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अपने भयानक एजेंडे के लिए चालाकी से बालीवुड को इस्तेमाल कर रहा है इस्राईल : रिपोर्ट

ब्रिटेन की वेबइसाट मिडिल ईस्ट आई ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है जिसमें यह बताया गया है कि इस्राईल किस तरह बालीवुड को इस्तेमाल करके अपने ग़ैर क़ानूनी क़ब्ज़े को क़ानूनी दिखाने और फ़िलिस्तीनियों के अधिकारों के भयानक रूप से हनन की ओर से लोगों का ध्यान हटाने की कोशिश में व्यस्त है।

वेबसाइट का कहना है कि आने वाले दिनों में तेल अबीब में फ़ेस्टिवल होने जा रहा है जिसमें मंगलवार और गुरुवार को बालीवुड की हस्तियां इस्राईल जाएंगी और वहां एक कल्चरल कार्यक्रम में हिस्सा लेंगी। बताया जाता है कि भारत इस्राईल संबंधों के इतिहास का यह सबसे बड़ा कल्चरल एवेंट होगा।

इस इवेंट में अनिल कपूर, अमीशा पटेल सहित कम से कम आठ बालीवुड हस्तियां हिस्सा लेंगी जबकि इस कार्यक्रम में भाग लेने वाले भारतीयों की संख्या 30 हज़ार तक बताई जाती है। इसका उद्देश्य भारत इस्राईल संबंधों को और भी मज़बूती देना है।

मिडिल ईस्ट आई के अनुसार आयोजन से पहले ही इस कार्यक्रम के बारे में बहस शुरू हो गई है और बहुत से लोग इस बारे में संदेह भी जताने लगे हैं। इस्राईल के बहिष्कार के लिए विश्व स्तर पर सक्रिय संगठन बीडीएस की ओर से गतिविधियां तेज़ हो गई हैं कि भारतीय कलाकारों पर ज़ोर डाला जाए कि वह इस्राईल की यात्रा से परहेज़ करें और इस्राईल का सांस्कृतिक बहिष्कार करें।

माडल सूफ़ी शाड्री ने मिडिल ईस्ट आई से कहा कि फ़ेस्टिवल को रद्द कर दिया गया है लेकिन रिपोर्ट लिखे जाने तक इसके टिकट बिक रहे थे। बीडीएस का कहना है कि वर्ष 2018 में इसी प्रकार का कार्यक्रम होने वाला था लेकिन भारी दबाव के कारण उसे टालना पड़ा था।

ब्रिटिश वेबसाइट का कहना है कि कार्यक्रम का आयोजन हो या न हो बालीवुड के लिए इस्राईलियों की दीवानगी लगातार बढ़ रही है।

बीडीएस आंदोलन की दक्षिणी एशिया की समन्वयक अपूर्वा पीजी ने मिडिल ईस्ट आई से कहा कि फ़िलिस्तीनियों के अधिकारों के हनन और उन पर अत्याचार को क़ानूनी रंग देने के लिए बालीवुड का प्रयोग इस्राईल की सोची समझी रणनीति का हिस्सा है और इस्राईल अपनी इस कोशिश में कामयाब होता दिखाई दे रहा है। नेटफ़िलिक्स चैनल पर पहली नवंबर को ड्राइव नाम की फ़िल्म दिखाई जाएगी जिसके एक भाग की शूटिंग तेल अबीब की सड़कों पर की गई है।

यह फ़िल्म पश्चिमी देशों में इस्राईल की ख़राब हो चुकी साख को सुधारने के लिए बालीवुड के साफ़्ट पावर के प्रयोग का पहला उदाहरण है। इस्राईल ने नए बाज़ारों में क़दम रखने और पर्यटकों को लुभाने के लिए फ़िल्मों में पैसा निवेश करना शुरू किया है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण यही ड्राइव फ़िल्म है इसमें इस्राईल के पर्यटन मंत्रालय और प्रधानमंत्री नेतनयाहू के कार्यालय ने भी आंशिक रूप से फ़ाइनेन्सिंग की है।

मिडिल ईस्ट आई का कहना है कि इस्राईल के ग़ैर क़ानूनी क़ब्ज़े को क़ानूनी दिखाने के एजेंडो को भारतीय मीडिया में भी ख़ूब जगह मिल रही है जो इस्लामोफ़ोबिया फैलाने में पहले से पूरी तरह व्यस्त है।

मिडिल ईस्ट आई ने भारतीय मीडिया की भूमिका को रेखांकित करने के लिए एक टीवी कार्यक्रम का हवाला दिया जिसमें कहा गया कि भारतीय सिनेमा और इस्राईल के रिश्ते 1990 के दशक में उस समय शुरू हुए जब संवादहीन फ़िल्मों के ज़माने में बालीवुड में यहूदी इतिहास पर ज़ोर दिया गया। मज़े की बात तो यह है कि इस्राईल का अस्तित्व 1948 से शुरू हुआ है और संवादहीन सिनेमा उससे पहले ही समाप्त हो चुका था।

इस्राईल बालीवुड को अपने एजेंडे के लिए कितना महत्वपूर्ण समझता है यह उस समय और ज़ाहिर हुआ जब इस्राईली प्रधानमंत्री नेतनयाहू भारत के दौरे पर गए और उन्होंने बालीवुड के कलाकारों से लंबी मुलाक़ात की और उनके साथ फ़ोटो खिंचवाई। इसके बाद से भारत में इस्राईली प्रतिनिधि जब भी मौक़ा मिलता है बालीवुड को इस्राईल की तरफ़ खींचने की कोशिश ज़रूर करते हैं।

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