ लोगों के कृत्य के लिए पूरे समूह को जिम्मेदार ठहराना अज्ञानता और रेसिस्ट है. क्या कोई भी ईसाई या गोरे लोगों को टिमोथी मैक्वेग (ओक्लाहोमा बम हमला ) या आंद्रेज ब्रेविक (नार्वे किलिंग), या उस गनमैन जिसने क्रांगेस की महिला सदस्य गिफोर्ड के सिर में गोली मारी और 6 लोगों को मारा और 12 को घायल कर दिया जैसों की कृत्य का जिम्मेदार ठगराएगा.

इसलिए क्योंकि उनका इन घटनाओं से कोई लेनादेना नहीं था! इसी तरह 1.5 अरब मुसलमानों का इस घटना से कोई लेनादेना नहीं है!

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