इतिहास

29 अगस्त का इतिहास : 29 अगस्त 1976 को प्रसिद्ध बांग्ला कवि, संगीत सम्राट, संगीतज्ञ, दार्शनिक काज़ी नज़रुल इस्लाम का निधन हुआ!

29 अगस्त की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ
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1612 – सूरत की लड़ाई में अंग्रेजों ने पुर्तग़ालियों को हराया,
1833 – ब्रिटिश दास उन्मूलन अधिनियम ने कानून का रूप लिया।
1842 -ग्रेट ब्रिटेन और चीन ने नानकिंग की संधि पर हस्ताक्षर किये।
अफ़ीम युद्ध समाप्त।
1914 – न्यूजीलैंड सैनिकों ने जर्मन समोआ पर कब्जा किया।
1916 – अमेरिकी कांग्रेस ने जोन्स अधिनियम को स्वीकृति प्रदान की: फिलीपींस को मिली स्वतंंत्रता।
1932 – नीदरलैंड की राजधानी एम्स्टर्डम में अंतर्राष्ट्रीय युद्ध-विरोधी समिति का गठन।
1941 – रूस में जर्मन इंस्तजकमांडो ने 1469 यहूदी बच्चों की हत्या की।
1945 – ब्रिटिश ने हांगकांग को जापान से मुक्त कराया।
1957 – कांग्रेस ने नागरिक अधिकार अधिनियम, 1957 पारित किया।
1974 – चौधरी चरण सिंह की अध्यक्षता में लोकदल पार्टी स्थापना।
1987 – कर्नल राबुका ने फिजी को गणराज्य घोषित किया।
1996 – आर्कटिक द्वीप के स्पिट्सबर्गेन की पहाड़ी में वनुकोवो एयरलाइंस के दुर्घटनाग्रस्त होने से उसमें सवार सभी 141 लोगों की मौत।
1998 – पूर्व भारतीय क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित।
1999 – बांग्लादेश मुक्ति संघर्ष के दौरान टाइगर सिद्दीकी के नाम से मशहूर सांसद कादिर सिद्दीकी ने संसद की सदस्यता से इस्तीफ़ा दिया।
2000 – न्यूयार्क में चार दिवसीय विश्व शांति शिखर सम्मेलन शुरू।
2001 – पश्चिम एशिया में पुन: हिंसा भड़की, तीन फ़िलिस्तीनी मरे; जापान के ‘एच-2 ए’ रॉकेट का सफल प्रक्षेपण।
2002 – पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ़ का नामांकन पत्र स्वीकार किया।
2003 -कोलंबिया अंतरिक्ष यान हादसे के लिए नासा की त्रुटिपूर्ण कार्य-संस्कृति को ज़िम्मेदार ठहराया गया।
इराक के पवित्र शहर नजफ़ में हुए एक आत्मघाती हमले में शिया नेता सहित 75 लोग मारे गये।
2004 – एथेंस ओलम्पिक का समापन।
2008-तृणमूल कांग्रस के कार्यकर्ताओं के बवाल से क्षुब्ध होकर टाटा मोटर्स ने सिंगुर में नैनों परियोजना स्थल से अपने कर्मचारी हटाए।
झारखण्ड के नवनियुक्त मुख्यमंत्री शिबु सोरेन ने विधानसभा में अपना बहुमत साबित किया।
2012 – चीन में सिचुआन प्रांत के शियाओजियावान कोयला खदान में हुए विस्फोट से कम से कम 26 चीनी श्रमिकों की मौत हो गयी जबकि 21 लापता हो गये।

29 अगस्त को जन्मे व्यक्ति
1980 – माधव श्रीहरि अणे – भारत की आज़ादी के लिए संघर्ष करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों में से एक।
1969 – मेजर मनोज तलवार – भारतीय सेना के जाबांज सैनिकों में से एक थे।
1949 – के. राधाकृष्णन – भारत के शीर्ष वैज्ञानिकों में से एक।
1925 – गोलप बोर्बोरा – भारतीय राज्य असम के छठे मुख्यमंत्री थे।
1905 – मेजर ध्यानचंद- भारत के ख्याति प्राप्त हॉकी खिलाड़ी।
1887 – जीवराज मेहता – भारत के एक प्रमुख चिकित्सक और देश सेवक।


29 अगस्त को हुए निधन
2007 – बनारसी दास गुप्ता – हरियाणा के भूतपूर्व मुख्यमंत्री तथा स्वतंत्रता सेनानी।
1976 – काज़ी नज़रुल इस्लाम – प्रसिद्ध बांग्ला कवि, संगीत सम्राट, संगीतज्ञ और दार्शनिक थे।
1956 – मलिक ग़ुलाम मोहम्मद – पाकिस्तान के तीसरे गवर्नर-जनरल थे।
1952 – सिस्टर यूप्रासिआ – भारतीय ईसाई महिला संत।
1931 – जदोनांग एक युवा रोगमई नेता जिसने शक्तिशाली नागा आन्दोलन का गठन किया।

29 अगस्त के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव
राष्ट्रीय खेल दिवस (मेजर ध्यानचंद का जन्म दिवस)
परमाणु परीक्षण विरोधी अंतरराष्ट्रीय दिवस

29 अगस्त 1541 को तुर्की के उस्मानी शासन ने हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट पर क़ब्ज़ा कर लिया।

29 अगस्त 1831 को माइकल फ़ैराडे ने इलैक्ट्रोमैग्नेटिक इंडक्शन की खोज की।

29 अगस्त 1943 को जर्मनी ने डेनमार्क पर क़ब्ज़ा कर लिया।

29 अगस्त 1966 को मिस्र के प्रसिद्ध विद्वान सैय्यद क़ुतुब को तत्कालीन राष्ट्रपति जमाल अब्दुल नासिर की हत्या की साज़िश रचने के आरोप में फांसी दे दी गई।

29 अगस्त 2003 को इराक़ के धर्मगुरु आयतुल्लाह सैय्यद मोहम्मद बाक़िर अल-हकीम को नजफ़ में हज़रत अली (अ) के रौज़े के निकट एक आतंकवादी बम धमाके में उस समय शहीद कर दिया गया, जब वे नमाज़ के बाद रौज़े से निकल रहे थे, उनके साथ 100 अन्य नमाज़ी भी इस हमले में शहीद हो गए।

29 अगस्त सन 1949 ईसवी को सोवियत संघ ने अपने पहले परमाणु बम का गुप्त परीक्षण किया।

इस प्रकार परमाणु हथियारों के मैदान में अमरीका के साथ एक अन्य देश ने प्रवेश किया और दोनो देशों के मध्य शक्ति संतुलन स्थापित हुआ। इसके बाद अमरीका और रुस के मध्य शीत युद्ध आरंभ हुआ जो सोवियत संघ के विघटन तक जारी रहा।

29 अगस्त, सन् 1947 को मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अंतर्गत भारत में शिक्षा को समर्पित ‘शिक्षा विभाग’ को पुर्नस्थापित किया गया। हालांकि इस विभाग के नाम में उसकी कार्यप्रणाली और जिम्मेदारियों में स्वतंत्रता के बाद भी समय-समय पर कई बदलाव किए जाते रहे हैं। वर्तमान समय में मंत्रालय के पास शिक्षा के दो विभाग हैं:

1- उच्च शिक्षा विभाग

2-स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग

भारत की केंद्र सरकार ने अपनी अगुवाई में शैक्षिक नीतियॉं एवं कार्यक्रम बनाने और उनके क्रियान्‍वयन पर नज़र रखने के कार्य को जारी रखा है। इन नीतियों में सन् 1986 की राष्‍ट्रीय एजुकेशन पालेसी (एनपीई) तथा कार्यक्रम (पीओए) शामिल है।

29 अगस्त सन 1976 को प्रसिद्ध एवं लोकप्रिय बांग्ला कवि नज़रूल इस्लाम का देहांत हुआ। क़ाज़ी नज़रूल इस्लाम बांग्ला के प्रतिरोधक एवं साहसी कवि थे। रबीन्द्रनाथ टैगोर ने कवि नज़रूल इस्लाम की प्रतिभा का उच्च मूल्यांकन किया था और उनकी वीरता की प्रशंसा करते हुए अंग्रेज़ सरकार द्वारा नज़रूल इस्लाम को पीछा करने का कड़ा विरोध किया था। नज़रूल इसलाम की रचनाओं का विश्व की अनेक भाषाओं में अनुवाद हुआ। कोलकाता के छोरवर्ती इलाके में उनका निवास स्थान था। नज़रूल इस्लाम की रचनाओं ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा दी और क्रांतिकारियों में जोश भर दिया। अंग्रेज़ सरकार ने उनकी कई कविताओं पर प्रतिबंध लगा दिया था। वे एक महान कवि होने के साथ साथ एक दक्ष संगीतकार भी थे।

उनके द्वारा बनाए गये सुरों को नज़रूल गीती कहा जाता है। आज भी बांग्ला भाषा के वे सबसे लोकप्रिय व महान कवि हैं जिनकी कविताओं ने जन समुदाय के हृदय को स्पर्ष किया।

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7 शहरीवर वर्ष 1369 हिजरी शमसी को ईरान और दुनिया के शिया मुसलमानों के वरिष्ठ धर्मगुरू आयतुल्लाहिल उज़माः सैयद शहाबुद्दीन मरअशी नजफ़ी का 96 वर्ष की आयु में क़ुम नगर में निधन हुआ। उन्हें उनकी वसीयत के अनुसार इस नगर में उनके भव्य पुस्तकालय में दफ़्न किया गया। आयतुल्लाह मरअशी नजफ़ी ने काज़ेमैन और नजफ़ जैसे इराक़ी नगरों में धर्मशास्त्र, हदीस, तफ़सीर और तैतिक शास्त्र जैसे इस्लामी वज्ञान विभिन्न धर्मगरुओं से प्राप्त किए और फिर ईरान के क़ुम नगर में शिक्षा दीक्षा में व्यस्त हो गए। वे शिक्षा दीक्षा के साथ ही ईरान की अत्याचारी शाही सरकार के विरुद्ध जनता और धर्मगुरुओं के संघर्ष में भी शामिल रहे। आयतुल्लाह मरअशी नजफ़ी ने हमेशा इमाम ख़ुमैनी का साथ दिया। उन्होंने विभिन्न इस्लामी ज्ञानों में अनेक किताबें लिखी हैं। उनकी सबसे बड़ी यादगार, उनकी भव्य लाइब्रेरी है जो क़ुम नगर में स्थित है। इस पुस्तकालय में दसियों लाख किताबें मौजूद हैं जिनमें तीन लाख से अधिक हस्त लिखित हैं।

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27 ज़िलहिज्जा सन 691 हिजरी क़मरी को फ़ार्सी के विश्व विख्यात कवि साहित्यकार और विद्वान शैख़ मुसलेहुद्दीन सादी शीराज़ी का निधन हुआ। उन्होंने अपनी मातृभूमि शीराज़ में आरंभिक शिक्षा की प्राप्ति के बाद उच्चस्तरीय शिक्षा के लिए इराक़ के बग़दाद नगर का रुख़ किया। उन्होंने अपनी शिक्षा और ज्ञान को अंतिम चरण तक पहुँचाने के लिए विश्व के अनेक देशों विशेष रुप से इस्लामी देशों की यात्रा की। इन यात्राओं के दौरान शैख़ सादी ने विभिन्न समाजों और उनके रीति रिवाजों इसी प्रकार विभिन्न ऐतिहासिक धार्मिक एवं सामाजिक स्थलों के दर्शन किया। यात्रा पूरी करने के बाद उन्होंने अंत्यंत मूहत्वपूर्ण व लाभदायक पुस्तकें लिखीं।

उनकी पुस्तकों में गुलिस्तान और बूस्तान नामक पुस्तकें बहुत विख्यात हैं।

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