इतिहास

#HeroOfNation : संविधान सभा के सदस्य ”मौलाना स्योहारवी”

? 2 अगस्त 1962 ई०

#HeroOfNation
#RealFreedomFighter

बिजनौर की धरती पर जन्मी इस महान विभूति को बार-बार सलाम

आजादी के बाद के भारत में मौलाना स्योहारवी ने भारत में मुसलमानों के लिए एक रोड मैप बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी संविधान सभा के सदस्य के रूप में उन्होंने भारत के संविधान में मुसलमानों के लिए एक उचित स्थान का दावा करने में अपनी भूमिका निभा कर देश को एक धर्मनिरपेक्ष बना दिया और इस तरह देश में मुस्लिम समुदाय को एक सम्मानजनक दर्जा दिलाया

मौलाना हिफ्जुर्रहमान स्योहारवी का जन्म 10 जनवरी सन 1901 को जिला बिजनौर के कस्बा स्योहारा में मौलवी शम्सुद्दीन के घराने में हुआ था सुभाष चन्द्र बोस के द्वारा कलकत्ता में चलाए जा रहे कांग्रेस के क्षेत्रों में मास कांट्रेक्ट अभियान में भी हिफ्जुर्रहमान साहब ने सरगर्मी के साथ भाग लिया।

खिलाफत तहरीक में भी हिफ्जुर्रहमान की भूमिका सक्रिय रही इसी तहरीक की राह में वह कांग्रेस में दाखिल हुए गांधी जी के द्वारा चलाए गए सभी अभियान और आंदोलन में पुरजोश हिस्सा लिया था मौलाना हिफ्जुर्रहमान स्योहारवी कांग्रेस की ओर से मई 1949 में हापुड़-खुर्जा सीट पर निर्विरोध यू.पी. एसेम्बली के सदस्य बने।

जुलाई 1949 में रिजवान उल्ला की खाली की गई सीट पर विधान परिषद के सदस्य और 14 जनवरी 1950 को निर्विरोध पार्लियामेंट के सदस्य मनोनीत हुए स्वतंत्रता के बाद कांग्रेस के टिकट पर ही जनवरी 1952 में बरेली मुरादाबाद 1957 व 1962 में अमरोहा क्षेत्र से लोकसभा सदस्य के चुनाव जीते।

मौलाना हिफज़ुर्रहमान स्योहारवी पिछले कई दशकों से एशियाई उपमहाद्वीप के धार्मिक-राजनीतिक क्षितिज पर एक प्रमुख नाम था वह एक बहुयामी व्यक्तित्व के धनी थे जो मुख्य रूप से पिछली शताब्दी के भाग में

मौलाना न केवल एक स्वतंत्रता सेनानी थे बल्कि एक इस्लामिक विद्वान, एक इतिहासकार, एक प्रखर लेखक और भारत के भीतर और साथ ही पाकिस्तान में सम्मान का सम्मान करने वाले धार्मिक और राजनीतिक नेता थे। उन्होंने एक चौथाई शताब्दी 1922-1947 तक ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ी और आठ साल जेल में बिताए।

आखिरकार 2 अगस्त 1962 की सुबह साढे़ तीन बजे के करीब मौलाना हिफ्जुर्रहमान जिन्होने देश में तमाम मोर्चे जीते थे। मौत के फरिश्ते के हाथों जिन्दगी का मोर्चा हार गए और उन्हें लगभग दो लाख इंसानों के बेहाल व अश्कबार हजूम ने कब्रिस्तान पहुंचाया मौलाना साहब को खिराजे अकीदत पेश करते हैं।

प्रस्तुति———-तैय्यब अली

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