ब्लॉग

तुर्क राष्ट्रपति अर्दोग़ान की यह योजना बेहद ख़तरनाक है!

अरब जगत के प्रख्यात टीकाकार अब्दुल बारी अतवान का जायज़ाः बहुत से लोग अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प की मूर्खता की बात करते हैं और उनकी विदेश नीति को विशेष रूप से मध्यपूर्व के इलाक़े में पूरी तरह विफल मानते हैं।

यह बात सही हो सकती है लेकिन उन्होंने उत्तरी सीरिया से अचानक 2000 अमरीकी सैनिकों को बाहर निकालने का जो एलान किया और युद्धों को बेकार की चीज़ बताते हुए अपने कुर्द घटकों की उपेक्षा कर दी उससे यह पता चलता है कि वह पीछे हटने की रणनीति और हार स्वीकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं ताकि सीरिया में हस्तक्षेप के कारण अमरीका को जो 100 अरब डालर का नुक़सान हो चुका है उसे और बढ़ने से रोका जा सके।

तुर्की कई लक्ष्यों के तहत सीरिया के भीतर सैनिक कार्यवाही कर रहा है। सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य है सीरिया के भीतर 30 किलोमीटर चौड़ा और 500 किलोमीटर लंबा एक सेफ़ ज़ोन बनाया जाए जहां उन 35 लाख सीरियाई शरणार्थियों को बसाया जाए जो इस समय तुर्की में मौजूद हैं। तुर्क राष्ट्रपति अर्दोग़ान की यह योजना बेहद ख़तरनाक है जिसके बहुत भयानक परिणाम सामने आ सकते हैं।

अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने अचानक अमरीकी सेना को सीरिया से बाहर निकालने का एलान करके शायद अर्दोग़ान को एक ज़हरीला और ख़तरनाक उपहार दिया है। उन्होंने दरअस्ल तुर्क सेना को एक जाल में फंसा दिया जिससे निकल पाना उसके लिए बहुत मुश्किल हो जाएगा। शायद उसकी वही हालत हो जाए जो यमन में सऊदी अरब की हुई है तथा अफ़ग़ानिस्तान और इराक़ में अमरीका की हुई। अलबत्ता हम मानते हैं कि इन उदाहरणों में कुछ अंतर भी मौजूद हैं। तुर्की ने रूस से एस-400 मिसाइल डिफ़ेन्स सिस्टम ख़रीदा है इस ग़लती को ट्रम्प हरगिज़ माफ़ नहीं कर सकते।

कई दिशाओं से तुर्की की ओर ख़तरे बढ़ रहे हैं।

सबसे पहला ख़तरा यह है कि तुर्की को उन कुर्द फ़ोर्सेज़ का सामना करना पड़ेगा जिन्हें ट्रेनिंग और हथियार अमरीका से मिले हैं। कुर्द फ़ोर्सेज़ ने दाइश के ख़िलाफ़ ज़मीनी लड़ाई लड़ी है और उसे रक़्क़ा से बाहर निकाला है यानी वह प्रशिक्षित हैं।

दूसरा ख़तरा यह है कि सैनिक कार्यवाही के चलते तुर्की को भारी आर्थिक बोझ उठाना पड़ सकता है। सैनिक आप्रेशन के बाद इस इलाक़े में मौजूद लोगों और तुर्की में मौजूद शरणार्थियों को इस इलाक़े में पुनः बसाने और इलाक़े के संचालन के लिए एक बड़े बजट की ज़रूरत पड़ेगी। तुर्की चाहता था कि इस बजट का एक हिस्सा अमरीका उपलब्ध कराए लेकिन ट्रम्प ने पल्ला झाड़ लिया है। तुर्की की अर्थ व्यवस्था वैसे भी इस समय कठिन दौर से गुज़र रही है।

इस बात की पूरी संभावना मौजूद है कि सीरियाई सेना मैदान में उतर पड़े। सीरियाई सरकार कह चुकी है कि तुर्की ने सीरिया की राष्ट्रीय संप्रभुता पर हमला किया तो दमिश्क़ सरकार ख़ामोश नहीं रहेगी।

इस पूरे प्रकरण में रूस और सीरिया की सरकारों की ख़ामोशी से कई सवाल उठते हैं। क्या इसका यह मतलब है कि इस बारे में सरकारों के बीच पहले ही सहमति बन चुकी है?

कुछ तुर्क हल्क़े दबी ज़बान में यह बात भी कर रहे हैं कि कुर्द फ़ोर्सेज़ पर तुर्की के हमले को सीरिया, रूस और ईरान नज़रअंदाज़ करेंगे और इसके बदले इदलिब के इलाक़े में अन्नुस्रा फ़्रंट तथा अन्य चरमपंथी संगठनों पर सीरिया के हमले को तुर्की नज़रअंदाज़ करेगा। मगर सीरियाई सूत्रों का कहना है कि इस प्रकार की कोई सहमति नहीं है। सीरियाई सेना देश के हर भाग को चरमपंथियों के क़ब्ज़े से आज़ाद करवाएगी और सीरिया की धरती पर तुर्क सेना के हर हमले का जवाब दिया जाएगा।

कुर्दों की बात की जाए तो पीठ में छुरा घुंपवाने की उनकी आदत हो गई अतः अमरीका ने सीरिया से सैनिक निकालने का एलान करके कोई हैरत में डालने वाला क़दम नहीं उठाया है। बल्कि हो सकता है कि यह पूरे इलाक़े से अमरीका के बाहर निकलने की शुरुआत हो यानी अमरीका अब इराक़, सऊदी अरब, कुवैत बल्कि फ़ार्स खाड़ी में मौजूद तमाम अमरीकी छावनियों से अपने सैनिकों को वापस बुला ले जैसा कि ट्रम्प ने चुनावी कैंपेन में वादा किया था।

जब ट्रम्प ने क़तर की अलअदीद छावनी से अमरीकी वायु सैनिक कमान अमरीका की धरती पर स्थानान्तरित कर दी है, जब ट्रम्प ने समुद्री बेड़े और युद्धक जहाज़ फ़ार्स खाड़ी से निकाल कर हिंद महासागर में पहुंचा दिए हैं और साफ़ कह दिया कि वह कुर्दों का कोई व्यंग सुनने के लिए इसलिए तैयार नहीं हैं कि दाइश से लड़ने के बदले में अमरीका ने उन्हें पैसे और हथियार दिए तो इसका मतलब यही है कि इस व्यक्ति ने मध्यपूर्व के इलाक़े को उसके हाल पर छोड़ देने और अमरीकी सैनिकों को वापस बुलाने का फ़ैसला कर लिया है।


अब्दुल बारी अतवान

कुर्द घटकों से इतनी आसानी से पल्ला झाड़ लेना सऊदी अरब तथा अन्य अमरीकी घटकों के लिए बहुत बुरा इशारा है जिन्होंने अमरीकी समर्थन पर बहुत भरोसा किया था। ट्रम्प के ज़हरीले ख़ंजर अब औरों की भी पीठ और सीने में उतर जाने के लिए तैयार हैं बस देखना यह है कि अब किसकी बारी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *