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राजस्थान क़ायमख़ानी बिरादरी को तालीम व सियासत के पथ पर तेज़ क़दम बढाने होगे

।अशफाक कायमखानी।जयपुर।राजस्थान के अलग अलग क्षेत्र मे देहाती परिवेष मे रहने वाली मुस्लिम समुदाय की कुछ बिरादरियों मे से शेखावाटी-बीकाणा व मारवाड़ के हिस्सों मे खासतौर पर निवास करने वाली कायमखानी बिरादरी को शिक्षा व सियासत मे तेजी से कदम बढाते हुये शासन व प्रशासन मे अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी वरना आने वाले दिन काफी कष्टदायक हो सकते है।

हालांकि आज के समय कुछेक कायमखानी पुलिस व प्रशासनिक सेवा मे बतौर अधिकारी नजर आ रहे है। लेकिन उनकी सेवानिवृत्ति की जो शुरुआत हो चली है वो अब अगले तीन साल मे नजर आ रहे अधिकारी सेवानिवृत्ति के तमगे पा चुके होगे। अगर उनके बदल मे नये अधिकारियों का सीलसीला शुरु नही हो पाया तो यह क्षेत्र भी खाली खाली व सूना सूना नजर आयेगा।


हालांकि पीछले कुछ दिनो से युवाओं के दिलो मे फौज मे सिपाही भर्ती होने की ललक बढने के सूखद परिणाम सामने आये है। साथ ही चिकित्सक व इंजीनियर बनने का चलन भी दिल को शकून दे सकता है। पर अफसोस है कि फौज का सिपाही अपनी फौज की सेवा मे खास ओहदे वाईज कोई बडा मुकाम नही पा रहे है। वहीं चिकित्सक व इंजीनियर अपने लाईन का काम तो कर रहे है। लेकिन भारतीय लोकसेवा आयोग द्वारा संचालित सिविल सेवा परीक्षा मे सफल होने वालो मे अधीकांश चिकित्सक व इंजीनियर की सूची मे कोई कायमखानी चिकित्सक व इंजीनियरस युवाओं का नाम शामिल नजर नही आता है।

कायमखानी बिरादरी से मरहूम आलम अली खा, मरहूम भालू खा, मरहूम रमजान खां, मरहूम भंवरु खा के अतिरिक्त यूनूस खा व वर्तमान मे हाकम अली खां विधायक है एवं बाकी विधायक रह चुके है। जिनमे से मरहूम रमजान खा राज्य मंत्री व यूनूस खा दो दफा केबिनेट मंत्री भी राजस्थान की सरकार मे रह चुके है। डा.निजाम मोहम्मद, हिदायत खा धोलीया, सलावत खा व लियाकत अली खा राज्य स्तरीय बोर्ड-आयोग के अध्यक्ष भी रह चुके है। सवैधानिक पदो मे जस्टिस भंवरु खा हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधिपति है। वही जस्टिस मोहम्मद रफीक न्यायाधिपति वर्तमान मे है। वही राजस्थान लोकसेवा आयोग के चेयरमैन पद पर हबीब खां गोरान रह चुके है। लेक उक्त सभी बाते इतिहास के पनो मे दर्ज होने के अलावा जाकीर हुसैन के भारतीय प्रशासनिक सेवा व मोहतरमा असलम खान के भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी होने के अतिरिक्त कोई खास उपलब्धि सामने नजर नही आती। इससे अलग हटकर वर्तमान समय मे खानू खान के वक्फ बोर्ड चेयरमैन बनने की उम्मीद के अलावा दो संवेधानिक पदो पर दो अलग से नियुक्ति अन्य दो लोगो को मिलनी की सम्भावना जताई जा रही है।

राजस्थान के शेखावाटी-बीकाणा व मारवाड़ के अलावा भीलवाड़ा जिले मे निवास करने वाली खेतीहर बिरादरी कायमखानी के अतिरिक्त अलवर-भरतपुर मे मेव, जैसलमेर-बाडमेर व बीकानेर के कुछ क्षेत्र मे निवास करने वाले सिंधी मुस्लिम व सवाईमाधोपुर क्षेत्र के गद्दी व खेलदार बिरादरीयां परम्परागत किसान प्रवृत्ति के माने जाते है। खेती की जमीन कम होने व क्रषि घाटे का सोदा होने के कारण उक्त बिरादरियों के हालात कभी विचारणीय बन चुके है। परम्परागत हाथ का हूनर उक्त बिरादरियों के पास नही होने के कारण वास्तव मे इनकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो चली है। हां सरकारी नोकरी पाने की निरंतर कोशिश जरुर करते है। इनके मुकाबले शहरी मुस्लिम बिरादरियों के पास परम्परागत हाथ का हूनर व व्यापारीक जहन होने के चलते शहरी मुस्लिम बिरादरी खुशहाल मानी जाती है।

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