धर्म

मुश्किल वक़्त में युनुस अलैहिस्सलाम ने कौन सी दुआ की

Irfan IA
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मुश्किल वक़्त में युनुस अलैहिस्सलाम. की दुआ हर मुसलमान को याद होना चाहिए
आप देखेंगे कि कुरान ने कई नबियों का ज़िक्र किया है और उनका किस्सा बयान किया है,

हर किस्से में आप पाएंगे कि हर एक पैगंबर दुःख, मुश्किल और आजमाइशों से गुजरा और उनके ये सभी हालात कुरान में हैं। और पैगम्बरों ने अपने मुश्किल हालात में जो दुआ पढ़ी और कुबूल हुई कुरान ने उसी दुआ को उस पैगम्बर के किस्से में बयान किया है ताकि आने वाले तमाम इंसान ऐसी दुआओं का फायदा उठायें ।

हजरत यूनुस (अलैहिस्सलाम.) अल्लाह तआला के भेजे हुए पैगंबर थे, उन्होंने मुश्किल वक़्त में जब वह मछली के पेट में थे दुआ पढ़ी, और इसी दुआ से उन्हें मदद मिली। इस दुआ में बंदा अपनी ज्यादतियों और गुनाहों का एतराफ करता है और अल्लाह की पाकी बयान करता है |

इस दुआ को पढ़ें , और याद करने की कोशिश करें ताकि जब भी आपको अपनी ज़िन्दगी में किसी भी मुश्किल का सामना करना पड़े, तो आप जब चाहे तब इसे पढ़ सकें और दुसरे मुसलमानों को भी सिखा सकें |

जब भी कोई दुआ मांगे तो…और उलमा फरमाते हैं कि जब भी कोई दुआ मांगे पहले तीन बार इस दुआ को ज़रूर पढ़े इंशा अल्लाह दुआ ज़रूर कुबूल होगी |

अगर किसी मुक़दमें में फंसे हो या किसी तकलीफ और मुसीबत से दो चार हों तो इस दुआ को एक या कई लोग मिलकर सवा लाख बार पढ़े

नोट : इस वज़ीफे का कई बार तजरबा किया गया है

दुआ ये है …

English : La Ilaha Illa Anta Subhanaka Inni Kuntu Minaz Zalimeen

Hindi : ला इलाहा इल्ला अंता सुब हानाका इन्नी कुन्तु मिनज़ ज़ालिमीन

तर्जुमा : (युनुस अलैहिस्सलाम ने अल्लाह को पुकारा ) आप के सिवा कोई माबूद नहीं और आपकी ज़ात हर ऐब से पाक है यक़ीनन मैं ही जालिमों में था


Irfan IA
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#पत्थर ने पीछा किया

हज़रत सय्यदना लूत अलैहिस्सलाम की क़ौम का एक ताजिर उस वक़्त कारोबारी तौर पर मक्का शरीफ की ज़्यारत को आया था उसके नाम का पत्थर वहीँ पहुँच गया मगर फरिश्ते ने ये कहकर रोक लिया के ये अल्लाह का हरम है

चुनाचे वो पत्थर 40 दिन तक हरम के बाहर ज़मीन व आसमान के दरमियान मुअल्लक़ (लटका रहा) रहा जैसे ही वो ताजिर (बिजनिसमैन) फारिग हो कर मक्का से निकल कर हरम से बाहर हुआ वो पत्थर उसपर गिरा और वो वहीँ हलाक हो गया | (मुकाशिफतुल क़ुलूब)


Irfan IA
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बदफेली बदतरीन गुनाह

ख़िन्ज़ीर (सुअर) इगलाम बाज़ होता है :- मुफ़स्सिरे शहीर हकीमुल उम्मत हज़रत मुफ़्ती अहमद यार खां अलैहि रहमतुल्लाह हन्नान फरमाते हैं: फाहिशा (बेहयाई) वो गुनाह है जिसे अक़्ल भी बुरा समझे|

अगरचे बदतरीन गुनाहे कबीरा है मगर उसे रब ने फाहिशा यानि बेहयाई न फ़रमाया क्योंकि नफ़्से इंसानी इससे घिन नहीं करती| बहुत से अक़्लमंद कहलाने वाले इसमें गिरफ्तार हैं

मगर इगलाम यानि बद फेली गन्दा काम तो ऐसी बुरी चीज़ है के जानवर भी इससे मुतानफ्फिर (यानि नफरत) हैं सिवाए सुअर के लड़कों से इगलाम हराम क़तई है इसके हराम होने का मुनकिर यानि इंकार करने वाला काफिर है लूति यानि इगलाम बाज़ मर्द “औरत के क़ाबिल नहीं रहता | (नुरुल इरफ़ान)

अल्लाह अज़्ज़वजल की बारगाह में सबसे ज़्यादा नापसंदीदा गुनाह :-

हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम ने एक मर्तबा शैतान से पुछा के अल्लाह अज़्ज़वजल को सबसे बढ़कर कोनसा गुनाह नापसंदीदा है?

इब्लीस बोला: अल्लाह तआला को ये गुनाह सबसे ज़्यादा नापसंदीदा है के मर्द, मर्द से बद फेली करे औरत, औरत से अपनी ख्वाइश पूरी करे | (तफ़्सीर रुहुल बयान)

ख़ातामुल मुर्सलीन रहमतुलिल्ल आलमीन सलल्लाहु अलैहि वसल्लम के फरमाने इबरत निशान है :-
जब मर्द मर्द से हराम कारी करे तो वो दोनों ज़ानी हैं और जब औरत औरत से हराम कारी करे तो वो ज़ानिया है | (अस्सुनानुल कुबरा)

सुलगती लाशें :- हज़रत सय्यदना ईसा रूहुल्ला अलैहिस्सलाम ने एक बार जंगल में देखा एक ” मर्द ” पर आग जल रही है आपने पानी लेकर आग बुझानी चाहि तो आग ने मर्द की सूरत इख्तियार कर ली

हज़रत सय्यदना ईसा रूहुल्ला अलैहिस्सलाम ने अल्लाह तआला की बारगाह में अर्ज़ की या अल्लाह इन दोनों को अपनी असली हालत पर लोटादे ताके में इनसे इनका गुनाह पूंछू

चुनाचा मर्द और अमरद आग से बाहर आ गए मर्द कहने लगा या रूहुल्ला अलैहिस्सलाम मेने इस अमरद से दोस्ती की थी अफ़सोस शहबत मगलूब होकर मेने शबे जुमा इससे बदफेली (गन्दा काम) की दुसरे दिन भी काला मुँह किया

एक नसीहत करने वाले ने खुदा का खौफ दिलाया मगर में न माना फिर हम दोनों मर गए अब बारी बारी आग बनकर एक दुसरे को जलाते है और हमारा ये अज़ाब क़यामत तक है | अल्लाह की पनाह (नुज़हतुल मजालिस)

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