देश

“भारत हिन्दु राष्ट्र हैं” : भारत में मुसलमान कितने सुख में हैं, जानिये ‘कितनी सच्चाई है आरएसएस प्रमुख के दावे में’

दुनिया में मुसलमानों की दशा अलग अलग देशों में अलग अलग तरह की है और वास्तव में उनकी दशा का उनके मुसलमान या गैर मुस्लिम होने से संबंध नहीं है बल्कि उस क्षेत्र और देश की स्थिति और दशा से है।

यही वजह है कि अफ्रीका में रहने वाले मुसलमान, अन्य अफ्रीकी नागरिकों की तरह, मध्य पूर्व के अधिकांश देशों के मुसलमानों की तरह जीवन सुखी रहने के सपने ही देख सकते हैं। म्यांमार के मुसलमान, बांग्लादेश में बेहतर जीवन की तलाश में जाते हैं और बांग्लादेश व भारत व पाकिस्तान के मुस्लिम और गैर मुस्लिम , बेहतर जीवन के लिए मध्य पूर्व के मुस्लिम देशों का रुख करते है।

मध्य पूर्व के सऊदी अरब, दुबई, क़तर, कुवैत जैसे देशों की भारत के मुसलमानों और हिन्दुओं को सुखी जीवन में भूमिका से कोई इन्कार नहीं कर सकता तो सवाल यह है कि भारत में मुसलमान कितने सुख में हैं?

इस सवाल का जवाब बहुत लंबा और बहुत संक्षिप्त दोनों हो सकता है। भारतीय मुसलमानों की दशा के बारे में ठोस और विश्वस्त स्रोत के रूप में हालिया कई वर्षों से सच्चर कमेटी की रिपोर्ट को पेश किया जाता रहा है जिसे पढ़ने के बाद यह यक़ीन हो जाता है कि भारत में मुसलमान, नये दलित हैं और वह शिक्षा, व्यापार, नौकरी और स्वास्थ्य सहित जीवन के हर क्षेत्र में भारत में अन्य धर्मों के अनुयाइयों से बहुत पीछे हैं।

भारत में दुनिया की तीसरी बड़ी मुस्लिम आबादी रहती है और उसका यह हाल है कि कई मामलों में वह एससी और एसटी से भी अधिक पिछड़े हैं। ज़रा सी बात पर दंगे भड़कते हैं और दसियों घरों और दुकानों को जला दिया जाता है। भीड़ द्वारा हत्या ने तो माहौल को बेहद असुरक्षित बना दिया। भारत में होने वाले दंगों और भीड़ द्वारा हत्या के आंकड़ों से पता चलता है कि अल्पसंख्यक किस प्रकार से जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

शिक्षा, विकास, नौकरी के साथ ही साथ सुरक्षा में भी मुसलमानों को यह लगता है कि वह सब से अधिक असुरक्षित हैं। अंतरराष्ट्रीय संगठनों की रिपोर्टों में भारत में अल्पसंख्यकों की दशा पर चिंता प्रकट की जाती है, भारत के सामाजिक कार्यकर्ता और मानवाधिकार कार्यकर्ता धर्म व संप्रदाय के नाम पर भारत में बने माहौल पर चिंता प्रकट कर रहे हैं और आरएसएस के प्रमुख कह रहे हैं कि भारत हिन्दु राष्ट्र और भारत में मुसलमान सब से अधिक सुखी हैं तो कितनी सच्चाई है उनके इस दावे में?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *