इतिहास

7 अगस्त का इतिहास : 7 अगस्त 1702 को मुग़ल वंश के 14वें बादशाह मुहम्मदशाह रौशन अख़्तर का जन्म हुआ

ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार 7 अगस्त वर्ष का 219 वाँ (लीप वर्ष में यह 220 वाँ) दिन है। साल में अभी और 146 दिन शेष हैं।

7 अगस्त की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ
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1880 – उचित वक्ता पण्डित दुर्गाप्रसाद मिश्र द्वारा प्रकाशित होने वाला समाचार पत्र था।
1996 – अमेरिकी वैज्ञानिकों द्वारा 13 हज़ार वर्ष पूर्व पृथ्वी पर गिरे उल्का पिंड के अवशेषों से मंगल ग्रह पर एक कोशिका वाले जीवों के होने की संभावना का पता चला।
1998 – केन्या एवं तंजानिया की राजधानियों में स्थित अमेरिकी दूतावासों पर आतंकवादी हमले में 200 से अधिक लोगों की मृत्यु।
1999 – पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ़ ने एक बार फिर भारत से वार्ता की पेशकश की।
2000 – रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन द्वारा एक क़ानून पर हस्ताक्षर कर अपनी शक्ति का विस्तार।
2003 – बगदाद में जार्डन दूतावास के बाहर हुए कार बम विस्फोट में 12 लोगों की मृत्यु।
2005 – इस्रायल के वित्तमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने पद से इस्तीफ़ा दिया।
2008 – सार्वजनिक क्षेत्र के देना बैंक ने अपनी प्रथान ब्याज दरें 0.75% बढ़ाकर 14.25% करने की घोषणा की। सार्वजनिक क्षेत्र के कार्पोरेशन बैंक ने अपनी बेंचमार्क ब्याज दर में 0.50% बढ़ोतरी किए जाने की घोषणा की।

7 अगस्त को जन्मे व्यक्ति
1871 – अवनीन्द्रनाथ ठाकुर, प्रख्यात कलाकार तथा साहित्यकार।
1904 – वासुदेव शरण अग्रवाल- भारत के प्रसिद्ध विद्वान।
1925 – एम. एस. स्वामीनाथन – प्रसिद्ध भारतीय कृषि वैज्ञानिक तथा ‘हरित क्रांति’ के अगुआ।
1702 – मुहम्मदशाह रौशन अख़्तर – मुग़ल वंश का 14वाँ बादशाह था।

7 अगस्त को हुए निधन
2018 – एम. करुणानिधि – भारतीय राजनेता और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री थे।
2009 – गुलशन बावरा – हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध गीतकार थे।
1941 – रबीन्द्रनाथ टैगोर, भारतीय लेखक, नोबेल पुरस्कार विजेता।
1976 – पी. सी. अदिचन – चौथी लोकसभा के सदस्य
1974 – वर्जीनिया एपगर – अमेरिकी प्रसूति एनेस्थेटिस्ट थीं।

7 अगस्त के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव
विश्व स्तनपान दिवस (सप्ताह)

7 अगस्त सन 1304 ईसवी को इटली के शायर और लेखक फ़्रैन्सिसको पेटर्क का जन्म हुआ।

वे इटली में कला एवं साहित्य के पुनर्जागरण आंदोलन के अगुवाओं में थे। उन्होंने सादा शब्दों में अपने शेरों से बहुत ख्याति प्राप्त की। 1374 ईसवी में पेटर्क का निधन हुआ।

7 अगस्त सन 1938 ईसवी को रूस के लेखक थिएटर ड्रामों के निदेशक इस्टानिस्ला विस्की का निधन हुआ। वे 1863 ईसवी में पैदा हुए। इस रूसी कलाकार ने दो और कलाकारों के साथ मिलकर 1888 में साहित्य कला समिति बनाई। उन्होंने विश्व के प्रसिद्ध उपन्यासकारों की रचनाओं को बड़े ही हल्के फुल्के अंदाज़ में ड्रामे का रुप देकर प्रद्रशित किया।

7 अगस्त सन् 1668 में प्रसिद्ध न्यूटन ने ट्रिनीटी कॉलेज कैंब्रिज से मास्टर डिग्री हासिल किया।
7 अगस्त सन् 1905 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने ब्रिटिश वस्तुओं का बहिष्कार किया।
7 अगस्त सन् 1944 में 51 फीट लंबाई, 8 फीट ऊंचाई और पांच टन के वज़न वाले पहले इलेक्ट्रॉनिक कैलकुलेटर का निर्माण हुआ।
7 अगस्त सन् 1990 में अमेरिका ने सऊदी अरब में सेना तैनात कर ऑपरेशन डेज़र्ट शील्ड की शुरूआत की।

7 अगस्त सन् 1996 को अमेरिकी वैज्ञानिकों द्वारा 13 हज़ार वर्ष पूर्व पृथ्वी पर गिरे उल्का पिंड के अवशेषों से मंगल ग्रह पर एक कोशिका वाले जीवों के होने की संभावना का पता चला।


Stanislavski_Constantin
7 अगस्त सन 1941 ईसवी को भारत के प्रसिद्ध लेखक शायर और दार्शनिक रविंद्र नाथ टैगोर का निधन हुआ। वे 1861 ईसवी में कोलकत्ता में पैदा हुए। टैगोर ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका के साथ ही लेखन और शायरी भी जारी रखी। उनकी रचनाओं में धार्मिक और दार्शनिक विचारों को मिला जुलाकर पेश किया गया है। 1913 में उन्हें साहित्य के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनकी बहुत से पुस्तकों का अंग्रेज़ी में अनुवाद किया गया है। उन्होंने ही भारत का राष्ट्रीय गान लिखा है।


Rabindranath_Tagore
7 अगस्त सन 1960 ईसवी को अफ़्रीक़ा महाद्वीप के देश आइवरी कोस्ट को फ़्रांस के अधिकार से स्वतंत्रता मिली। 16वीं शताब्दी में इस देश पर पुर्तगाल ने अधिकार किया किंतु 1891 में ईसवी में फ़्रांस ने इस देश को अपना उपनिवेश बना लिया अंतत: 1960 में इस देश को स्वतंत्रता मिली। इस देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था है।

आइवरी कोस्ट का क्षेत्रफल तीन लाख 32 हज़ार 463 वर्ग किलोमीटर है यह अफ़्रीक़ा महाद्वीप के पश्चिमी भाग में एटलांटिक महासागर के तट पर स्थित है।

7 अगस्त सन 1982 ईसवी को अमरीका लेबनान और फ़िलिस्तीन के स्वतंत्रता संगठन के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर हुए। यह समझौता लेबनान की राजधानी बैरुत में हुआ। जिसमें उक्त संगठन के सैनिकों को बैरुत से बाहर निकलने की बात कही गयी थी।

1982 में ज़ायोनी शासन द्वारा लेबनान पर व्यापक आक्रमण के बाद जो लेबनान में रह रहे फ़िलिस्तीनी संघर्षकर्ताओं को बाहर निकालने के उददेश्य से हुआ था, यह समझौता किया गया। ज़ायोनी शासन की सेना ने इस आक्रमण में अत्याधुनिक हथियारों का प्रयोग किया। इसके बावजूद लेबनानी और फ़िलिस्तीनी सैनिकों ने 80 दिनों तक प्रतिरोध जारी रखा। अंतत: पी एल ओ के अध्यक्ष यासिर अरफ़ात लेबनान से 12 हज़ार फ़िलिस्तीनी संघर्षकर्ताओं को निकालने और उन्हें आठ विभिन्न देशों में भेजने पर सहमत हुए। हालॉकि इन सैनिकों का लेबनान से बाहर निकलना पी एल ओ के लिए एक बड़ा आघात था और इसी से तेल अबीब के सामने पी एल ओ के झुकने की भूमिका प्रशस्त हुई किंतु इससे पहले ज़ायोनी शासन को भी फ़िलिस्तीनी और लेबनानी संघर्षकर्ताओं ने ज़ोरदार टक्कर दी और इस अवैध शासन को भारी हानि उठानी पड़ी और वर्ष 2000 में इसे दक्षिणी लेबनान से बाहर निकलना पड़ा।

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5 ज़िल्हिज्जा सन 1361 हिजरी क़मरी को विख्यात मुसलमान दार्शनिक व धर्मगुरु मोहम्मद हुसैन कम्पानी का इराक़ के नजफ़ नगर में निधन हुआ।

दर्शनशास्त्र, तत्वदर्शिता, इतिहास भूगोल, शायरी और साहित्य का उनहें व्यपाक ज्ञान था। इसी प्रकार उनकी चिंतन शक्ति की भी उन्हें श्रेष्ठतम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका थी। अल्लामा कम्पनी की लिखी हुई कई पुस्तकें अब भी सुरक्षित हैं जिनसे लोग लाभान्वित हो रहे हैं। इनमें फ़ल्सफ़ा व हिकमत, इजतेहाद व तक़लीद, आदि का नाम लिया जा सकता है। इसी प्रकार उनका एक पद्य संकलन भी सुरक्षित है।

मुहम्मदशाह रौशन अख़्तर
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पूरा नाम अबु अल-फतह रोशन अख्तर नसीरुद्दीन मुहम्मद शाह
जन्म – 7 अगस्त, 1702
जन्म भूमि – फ़तेहपुर
मृत्यु तिथि – 26 अप्रॅल, 1748
मृत्यु स्थान- दिल्ली
पिता/माता पिता- जहानशाह, माता- क़ुदसिया बेगम
धार्मिक मान्यता – इस्लाम
पूर्वाधिकारी – मुहम्मद इब्राहीम
राजघराना – तैमूरी
वंश – मुग़ल वंश

अन्य जानकारी बादशाह मुहम्मदशाह के शासन काल में सैय्यद बन्धुओं का पूरी तरह से अन्त हो गया था।
मुहम्मदशाह रौशन अख़्तर (अंग्रेज़ी: Muhammad Shah Roshan Akhtar, जन्म- 7 अगस्त, 1702, फ़तेहपुर; मृत्यु- 26 अप्रॅल, 1748, दिल्ली) मुग़ल वंश का 14वाँ बादशाह था। उसने लम्बे समय 1719 से 1748 ई. तक मुग़ल साम्राज्य पर शासन किया। रफ़ीउद्दौला की मृत्यु के बाद सैय्यद बन्धुओं ने उसको गद्दी पर बैठाया था। वह जहानशाह का चौथा बेटा था।

मुहम्मदशाह के शासन काल में बंगाल, बिहार तथा उड़ीसा में मुर्शिद कुली ख़ाँ, अवध में सआदत ख़ाँ तथा दक्कन में निजामुलमुल्क ने अपनी स्वतंत्र सत्ता स्थापित कर लीं। इसके अतिरिक्त इसके काल में गंगा तथा दोआब क्षेत्र में रोहिला सरदारों ने भी अपनी स्वतंत्र सत्ता स्थापित कर ली थी।
मुहम्मदशाह अयोग्य शासक था। वह अपना अधिकांश समय पशुओं की लड़ाई देखने तथा वेश्याओं और मदिरा के बीच गुजारता था। इसी कारण उसे ‘रंगीला’ के उपनाम से भी जाना जाता था।

दरबार में सैय्यद बन्धुओं के बढ़ते हुए प्रभुत्व के कारण एक रोष उत्पन्न हुआ तथा उन्हें समाप्त करने का षडयंत्र किया गया। इस षडयंत्र में ईरानी दल का नेता मुहम्मद अमीन ख़ाँ, मुहम्मदशाह तथा राजमाता कुदसिया बेगम शामिल थीं।
8 अक्टूबर, 1720 को हैदर बेग़ ने छुरा घोपकर हुसैन अली की हत्या कर दी।
अपने भाई का बदला लेने के लिए अब्दुल्ला ख़ाँ ने विशाल सेना लेकर मुहम्मदशाह के विरुद्ध चढ़ाई कर दी।
13 नवम्बर, 1720 को हसनपुर के स्थान पर अब्दुल्ला ख़ाँ हार गया, उसे बन्दी बना लिया गया और विष देकर मार डाला गया। इस प्रकार मुहम्मदशाह के शासनकाल में सैय्यद बन्धुओं का पूरी तरह से अन्त हो गया।
फ़ारस के शासक नादिरशाह ने 1739 में मुहम्मदशाह के समय में ही दिल्ली पर आक्रमण किया था।
बाजीराव प्रथम के नेतृत्व में 500 घुड़सवार लेकर मार्च, 1737 ई. में उसने दिल्ली पर चढ़ाई की, परन्तु सम्राट ने इसका कोई विरोध नहीं किया।

 

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