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ज़ेलमई खलीलज़ाद क़तर की यात्रा पर, उद्देश्य तालिबान से वार्ता

अफगानिस्तान के मामले में अमरीका के विशेष दूत ज़ेलमई ख़लीलज़ाद एक तालिबान से वार्ता के लिए एक बार फिर क़तर की यात्रा की है।

वह पिछले सप्ताह अफगानिस्तान के राष्ट्रपति सहित इस देश के वरिष्ठ अधिकारियों से वार्ता के लिए काबुल गये थे।

काबुल में वार्ता के बाद ज़ेलमई ख़लीलज़ाद, अफगानिस्तान में अमरीका और नेटो के सेना के कमांडर स्काट मिलर के साथ तालिबान से वार्ता जारी रखने के लिए पुनः क़तर पहुंचे हैं।

खलीलज़ाद ने पहले कहा था कि तालिबान के सथ आरंभिक सहमति बन गयी है और समझौते पर हस्ताक्षर के बाद अमरीका लगभग 135 दिनों के भीतर अफगानिस्तान से अपने 5400 सैनिक वापस बुला लेगा।

अफगानिस्तान के बारे में तालिबान और अमरीका के मध्य वार्ता में अफगान सरकार का कोई प्रतिनिधि नहीं है जिसकी वजह से इस बात की आशंका बढ़ गयी है कि यह समझौता अफगानिस्तान के हितों को नज़र में रखे बिना किया जा सकता है।

इसी मध्य अमरीकी कांग्रेस ने भी ज़लमई ख़लीलज़ाद से मांग की है कि वह तालिबान के साथ होने वाले समझौते का ब्योरा दें।

अमरीकी कांग्रेस ने एक पत्र द्वारा यह मांग की है और पत्र में लिखा है कि कांग्रेस यह सुनिश्चित करना चाहती है कि तालिबान के साथ शांति समझौता हो रहा है न कि अफगानिस्तान से अमरीकी सैनिकों की वापसी पर सहमति।

इसी मध्य बीबीसी ने बताया है कि अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी का प्रस्ताव अमरीका दौरा रद्द कर दिया गया है।

पहले बताया गया था कि अफगान राष्ट्रपति 13 सदस्यों पर आधारित एक प्रतिनिधिमंडल के साथ शनिवार को अमरीका जाने वाले हैं जहां वह इस देश के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से वार्ता करेंगे।

इस भेंट में अमरीका और अफगानिस्तान के राष्ट्रपतियों के मध्य तालिबान और अमरीका के मध्य समझौते पर जनम लेने वाली चिंता पर चर्चा की उम्मीद की जा रही थी।

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