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Video : घातक हथियार से मनुष्य के हौसले को दबाने का भ्रम पालने वाले दुनिया के सबसे बड़े मुर्ख हैं ?

vaia – Vishwesh Rajratnam
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घातक हथियार से मनुष्य के हौसले को दबाने का भ्रम पालने वाले शायद दुनिया के सबसे बड़े आत्ममुग्ध मुर्ख ही हैं ?

यह फिलिस्तीन है, पर यह जो सबक दे रहा है वह दुनिया के उन सभी हुक्मरानों के लिए है जो सोचते हैं कि हथियारों और फौज़ी गाड़ियों और जेलों और गोलियों के खौफ़ से जनता भेड़ बन जाती है, और अपनी गुलामी को अपनी किस्मत मान लेती है !

दुनिया के सभी जालिम शासको, पूँजी के तमाम ताबेदारो ! अगर बच्चे मौत से डरना बंद कर दें, अगर निहत्थी औरतें और लाचार बूढ़े हथियारबंद फौजियों की आँखों में आँखें डालकर सीना तानकर उनके सामने खड़े हो जाएँ, अगर आँसू गैस के गोले और गोलियाँ बरसाते हथियारबंद दस्तों पर छोटे-छोटे बच्चे पत्थर बरसाने लगें; तो डरने की पारी तुम्हारी है I डरो कि तुम्हारी ताकतवर हुकूमत का मिट्टी में मिल जाना तय हो चुका है, तुम्हारी शिकस्त होनी ही है, और वह दिन बहुत दूर भी नहीं है ! डरो, मौत का काला साया तुम्हारे पीछे सरकता आ रहा है I

तुम हर परिवार के पीछे सेना के तीन जवान खड़े कर दो, हजारों को मारकर लाशें ग़ायब कर दो, हज़ारों को जेलों में ठूँस दो, पर खौफ़ की परछाइयाँ तुम्हारा पीछा नहीं छोड़ेंगी ! जब लोग डरना बंद कर दें, तब डरने की बारी तुम्हारी होती है ! जब लोग तुम्हारी फ़ौजी परेडों, बख्तरबंद गाड़ियों और टैंकों को देखकर डरने की जगह नफ़रत से सड़क पर थूक दें तो डरने की बारी तुम्हारी होती है I मत भूलो इतिहास का यह सबक कि हथियारों का बड़ा से बड़ा जखीरा अवाम के गुस्से के समंदर में डूब जाता है ! मत भूलो कि हथियारों के बूते दुनिया में कहीं भी, कभी भी लोगों को हमेशा के लिए दबाया नहीं जा सका है ! यह बात फिलिस्तीन पर ही नहीं, पूरी दुनिया पर लागू होती है, छत्तीसगढ़, नगालैंड, मणिपुर,मिजोरम, कश्मीर पर भी लागू होती है, यूँ कहें कि पूरे भारत पर भी लागू होती है !

– Kavita Krishnapallavi

 

 

NDTVKhabar.com
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अमरीका के मंटगुमरी शहर में म्यूज़ियम एंड मेमोरियल बना है. इसका नाम है दि नेशनल मेमोरियल फॉर पीस एंड जस्टिस. यह म्यूज़ियम पिछले साल अप्रैल में खुला है जिसे लिंचिंग म्यूज़ियम भी कहा जाता है. ब्रायन स्टीवेंसन नाम के पब्लिक इंटरेस्ट लायर ने इसकी कल्पना की थी. इस म्यूज़ियम को देखने के लिए अब देश विदेश से लोग वहां जाते हैं. बाहर ही आपको दीवार में चिनवा दिए गए अश्वेत लोगों की मूर्तियां मिलेंगी. कलाकार थॉमस ने आज के अमरीका में अश्वेतों के ऊपर पुलिस की यातना को बताने के लिए ऐसी मूर्ति बनाई है. मगर अमरीका में 19वीं और 20 वीं सदी में अश्वेत लोगों को बड़ी संख्या में बात बात पर लिंच कर दिया गया. उन्हें मार दिया गया. ब्रायन और उनके साथी वकीलों ने कई साल लगाकर 4400 ऐसे मामले पता किए हैं जिनकी लिंचिंग हुई है. कइयों के नाम हैं और कइयों के नहीं है. आप यहां देख सकते हैं कि सबसे नाम को शहर के नाम के साथ इस स्टील फ्रेम में लटका दिया गया है. जिस पर नाम लिखा है वह जंग खाए लोहे की पट्टी है. यहां पर 800 से अधिक ऐसी पट्टियां लटकी मिलेंगी. 800 इसलिए हैं क्योंकि वे उन काउंटी का प्रतिनिधित्व करती हैं जहां लिंचिंग की घटना हुई थी. 8 साल तक रिसर्च चला और एक एक मामले को इन वकीलों ने जमा किया. इनके रिसर्च के अनुसार एक साल में औसतन लिंचिंग के 60 मामले हुआ करते थे.

 

Kavita Singh
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सिक्खिज्म ही इंसानियत का धर्म है??

कश्मीरी लड़कियां पुणे में नौकरी हेतु आई हुई थी।कश्मीर में धारा 370/35A हटाने को लेकर इंटरनेट, मोबाइल,टीवी आदि सेवाएं बंद कर दी गई तो इनका घरवालों से संपर्क कट गया!

इन लड़कियों ने दिल्ली में कश्मीरी को-कॉर्डिनेटर को फोन किया और मदद मांगी।32बच्चियों को पुणे से कश्मीर उनके घर सुरक्षित पहुंचाना था।

लिहाजा कश्मीरी को-कॉर्डिनेटर ने दिल्ली स्थित सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से संपर्क किया।कमेटी ने पुणे स्थित अपने सेवादारों को बताया कि हम टिकट की व्यवस्था कर रहे है आप लोग के के फार्म पहुंचो और इन लड़कियों को पुणे व मुम्बई एयरपोर्ट पहुंचाओ।

पुणे स्थित सिक्ख सेवादारों ने अपनी कारों में इन बच्चियों को एयरपोर्ट पहुंचाया व गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने टिकट का इंतजाम किया।रात को लड़कियां दिल्ली पहुंची और दिल्ली के सेवादार एयरपोर्ट पहुंचे और श्रीनगर की फ्लाइट में बैठाकर श्रीनगर पहुँचाया।

श्रीनगर में उपस्थित खालसा बंधुओं ने बच्चियों को अपने-अपने घरों तक सुरक्षित पहुंचाया।

जब आरएसएस व बीजेपी के लोग कश्मीर में बहुएँ ढूंढ रहे है तब एक जिंदा कौम कश्मीरी बहन-बेटियों की रक्षार्थ काज में लगी हुई है!

सलाम करता हूँ सिक्ख कौम के सिपाहियों को जो कहीं बाढ़ आये,भूकंप आये, यहां तक सिरिया की मारकाट के बीच भी मदद को तैयार मिलते है!

इस देश के लिए सबसे ज्यादा कुर्बानियां सिक्खों ने दी है।कोई भी आमजन पर अत्याचार करता तो सदा सिक्ख गुरु उनकी रक्षार्थ आगे आये।

कश्मीरी पंडितों के लिए शीश भी कुर्बान इन्होंने ही किये थे और आज कश्मीरी बेटियों की रक्षार्थ भी ये ही खड़े है।

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