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कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोपों की विस्तृत, तुरंत और पूरी तरह से पारदर्शी जांच हो : ब्रिटेन

ब्रिटेन की सरकार ने भारत प्रशासित कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोपों की विस्तृत, तुरंत और पूरी तरह से पारदर्शी जांच की मांग की है।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक़, मंगलवार को ब्रिटिश सरकार ने कहा, “यह सही है कि कश्मीर मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच एक द्विपक्षीय मुद्दा है, जिसका समाधान उन्हें करना चाहिए, लेकिन वहां हो रही गिरफ़्तारियां और संचार सेवाओं का पूर्ण रूप से काट दिया जाना, इसे एक अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मुद्दा बना देता है।”

पिछले महीने मोदी सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त करने वाली धारा 370 को हटाए जाने के बाद की स्थिति पर संसद में ब्रिटिश सांसदों ने गहरी चिंता जताई।

ब्रिटिश विदेश मंत्री डोमिनिक राब का कहना है कि हाल ही में ब्रिटेन के प्रधानमत्री ने अपने भारतीय समकक्ष के साथ मुलाक़ात में इस मुद्दे पर बात की थी और ख़ुद उन्होंने भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ मुलाक़ात में उन्हें लंदन की चिंताओं से अवगत करवाया था।

राब का कहना था, यह महत्वपूर्ण है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त मानवाधिकारों का पूरी तरह से सम्मान किया जाए।

संसद को संबोधित करते हुए ब्रिटिश विदेश मंत्री ने कहा, “कश्मीर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद का मुद्दा है और बुनियादी तौर पर उन्हें इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और शिमला समझौते के आधार पर हल करना चाहिए। ”

“लेकिन मानवाधिकारों का मुद्दा केवल भारत और पाकिस्तान के बीच एक द्विपक्षीय या घरेलू मुद्दा नहीं है, बल्कि यह एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दा है। मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप गहरी चिंता का कारण हैं, इनकी विस्तृत, तुरंत और पूरी तरह से पारदर्शी जांच होनी चाहिए। यह चिंताएं और मुद्दे काफ़ी गंभीर हैं।

 

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