विशेष

#UN आम सभा में इमरान ख़ान ने आरएसएस का पूरा काला चिटठा खोल दिया : आतंकवाद से जोड़ा आरएसएस का इतिहास : रिपोर्ट

संयुक्त राष्ट्र की आम सभा में इस बार कई बड़े मुद्दे थे, दुनियांभर में बड़े और शक्तिशाली देश अपने लाभ के लिए गठजोड़ कर रहे हैं, अनेक जगहों पर युद्ध हो रहे हैं, यह बड़े देश जब चाहते हैं किसी भी कमज़ोर देश को घेर लेते हैं, आज आतंकवाद फायदे का सौदा साबित हो रहा है, सुपर पावर का टाइटल रखने वाले देश खुद आतंकवादी समूह तैयार करते हैं पहले उन्हें अपने लिए किसी देश की सरकार, संगठन से लड़वाते हैं बाद में आतंकवाद का सफाया करने के बहाने वहां घुस जाते हैं और उस देश से तमाम धन, सम्पदा को लूट कर अपने देश के ख़ज़ाने भर लेते हैं

भारत में भी आतंकवाद का मुद्दा बहुत गरम मुद्दा है यहाँ लम्बे समय से आतंकवादी वारदातें होती रही हैं, इन आतंकवादी वारदातों के लिए मुस्लिम समाज को बलि का बकरा बनाकर बर्बाद करने के काम हुए हैं, जबकि भारत के अंदर आतंकवाद का असली ज़िम्मेदार जो है उसे बड़ी चालाकी से हमेशा बचाया जाता रहा है, इस आतंकवादी संगठन को बचाने के काम में सरकारें, जांच एजेंसियां, ख़ुफ़िया विभाग सभी शामिल रहे हैं

संयुक्त राष्ट्र की आम सभा में तुर्की के राष्ट्रपति के भाषण ने खूब चर्चा हासिल की है, रजब तय्यप का भाषण कश्मीर, फिलस्तीन, अमेरिकी आतंकवाद, ईरान का बचाव, इस्लाम और मुसलामनों के खिलाफ अमेरिका, इस्राईल और पक्षिमी देशों प्रोपेगंडा को उठाया, तय्यप के भाषण में मुस्लिम जगत के लिए चिंता थी वहीँ मलेशिया के प्रधानमंत्री महतिर मुहम्मद ने अपने भाषण में विकास, पर्यावरण, फिलस्तीन, इस्लामओफ़ोबिया, कश्मीर की बात की

इस महासभा का सबसे अहम् भाषण भारत के प्रधानमंत्री मोदी और इमरान खान का था, सभी देख रहे थे कि कौन नेता क्या बोलेगा, मोदी के भाषण में कोई चार्म/जोश या दम नहीं था, पूरा भाषण उन्होंने अपनी सरकार के इर्दगिर्द रखा, भाषण में कश्मीर नहीं था, केवल आतंकवाद को मुद्दा बना कर बोले बाकि बहुत नीरस भाषण ने जनता में बहुत निरास किया दूसरी तरफ इमरान ख़ान के भाषण को अगर देखें तो उन्होंने शानदार तरीके से दुनियां को ललकारा, पक्षिमी देशों अमेरिका को जमकर फटकारा, टैक्स चोर अमीर देशों को आईना दिखाया, आतंकवाद के नाम पर इस्लाम और मुसलामनों को टारगेट करने वाले देशों से बहुत खुल कर उनके कारनामों को उजागर किया, इमरान खान के भाषण में ईमानदारी थी, किसी तरह की बनावट नहीं थी, उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान को हथियार देने और उन्हें प्रशिक्षण देने में पाकिस्तान की सेना के शामिल होने की बात को स्वीकारा साथ ही अमेरिका व् यूरोप के देशों को बताया कि तालिबान को किस तरह से किस की मदद से तैयार किया गया और बाद में अमेरिका ने उन्हें आतंकवादी करार दे दिया, इमरान खान के भाषण में कश्मीर था, इस के आलावा राष्ट्रीय स्वम सेवक संघ आरएसएस का पूरा काला चिटठा सारी दुनियां के सामने खोल दिया, आरएसएस की विचारधारा, उसका उदेश पर इमरान खान ने हिटलर, मेसोलिनी से समानता देकर दुनियां को चेताने की कोशिश की,,,,परवेज़ ख़ान

 

 

NDTV India
=========

न्यूयॉर्क में हर साल होने वाली संयुक्त राष्ट्र की आम सभा का आज आखिरी दिन था. 74वीं आम सभा में ख़ूब भाषण हुए. पांच दिनों तक चलने वाले इस भाषण में दुनिया भर के मुल्कों के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री के भाषण से किस तरह की चिन्ताएं उभर रही हैं, उन भाषणों में समाधान का संकल्प कितना है या भाषण देने की औपचारिकता कितनी है, ईमानदारी कितनी है, इस लिहाज़ से भाषणों को देखा जाना चाहिए तभी हम समझ पाएंगे कि संयुक्त राष्ट्र की आम सभा में भाषण का क्या मतलब है. कश्मीर के नज़रिए से देखें तो आम सभा में इस पर ईरान या यमन की तरह चर्चा नहीं हुई और न ज़िक्र हुआ. आम सभा में दिन के नौ बजे से रात के नौ बजे तक भाषण होता है. जैसे 27 सितंबर को ही 37 देशों के प्रमुखों का भाषण होगा. भाषण की शुरूआत सेक्रेट्री जनरल एंतोनियो गुतेरेज़ ने की. गुतेरेज़ ने कहा कि दुनिया में टकराव के कई क्षेत्र बन गए हैं जिन पर तुरंत ध्यान देना ज़रूरी है लेकिन उन्होंने कश्मीर का ज़िक्र नहीं किया. सीरीया, कोरिया, सूडान, अफगानिस्तान और वेनेज़ुएला का ज़रूर नाम लिया. ये वो समस्याएं जो अपना रूप बदल लेती हैं मगर समाधान नहीं होता है. आज ही भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण हुआ और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान का भी हुआ. बांग्लादेश और नेपाल के प्रमुख का भी भाषण होगा. ज़ाहिर है दक्षिण एशिया के मुल्कों के प्रमुखों के भाषण को ग़ौर से देखा जाना चाहिए कि वे इन इलाकों में किन बातों से चिन्तित हैं. उनके पास नया आइडिया क्या है और क्या साहसिक कदम उठाने जा रहे हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *