कश्मीर राज्य

कश्मीर 33 वें दिन : कश्मीरियों में अजीब तरह का ख़ौफ़ है, उन्हें लगता है या तो जंग होगी या जो लावा पाक रहा है वो फूट पड़ेगा : रिपोर्ट

भारत प्रशासित कश्मीर के हालात में अब भी कोई सुधार नज़र नहीं आ रहा है, कश्मीर में 33 वें दिन भी प्रदर्शन हुए, यहाँ कल की घटना घटने के बाद सुरक्षा के इतने कड़े बंदोबस्त किये गए कि किसी भी शहरी को अपने घर से बाहर आने की इजाज़त नहीं थी, यहाँ श्रीनगर के भीतरी सोरा में एक युवक की मौत पैलेट से घायल हो जाने के बाद हो गयी थी उसके बाद पुरे वादी में एक बार फिर से ज़बरदत विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं

यहाँ अब तक हज़ारों लोग गिरफ़्तार हुए हैं। श्रीनगर में घर से निकलने पर रोक लगी है जबकि भारतीय सुरक्षा बलों के हाथों एक युवक के हताहत होने पर प्रदर्शन हुए।

कश्मीर में हालात बेहद ख़राब, नागरिकों को कंट्रोल करने के लिए चप्पे चप्पे पर तैनात हैं सैनिक, सडकों पर सिर्फ निजी गाड़ियों का आना जाना है, मोबाइल फ़ोन अभी भी बंद हैं, कुछ जगह पर लैंडलाइन शुरू हुए हैं, कितनी गिरफ्तारियां हुई हैं इनके बारे में हुकूमत कुछ नहीं कह रही है, अब कश्मीरियों में एक अजीब तरह का ख़ौफ़ पाया जाता है, उन्हें लगता है कि या तो जंग होगी या कश्मीर में जो लावा पाक रहा है वो फूट पड़ेगा, लेकिन हुकूमत की तरफ से एलानात किये जाते हैं कि 370 हटाने के बाद तरक्की का एक नया दौर शुरू होगा,,,,रियाज़ मसरूर, बीबीसी हिंदी से

कश्मीर पर पाकिस्तान का साथ क्यों नहीं दे रहे अरब देश?

भारत प्रशासित कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बना हुआ है। फ़ार्स की खाड़ी के अरब देशों का भी पाकिस्तान को समर्थन नहीं मिल रहा है। इसके पीछे आर्थिक कारण को बड़ी वजह माना जा रहा है। लेकिन आने वाले समय में वे देश जो अभी पाकिस्तान का साथ नहीं दे रहे हैं वे भारत के साथ रहें, ऐसा ज़रूरी नहीं है।

जब संयुक्त अरब इमारात ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने देश का सर्वोच्च सम्मान देने की घोषणा की थी तो मोदी को मुस्लिम देश द्वारा सम्मान दिए जाने का पाकिस्तान में मौन विरोध हुआ था। अब जब मोदी को पिछले दिनों ऑर्डर ऑफ ज़ाएद सम्मान ने नवाज़ा गया तो भारत ने कश्मीर में धारा 370 को हटा दिया था और जम्मू और कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया था। इस बार पाकिस्तान में यूएई के इस क़दम का खुला विरोध हुआ। पाकिस्तानी सीनेट के एक प्रतिनिधिमंडल ने अपना संयुक्त अरब इमारात का दौरा रद्द कर दिया। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने मुस्लिम देशों के रवैये पर देशवासियों की निराशा पर कहा है कि उन्हें निराश होने की ज़रूरत नहीं है, यदि कुछ देश अपने आर्थिक हितों के कारण इस मुद्दे को नहीं उठा रहे हैं, वे आख़िरकार इस मुद्दे को उठाएंगे, समय के साथ उन्हें ऐसा करना होगा।

कश्मीर के मुद्दे ने पाकिस्तान को असमंजस में डाल दिया है। आर्थिक मुश्किलों में फंसा पाकिस्तान एक ओर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का फिर से भरोसा जीतने की कोशिश में लगा है, तो कश्मीर मुद्दे ने उसे अपना ध्यान बांटने को मजबूर कर दिया है और जब उसने पश्चिमी देशों से इतर निगाह घुमाई तो पाया कि फ़ार्स की खाड़ी के अरब देश उससे दूर जा रहे हैं। इस्लामी एकता बिखर रही है और कभी कश्मीर पर बार-बार प्रस्ताव पास करने वाले इस्लामी देशों के संगठन ओआईसी के सदस्य देश अब कश्मीर पर भारत का साथ खुलकर न भी दे रहे हों, लेकिन कुछ बोल नहीं रहे हैं। इस बीच जीसीसी के देशों ने भारत और पाकिस्तान से विवाद कम करने का अनुरोध किया है। सऊदी अरब ने भी न तो भारतीय क़दम की निंदा की है और न ही कोई रवैया तय किया है।

हां यह ज़रूर है कि इस्लामी गणतंत्र ईरान जो हमेशा से दुनिया के किसी भी कोने में किसी भी धर्म के लोगों पर अत्याचार हो उसके ख़िलाफ़ ज़रूर आवाज़ उठाता है और इस बार भी उसने कश्मीर के मामले में भारत सरकार से अपील की, कि कश्मीर के मामले में इस राज्य के लोगों पर अपनी राय ज़ोर ज़बरदस्ती से न थोपी जाए। तेहरान ने यह भी उम्मीद जताई है कि कश्मीर मामले में भारत और पाकिस्तान अपना विवाद कूटनैतिक तरीक़े से सुलझाएंगे। ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई ने भी कश्मीर के बारे में कहा है कि, “हमें उम्मीद है कि भारत सरकार कश्मीर के लोगों के प्रति न्यायोचित नीति अपनाएगी।” ईरान के साथ-साथ तुर्की ने भी कश्मीर के मामले में पाकिस्तान के साथ बात की है। तुर्की के राष्ट्रपति रजब तय्यब अर्दोग़ान ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को कश्मीर पर पूरे समर्थन का वादा किया है और संयुक्त राष्ट्र संघ से सक्रिय भूमिका निभाने को कहा है।

इन सबके बीच संयुक्त अरब इमारात पाकिस्तान की परेशानी का सबसे बड़ा उदाहरण बन गया है। अब तक दोनों देशों की दोस्ती को अत्यंत गहरी दोस्ती कहा माना जाता रहा है। पाकिस्तान न केवल इस्लामी देशों के संगठन का सदस्य है वह फ़ार्स की खाड़ी के सुन्नी देशों के मोर्चे का भी अहम सदस्य है। यमन युद्ध में सऊदी अरब द्वारा बनाए गए मोर्चे में पाकिस्तान के पूर्व सेना प्रमुख राहील शरीफ़ सैन्य गठबंधन का नेतृत्व कर रहे हैं। यूएई ने कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान के मध्य लगातार बढ़ते जा रहे तनाव के बीच भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने देश का सर्वोच्च सम्मान देकर पाकिस्तान की समस्याएं बढ़ा दीं हैं। दूसरी ओर उसने संकेत भी दिया है कि आर्थिक कठिनाईयां झेल रहे पाकिस्तान से उसकी दूरियां बढ़ रही हैं।

कश्मीर पर मध्यपूर्व की प्रतिक्रिया से लगता है कि पाकिस्तान और ईरान तथा तुर्की के विपरीत अरब देशों की कश्मीर को लेकर अब उतनी दिलचस्पी नहीं बची है। इसकी सबसे बड़ी वजह तो यह है कि सऊदी और यूएई हालिया तेल संकट के बाद व्यापार पर ध्यान दे रहे हैं और भारत उनके बड़े व्यापारिक और निवेश सहयोगियों में एक के रूप में उभरा है। अरब देशों के भारत और पाकिस्तान दोनों के ही साथ अच्छे संबंध रहे हैं और उसने भारत को कभी अपना दुश्मन नहीं समझा है। भारत के 70 लाख से अधिक कुशल कामगार अरब देशों में काम कर रहे हैं और वहां के विकास में अहम योगदान दे रहे हैं। भारत वहां के प्रमुख देशों के लिए निवेश का प्रमुख केंद्र है। हाल में कश्मीर समस्या की शुरुआत पर सऊदी अरब, भारत में 15 अरब डॉलर के निवेश को अंतिम रूप देने में लगा था।

भारत ने पिछले कुछ वर्षों के दौरान अरब देशों के साथ अपने संबंध बढ़ाने में महत्वपूर्ण पहल की है। आर्थिक संबंधों को बेहतर बनाने और फ़ार्स की खाड़ी के देशों में काम करने वाले भारतीयों के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराने के अलावा इसका उद्देश्य आतंकवाद के ख़िलाफ़ संघर्ष भी रहा है। सऊदी अरब को कट्टरपंथी और तकफ़ीरी आतंकवाद का जनक माना जाता है। लेकिन इधर कुछ वर्षों में उसकी भी नीतियों में बदलाव आया है। कश्मीर पर पाकिस्तान का अलग थलग पड़ना इसका नतीजा हो सकता है। पाकिस्तान में भी इस बात पर सवाल उठाए जा रहे हैं कि उसे मुसलमान देशों का समर्थन क्यों नहीं मिल रहा है?

कुल मिलाकर फिलहाल पाकिस्तान ने कश्मीर के मुद्दे को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में लाने के अलावा अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर उठाने का फ़ैसला किया है। सुरक्षा परिषद में नाकामी के बावजूद पाकिस्तान हर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर कश्मीर का मुद्दा उठा रहा है और भारतीय नेता और राजनयिक उस पर आपत्ति कर रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत और पाकिस्तान की तू-तू मैं-मैं जारी रही तो हो सकता है कि फ़ार्स की खाड़ी के अरब देश कश्मीर पर बोलने को मजबूर हो जाएं लेकिन यह भी संभव है कि कश्मीर में उनकी रही सही दिलचस्पी भी ख़त्म हो जाए।

मोदी के अरब हमदर्द

भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर को प्राप्त विशेष दर्जा ख़त्म किए जाने के बाद से पाकिस्तान की सरकार से भारत के ख़िलाफ़ तीखी प्रतिक्रिया आने का सिलसिला जारी है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से लेकर इस देश के मंत्री तक भारत की मोदी सरकार पर हमला बोल रहे हैं।

रविवार को पाकिस्तान के विज्ञान और तकनीक मंत्री फ़वाद हुसैन चौधरी ने भारतीय प्रधानमंत्री मोदी को निशाने पर लेते हुए कहा कि भारत ने अगर उंगली दिखाई तो पाकिस्तान हाथ तोड़ देगा और मुक्का दिखाया तो जबड़ा तोड़ने का दम रखते हैं। फ़वाद चौधरी ने कहा, ”नरेंद्र मोदी फासीवादी हैं, जब से दोबारा जीतकर आए हैं तब से वह कुछ ज़्यादा ही घमंडी हो गए हैं। चौधरी ने मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि, अगर आप अमन चाहते हैं तो हम अमन के लिए खड़े हैं और अगर आप युद्ध चाहते हैं तो हम युद्ध के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि हम तमाम हालात के लिए तैयार हैं। पाक मंत्री ने कहा कि, अगर आप उंगली दिखाएंगे तो हम हाथ तोड़ने की क्षमता रखते हैं और अगर मुक्का दिखाएंगे तो हम आपका जबड़ा तोड़ने का दम रखते हैं।”

पाकिस्तान के विज्ञान और तकनीक मंत्री फ़वाद चौधरी ने कहा, ”इस समय पाकिस्तान की डिप्लोमैसी बिल्कुल सही रास्ते पर है। उन्होंने कहा कि 27 सितंबर को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान संयुक्त राष्ट्र में बहुत अहम भाषण देने जा रहे हैं। चौधरी ने कहा कि, हमारे साथ इस्लामिक देश खड़े हैं, तुर्की हमारे साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि संयुक्त अरब इमारात ने मोदी को सम्मान देकर पाकिस्तान को मायूस किया है।” फ़वाद चौधरी से पूछा गया कि कश्मीर विवाद पर ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इस्लामिक कोऑपरेशन और इस्लामिक ब्लॉक की भूमिका क्या होगी? इसके जवाब में फ़वाद चौधरी ने कहा, ”यहां कोई मुस्लिम ब्लॉक नहीं है, सभी मुस्लिम देश संघर्ष में उलझे हुए हैं, जो देश स्थिर है, जैसे तुर्की वह हमारे साथ खड़ा है, बाक़ी के मुस्लिम देश अपने हितों के हिसाब से फ़ैसला करेंगे।”

इस बीच पाकिस्तानी मंत्री फ़वाद चौधरी ने संयुक्त अरब इमारात से भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिलने पर कहा, ”इसमें कोई संदेह नहीं है कि मोदी को यूएई का सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिलने से पाकिस्तान में मायूसी है। उन्होंने कहा कि हमलोग यूएई को अपना दोस्त मानते हैं और उसे यह नहीं भूलना चाहिए कि दुबई को बनाने में पाकिस्तान की बड़ी भूमिका रही है। चौधरी ने कहा कि कश्मीर विवाद कोई पाकिस्तान की समस्या नहीं है बल्कि यह वैश्विक मानवाधिकार का मुद्दा है।”अबू धाबी के क्राउन प्रिंस ने भारत के प्रधानमंत्री मोदी के यूएई दौरे पर कहा कि वह बहुत ही कृतज्ञ हैं कि उनके भाई अपने दूसरे घर अबू धाबी (संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी) आए हैं। इससे पहले यूएई ने ‘ऑर्डर ऑफ ज़ाएद’ सम्मान से रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ब्रिटेन की महारानी एलिज़ाबेथ और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को नवाज़ा था।

पाकिस्तान के रेल मंत्री शेख़ राशीद ने भी रविवार को कश्मीर मुद्दे पर भारत के ख़िलाफ़ हमला बोलते हुए कहा कि अगर भारत ने पाकिस्तान पर हमला किया तो भारतीय उपमहाद्वीप का मानचित्र बदल जाएगा। पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के मुज़फ़्फ़राबाद के सिटी प्रेस क्लब में शेख़ राशिद पत्रकारों से बात कर रहे थे। शेख़ राशिद ने कहा कि पाकिस्तान कश्मीर का मुद्दा दुनिया के हर मंच पर उठाएगा। वहीं पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा कि कश्मीर पर इस्लामिक दुनिया भी अब पाकिस्तान की बात समझ रही है। क़रैशी ने कहा, ”पाकिस्तान ने अपना रुख़ साफ़ किया है और भारत से कहा है कि कश्मीर में मुसलमानों पर ज़्यादती बंद हो। उन्होंने कहा कि ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इस्लामिक को-ऑपरेशन भी कश्मीर पर बोल चुका है तुर्की के अंदर कश्मीरियों लेकर समर्थन है, मलेशिया ने भी अपनी बात कही है। क़ुरैशी ने कहा कि, मुझे विश्वास है कि इस्लामकि दुनिया हमलोगों का साथ देगी।” क़ुरैशी ने कहा कि यूएई और भारत के बहुत अच्छे संबंध हैं और दोनों के अपने-अपने हित हैं। उन्होंने कहा कि वह यूएई के सामने सारे तथ्यों को रखेंगे।

इस बीच पाकिस्तान के पत्रकारों में भी अरब देशों द्वारा भारतीय प्राधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सम्मानित किए जाने पर बेचैनी है। पाकिस्तानी मीडिया इस बात को लेकर हमलावर हैं कि इस्लामिक देश कश्मीर पर पाकिस्तान का साथ देने के बजाय मोदी को सम्मानित कर रहे हैं। पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार हामिद मीर ने बहरैन में मोदी के सम्मानित होने पर लिखा है कि बहरैन, पाकिस्तान का कभी दोस्त नहीं हो सकता है। वहीं अमरीका में पाकिस्तान के राजदूत रहे हुसैन हक़्क़ानी ने मोदी को यूएई द्वारा अवॉर्ड दिए जाने पर पाकिस्तान की प्रतिक्रिया को नकार दिया है। हुसैन हक़्क़ानी ने ट्विटर पर लिखा है, ”पाकिस्तानियों को समझना चाहिए कि यूएई अपने हितों की बलि देकर पाकिस्तान का पक्ष क्यों लेगा? याद रखना चाहिए कि यही संयुक्त अरब इमारात ने पाकिस्तान को कुछ महीने पहले तीन अरब डॉलर की लाइफ़ टाइम मदद की थी।” हुसैन हक़्क़ानी ने यह भी लिखा है कि पाकिस्तान कश्मीर पर समर्थन मिलने का दावा कर रहा है लेकिन जिस देश का नाम ले रहा है वही मुकर जा रहा है। हक़्क़ानी ने कहा कि श्रीलंका में पाकिस्तानी उच्चायोग ने दावा किया है कि श्रीलंका के राष्ट्रपति ने कश्मीर की मध्यस्थता सार्क के ज़रिए करने का प्रस्ताव रखा है जिसे श्रीलंका ने सिरे से ख़ारिज कर दिया।

इस दौरान भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अभी जी-7 देशों के सम्मेलन में फ़्रांस में हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने ट्विटर पर संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरस से मुलाक़ात की तस्वीरें डाली हैं और लिखा है कि जलवायु परिवर्तन और प्रवासियों के मुद्दों पर बात हुई। इससे पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्री महमूद क़ुरैशी ने कहा था कि उन्होंने कश्मीर मुद्दे पर यूएन महासचिव से फ़ोन पर बात की है। नरेंद्र मोदी ने भारत का प्रधानमंत्री बनने के बाद फ़ार्स की खाड़ी के लगभग सभी इस्लामिक देशों का दौरा किया है। दिलचस्प बात यह है कि मोदी ने इसके साथ ही इस्राईल का भी दौरा किया था और मोदी इस्राईल जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने हैं।

कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि कश्मीर मामले में पाकिस्तान को अभी तक तुर्की को छोड़कर किसी भी इस्लामी देश से स्पष्ट समर्थन नहीं मिला है। केवल इस्लामी गणतंत्र ईरान एक ऐसा देश है जिसके शीर्ष नेतृत्व से लेकर लगभग सभी अधिकारियों ने कश्मीर के लोगों का समर्थन किया है और साथ ही भारत सरकार से अपील की है कि इस मामले को ज़ोर ज़बरदस्ती के बजाए कश्मीर के लोगों को साथ लेकर हल करे। इस बीच अगर देखा जाए तो कश्मीरी जनता जो लगभग एक महीने से क़ैद जैसी स्थिति में अपना जीवन गुज़ारने के लिए मजबूर है उनके दर्द को समझने के बजाए एक ओर अरब देश मोदी की आवभगत मे लगे हुए हैं तो वहीं पाकिस्तान भी ऐसे सभी अरब देशों से मायूस होता जा रहा है जो कश्मीर से धारा 370 समाप्त करने के मुख्य ज़िम्मेदार भारतीय प्रधानमंत्री मोदी को सम्मानित करने में व्यस्त हैं

नरेंद्र मोदी के नाम 50 यूरोपीय सांसदों का खुला पत्र

यूरोपीय संसद के 50 सांसदों ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुला पत्र लिखकर शिकायत की है।

प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार यूरोपीय संघ के 50 सांसदों ने भारत प्रशासित कश्मीर में प्रदर्शनारियों के ख़िलाफ़ इस देश के सुरक्षाबलों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली आफस्पा व पैलेट गन के ख़िलाफ़ भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुला खत लिखकर शिकायत की है। यूरोपीय सांसदों ने कश्मीर में प्रयोग हुई पैलेट गन की सभी घटनाओं की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की भी मांग की है। यूरोपीय संसद के सदस्यों ने कश्मीर के शोपियां ज़िले में पैलेट गन की पीड़िता 19 माह की हिबा निसार का भी उल्लेख किया है जो पिछले साल नवंबर में घायल हो गई थी।

द वायर के मुताबिक़, यूरोपीय संसद के 50 सदस्यों ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मांग की है कि जम्मू-कश्मीर में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पैलेट गन के इस्तेमाल पर तुरंत रोक लगाई जाए और सुरक्षाबल विशेष अधिकार अधिनियम (आफस्पा) और जन सुरक्षा क़ानून (पीएसए) जैसे क़ानूनों को समाप्त किया जाए।

मेंबर्स ऑफ़ द यूरोपियन पार्लियामेंट (एमईपीएस) ने 25 मार्च को नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में कहा, ‘हम यूरोपीय संसद के निर्वाचित सदस्य आपसे पूर्व और वर्तमान में कश्मीर के लोगों के मानवाधिकार उल्लंघन, जैसा कि ओएचसीएचआर-1 की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है, के ख़िलाफ़ गहरी चिंता व्यक्त करते हैं और मांग करते हैं कि सभी दुर्घटनाओं की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के लिए एक उच्च स्तरीय सीमित बनाएंगे जो निष्पक्ष तरीक़े से पैलेट गन के इस्तेमाल से हुईं मौतें और गंभीर रूप से घायल होने वालों की जांच करांगे।

Roots In Kashmir
@RootsInKashmir
Kashmir is not normal, it is largely peaceful
@khanumarfa
. People are afraid, true but afraid of what? They are afraid of the violence the terrorists and separatists will indulge in, once restrictions are lifted. You giving incomplete picture also a disservice to the medium

ANI
@ANI
Shashi Tharoor, Congress in Delhi: What is going on in Kashmir is a travesty of our democracy. You have subverted the spirit of the Constitution, you have gone ahead and changed the status of the state without consulting its elected legislature, which you’ve suspended. (04.09.19)

Shehla Rashid شہلا رشید
@Shehla_Rashid
This is how disinformation is being spread in Kashmir by the state machinery. It is criminal to lock up the people and then lie to the world about their deaths, to blame casualties caused by administrative action on civilians instead! It’s criminal.

Priti Gandhi
@MrsGandhi
NDTV’s Bureau Chief Nazir Masoodi, Reuters senior journalist Fayyaz Bukhari & Associated Press’ Aijaz Hussain were staying in govt bungalows in Kashmir without meeting the required criteria. The govt has asked these journalists to vacate the allotted accommodation immediately.

Rana Ayyub
@RanaAyyub
“They asked me to throw stones at the mosque, when I refused, they broke my back,” says a 20 year old detained by armed forces in Kashmir Another thirteen year old detained, tortured in jail. A woman threatened with rape. I write in the Washington Post.

 


‘Our children are in jail’: How India is keeping Kashmir isolated and in fear

By Rana Ayyub
September 5
Rana Ayyub is an Indian journalist and author of “Gujarat Files: Anatomy of a Cover Up.”

On Aug. 6, days after the Indian government revoked Kashmir’s special status, Mohammed Ashiq, 13, had gone to sleep on the carpet of his family’s modest home after playing with the lamb his father had brought home to sacrifice on Eid al-Adha, which was a week away. Late that night, he heard a loud scream followed by some noises on the roof of his house.

His mother rushed to his side before a group of men in uniform barged in. His father, Yunus Mohammed, told me in an interview during my recent visit to Kashmir that a man with a red mask on his face entered, followed by close to 30 officers from the Jammu and Kashmir police. Six or seven police vans stood outside the house. “They snatched my young boy from my wife’s arms and started beating him,” Mohammed said. “They asked him to give the whereabouts of stone pelters.”

Ashiq was dragged out of the house and thrown into a police van, which disappeared into the darkness. The next morning, when his father went to the police station, Ashiq had red eyes from crying through the night. He told his father that the officers had tied his hands to a pole and beat him with a stick all night.

When I reached Ashiq’s house, his parents were reluctant to talk. After much persuasion, they called Ashiq, who had been playing cricket with his friends outside. He removed his T-shirt, drenched in sweat, to show the cuts and bruises covering his back. He screams in pain when his father tries to touch one of the wound marks. “The SP saheb (superintendent of police) beat me the night I was dragged to the police station,” he told me. “There were other boys in the van. When I told them I studied in class eight in school and knew nothing about the protests, they would start beating me again.”

Ashiq’s father, who runs a fruit shop, said he wanted to file a complaint against the police — but he knows there cannot be justice from this government that claims to be liberating the valley but is attempting to crush the spirit of every Kashmiri. After 18 days of detention, Ashiq was released with physical and psychological scars that he will carry the rest of his life. The lamb that was brought to be sacrificed is still tied in the veranda.

What’s really going on in Kashmir? | The Fact Checker
The Indian government has said Kashmir is calm after revoking the area’s autonomous status. But video and eyewitness accounts show a different story. (Elyse Samuels/The Washington Post)

Outside the Rajbagh Police station in Srinagar, hundreds of anxious parents waited to get a glimpse of their children, who have been rounded up and detained. Officers surrounded mothers as they wept, carrying food for their children.

“At least tell me if he is alive,” asked Rukhsana. His 18-year-old son was also picked up from Mehju Nagar. Close to 3,000 people have been detained in Kashmir — many of them children — since Aug. 4, when a curfew and communication blackout were imposed in the valley. It has now been a month, and many locals have no reliable information about their future. Fear and uncertainty permeate the atmosphere.

As we drove to Parigaam on the way to Pulwama, we were stopped at various checkpoints by the Central Paramilitary forces who have covered every inch of Jammu and Kashmir with their guns and concertina wire. Civilian movement is restricted to emergency services, and long stretches of silence followed as we drove on deserted roads. In Parigaam, we asked a local about Muzaffar Ahmed, a young man we were told was recently released from detention. The man in front of his closed cellphone store asked: “Are you from the media?”

We answered yes, and he began screaming at our driver, asking us to leave. “Do you guys have any shame?” he yelled. “You journalists dance on television that everything is normal here while we are being killed and silenced. Our children are in jail and have been disappeared and you tell the world that all is good, that we are rejoicing!”

The Indian media is viewed with suspicion and anger in Kashmir. There is growing resentment over the skewed coverage — most journalists have resorted to simply reproducing official government lies. Gulfam Wani, a local baker, asked me, “How does the Indian media sleep at night with this propaganda against us Kashmiris every day?”

A few miles ahead, I met Muzaffar Ahmed. He is 20 and works with his father and brother in a local bakery in Parigaam. His father, Shabbir, told us that on Aug. 6 members of the Rashtriya Rifles, a security unit deployed in the valley, knocked on the door. They came in a mine-resistant vehicle used by the Indian army. They started breaking the windows of his house. Muzaffar told me the officers were drunk. Close to 30 officers ransacked the house. They showered expletives on the family. One of them held Muzaffar by the neck and asked, “Where are your accomplices?” He dragged Muzaffar to the local mosque and asked him to throw stones at it. When Muzaffar refused, they beat him again. “Throw stones at the mosque, like you throw stones at us,” he said they told him.

The Ahmed brothers were beaten for two hours before they were taken to the central jail. Muzaffar told me that once there, they were beaten for hours with a bamboo stick. When they went unconscious, they were woken up with electric shocks. He shows me his burnt skin. The two brothers were held for 20 days. After they were released, Shabbir put them in a tempo and hurried them to a hospital in Srinagar. The doctor told him that his son barely survived with his spine. Muzaffar, who prayed five times a day in the local mosque, broke down: “They have broken my bones; I cannot prostrate myself before Allah.”

He is still looking for answers. Why was he arrested? He said he has never taken part in a single protest. His father wanted to know how the family will survive with his two working sons severely disabled.

Muzaffar’s mother invited me inside the house. She asked whether I can protect her daughter-in-law. “They were drunk, and they kept asking for my daughter-in-law,” she said of the officers. “I fear they will come again.”

I spent four days in Kashmir before I had to leave for Delhi to file this. I have been visiting the valley for the past 15 years, but I had never seen these levels of resentment and anger toward the Indian state. I asked Kashmiris whether they would like to send their children away from the valley to protect them. They laughed.

“Look at the hatred on display for Indian Muslims in the rest of the country. You think they will let Kashmiris live?” Ashiq’s father told me. “Our children are being thrown out of colleges, from their homes in your India.” (This month, a 24-year-old Kashmiri doctor was denied accommodation by a hotel in New Delhi, which cited an alleged WhatsApp message from the government that asked to refuse space to Kashmiris.)

Right after my return, I sent out a tweet about the current injustices in Kashmir. It sparked outrage. Imtiyaz Hussain of the Jammu and Kashmir police called my tweet baseless and alarming. In the past three weeks, Hussain has been discrediting reports by international news organizations — including the the Wall Street Journal and the BBC — as propaganda.

India, like Hussain, has decided to overlook the suffering of a besieged population of 8 million. While Kashmiris remain trapped and isolated, facing persecution and torture, Indians relax in their living rooms to watch the news and congratulate themselves for another “victory” in the name of “stability and prosperity.

 

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