साहित्य

हत्या…बलात्कार…दंगे…कुछ भी…जी भर कर खेलो ख़ूनी खेल

Arun Maheshwari
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“हम अगर कहीं जाएंगे तो हमारे कंधे पर उन दबी हुई आवाजों की शक्ति होगी जिनको बचाने की बात हम सड़कों पर करते हैं। अगर व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा होगी तो भगत सिंह जैसे शहीद होने की महत्वाकांक्षा होगी, न कि जेएनयू से इलेक्शन में गांठ जोड़कर चुनाव जीतने और हारने की महत्वाकांक्षा होगी ” ।
-चन्द्रशेखर

महज 32 साल की अल्पायु में ही शहीद हो गए कामरेड चंद्रशेखर का आज जन्म दिन है।उनकी स्मृतियों को नमन :

हे शहाबुद्दीनों ! हे सत्तासहदेवों !

-सरला माहेश्वरी

जी भर कर खेलो ख़ूनी खेल !
तुम्हारे लिये नहीं होती जेल !
तुम तो हो सत्ता से लिपटी अमर बेल !

तुम ही लगाते
वोटों के रेले
नोटों के ढेले
लोगों के मेले

तुम ही तो करते सब कैश !
कैश ! कैश !! कैश !!!

वोट फ़ॉर कैश ! नोटों के बदले वोट !
पावर फ़ॉर कैश !! नोटों के बदले सत्ता !! आतंक !!
एवरीथिंग फ़ॉर कैश !!! नोटों के बदले कुछ भी…!!!

हत्या …बलात्कार…दंगे …कुछ भी…

सत्ता और शिकारी का मेल
नूरा-कुश्ती का तुम्हारा खेल
सरपट भागती तंत्र की रेल !

शासन के ये धंधे
सत्ता के अनगिनत फंदे !
तू क्या जाने रे बंदे !

ओ चंदू की माँ ! ओ चंदा बाबू ! ओ बच्चे इम्तियाज़ ! ओ अख़लाक़ !

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