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भारत बीमारों का देश है यहां हर व्यक्ति बीमार है

Kranti Kumar
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1916 में 25 वर्ष की उम्र में डॉ बाबा साहेब आंबेडकर ने कोलोंबिया विशवविद्यालय के सेमीनार के लिए एक पेपर लिखा, जिसका शीर्षक था “भारत में जातियाँ” !

उन्होंने जाति की परिभाषा दी, उनके अनुसार जाति एक अन्तर्विवाही इकाई है और एक ‘खुद में बंद वर्ग’ है,

एक ऐसी व्यवस्था जिसमे जितना ऊपर जाएं उतना मान सम्मान बढ़ता है, जितना नीचे जाएंगे उतनी घृणा और अपमान है.

24 सितंबर 2019 में मध्य प्रदेश शिवपुरी ज़िले के भावखेड़ी गांव में दो बच्चे एक रोशनी वाल्मीकि 12 साली की दूसरा अविनाश वाल्मीकि 10 साल का शौच करने गए,

हाकिम और रामेश्वरवार यादव की नज़र दोनों बच्चों पर पड़ी, दोनों मोदी भक्त मालूम पड़ते है स्वच्छता अभियान इन दोनों ने कुछ ज्यादा ही गंभीर ले लिया. दोनों को बच्चों का सरनेम जाति पता थी इसलिए उनकी घृणा क्रूरता के रूप में बढ़ने वाली थी.

दोनों ने रोशनी और अविनाश को लाठि डंडे से पीटने लगे और तब तक पीटा जब तक उनकी मौत ना हो गई !

भारत बीमारों का देश है यहां हर व्यक्ति बीमार है वो अपने से नीची जाति के लोगों को पीटकर मारकर ऊंचा बनना चाहता है,

डॉ बाबा साहेब अंबेडकर ने कहा है जाति भेद भाव बीमारी का वायरस ब्राह्मण धर्म ग्रंथों में है बिना इसे बदले या खत्म किए आप समाज से जाति नही मिटा सकते.

मासूम बच्चों को मारने वाले सवर्ण नही थे मारने वालों की जाति से कुछ पायदान उपर थे लेकिन बड़ी जातियों से कई पायदान नीचे !

खतरा ब्राह्मण ठाकुर से नही हर उस मानसिकता से है जो जाति भेद भाव से ग्रस्त है.

सारी किताबों के पन्ने पलट दिए, पूरा गूगल खोज डाला लेकिन खुले में शौच करते हुए मासूम बच्चों की हत्या की खबर विश्व के किसी देश में नही मिली !

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