विशेष

भारतीय हिंदी मीडिया अब हिन्दुत्व मीडिया बनकर आत्मघाती हमलावर तैयार कर रहा है

Wasim Akram Tyagi
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मुल्लाओ को दो स्थान
कब्रस्तान या पाकिस्तान।

यह पोस्टर ‘आज तक’ अपने ट्विटर से पोस्ट किया है। बहुत जल्द ‘टीबी’ वाला ऐसे पोस्टर जारी करेगा। आप यह कहकर दामन नहीं छुड़ा सकते कि मैं टीवी नही देखता। आप नहीं देख रहे हैं इसका मतलब यह नहीं कि कोई भी नहीं देख रहा है। बहुत बडा वर्ग टीवी देखता है, उस पर होने वाली हिन्दू मुस्लिम बहस जिसमें मुसलमानों को इस देश पर बोझ साबित करने की साजिशें रची जाती हैं। वह सब देखता है, नफरत देखता है, नफरत सीखता है। धीरे धीरे वह वर्ग रोबोट में तब्दील हो रहा है, उसे जहां भी मौका मिलता है वहीं वह इस नफरत को ज़मीन पर उतार देता है। जैसे दो दिन पहले मेरठ मे हुआ जब एक समुदाय विशेष के 18 वर्षीय नौजवान की बाइक दूसरे समुदाय के लड़के से टकरा गई तो उस नौजवान को भीड़ ने पीट पीट कर मौत के घाट उतार दिया, और एक की टांग तोड़ दी गई। भारतीय हिंदी मीडिया अब हिन्दुत्व मीडिया बनकर आत्मघाती हमलावर तैयार कर रहा है। इसे मीडिया कहना मीडिया का अपमान है इसे आतंकी संगठन कहा जाए तो ठीक रहेगा।

p k mehta
@pkm370
1991 के बाद से हमने “Indian socialism” को छोड पूंजीवाद अपनाया और अब क्रोनिकेपिटेलिज्म तक पहूंच गये हैं। हर संकट की स्थिति में सत्ता पहले स्वयं को बचाएगी फिर कोरपरेटस को और फिर अंत में आम जनता को। यही हो रहा है। आम जनता का नंबर अभी नहीं लगा है…. लगेगा या नहीं कहा नहीं जा सकता।

ANUJ BAJPAI
@Real_Anuj
अपनी हार तय मानकर सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने कहा है कि हम राममंदिर पर अपना दावा छोड़ने को तैयार हैं पर बनारस व मथुरा जैसे देश के अन्य 1200 मंदिरों पर हमारा कब्जा बना रहेगा
मियां अब हिन्दू एकजुट हो रहे हैं 1200 मन्दिर तो छोड़ो अब 12 इंच भी नहीं मिलेगा।
जय श्री राम
#राममंदिर_निर्माण


Aditya Menon
@AdityaMenon22
“RSS should be banned…Hindu Rashtra is against country’s interests”: Akal Takht Jathedar Giani Harpreet Singh.

He had earlier told Sikhs to protect Kashmiri women

At a time many have crawled, the Akal Takht chief has shown a lot of spine #Respect


Harleen Kaur
@HarleenSKaur
जिस तरह से बेरोजगारी पूरे देश मे बढ़ रही थी उसे देख कर योगी जी ने के बहुत ही अच्छा कदम उठाया है।

25000 होमगार्ड की नौकरी को आपने सर की बाल तरफ साफ़ कर गए और मीडिया ने चु तक नही कर पाई।

बहुत बढ़िया फैसला योगी आगे भी ऐसे कठोर कदम उठाते रहे हमे आप से बहुत उम्मीदें है।

Khalid Aijaz
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एक मोहल्ले की मस्जिद में तामीर व मरम्मत का काम शुरू हुआ तो मतलूबा रक़म इकट्ठी होने में देर हो गई।

कमेटी इंतिज़ामियां ने इमाम साहब से कहा कि मोहल्ले के उस नुक्कड़ वाला जो बन्दा है जो बहुत बड़ा ताजिर है मगर अपने फ़सक़ व फ़जूर में इंतिहा को पहुंचा हुआ है

अगर आप में हिम्मत है तो उससे बात कर लें मुमकिन है कोई सूरत बन जाए

इमाम साहब ने हामी भर ली और एक दिन शाम को जा कर उसका दरवाज़ा खटखटाया

चंद लम्हे बाद ताजिर साहब अंदर से बाहर हुए

इमाम साहब ने अपने आने की वजह बताई तो साहिबे ख़ाना सटपटा गए, और बोले कि एक तो तुम्हारे स्पीकरों के बार-बार चलने से हमारा सुकून बर्बाद है, ऊपर से तुम मेरे घर तक आ पहुंचे हो

और दूसरे मोहल्ले दार मर गए हैं जो मुझ से चन्दा लेने की ज़रूरत आन पड़ी…

इमाम साहब ने कहा, साहब, अल्लाह का दिया हुआ मौक़ा है आप के लिए, आपके दस्त-ए-ताऊन की सख़्त ज़रूरत है, मैं ख़ाली हाथ नही जाना चाहता

अल्लाह तआला आप के माल व जान में बरकत देगा

ताजिर ने इमाम साहब से कहा लाओ अपना हाथ मैं तुम्हें चंदा दूं

इमाम साहब ने जैसे ही हाथ आगे बढ़ाया
उस ताजिर ने इमाम साहब के हाथ पर थूक दिया

इमाम साहब ने बिस्मिल्लाह पढ़ कर यह थूक वाला हाथ अपने सीने पर मल लिया और दूसरा हाथ उस ताजिर की तरफ़ बढ़ाते हुए कहा “यह इमदाद तो मेरे लिए हो गई, अब इस हाथ पर अल्लाह के लिए इमदाद रख दीजिए”

उस ताजिर को यह बात न जाने कहाँ पर जाकर लगी

कि उसकी आंखों में आंसू आ गए और मुंह से استغفراللہ استغفراللہ निकलना शुरू हो गया

कुछ लम्हात के बाद शर्मिंदा हुआ और अपने जज़्बात पर क़ाबू पाते हुए धीमे से लेहजे में बोला,

बताईये कितने पैसों की दरकार हैं ?

इमाम साहब ने कहा, अभी तीन लाख रुपये से काम चल जाएगा

ताजिर ने कहा, नहीं यह बताएं आपको मुकम्मल प्रोजेक्ट के लिए टोटल कितने पैसों की दरकार हैं ?

इमाम साहब ने कहा, हमें मुकम्मल तौर पर आठ लाख रुपये दरकार हैं

ताजिर साहब अंदर जाकर आठ लाख रुपये का एक चेक बना कर लाए और इमाम साहब को देते हुए कहा, आज से इस मस्जिद का जो भी ख़र्चा हो मुझसे ले लीजियेगा और आज से इस मस्जिद की तमाम ज़िम्मेदारी मेरी है,

यह सुनकर इमाम साहब खुश हुए और दुआएं देते हुए वापस आ गए

सबक़..

बात करने का अंदाज़, सलीक़ा, तमीज़ और अदब आ जाए तो बड़े से बड़ा मुतकब्बिर और फ़ासिक़ शख़्स भी हिदायत पा सकता है मगर अफ़सोस हमारे कितने ही बेतुके और तंज़िया जुमलों से लोग नमाज़, क़ुरआन और दीन से पीछे रह गए हैं

अगर इस्लाम को फैलाना है तो हमें अच्छे अख़लाक़ और मीठे बोल की रवायत डालनी होगी।

 

(लेख में व्यक्त विचार, लेखक के निजी विचार हैं. आलेख में दी गई किसी भी सूचना की तथ्यात्मकता, सटीकता, संपूर्णता अथवा सच्चाई के प्रति TEESRI JUNG HINDI उत्तरदायी नहीं है. आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं)

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