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सीरिया का तेल और गैस चोर अमरीकी राष्ट्रपति, ट्रम्प की हरकतें माफ़ियाओं और डाकुओं जैसी हैं!

ट्रम्प ने औपचारिक रूप से माना कि वह सीरिया का तेल और गैस चुरा रहे हैं, अमरीकी राष्ट्रपति ने कंपनियों से कहा है कि वह इस आमदनी को संभालें! अमरीकी राष्ट्रपति और माफ़ियाओं में क्या फ़र्क़ रह गया है!

हम तो यह समझ रहे थे कि सीरिया में दैरुज़्ज़ूर के पूर्वी इलाक़ों में तेल और गैस के भंडारों पर अगर अमरीकी सेनाएं और टैंक क़ब्जा करके बैठे हैं तो उद्देश्य यह है कि उन्हें आतंकी संगठन दाइश के क़ब्ज़े में जाने से रोका जाए जिसने तेल और गैस से होने वाली आमदनी की मदद से अपनी ताक़त काफ़ी बढ़ा ली थी।

लेकिन हमारा यह विचार तब ग़लत साबित हुआ जब हमने यह पढ़ा और अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प को यह प्रस्ताव देते हुए सुना कि अमरीकी तेल कंपनियां इस इलाक़े के तेल को अपने नियंत्रण में लें और उसका निर्यात करें और इससे हासिल होने वाली आमदनी अमरीकी ख़ज़ाने में डाली जाए।

हमारी समझ में यह बात तो आती है कि आतंकी संगठन दाइश सीरिया का तेल चुरा रहा था और उसकी आमदनी से अपना ख़र्च चला रहा था और अपने सदस्यों की तनख्वाहें दे रहा था क्योंकि उसने लगभग ढाई लाख वर्ग मिलोमीटर के इलाक़े पर कब्ज़ा कर रखा था जहां 70 लाख से अधिक लोग रहते थे। यह इलाक़ा इराक़ के मूसिल नगर से सीरिया के रक़्क़ा नगर तक फैला हुआ था। हमारी समझ में यह बात इसलिए आती है कि दाइश तो एक आतंकी संगठन था जो किसी भी क़ानून को मानने के लिए तैयार नहीं था। लेकिन यही चोरी खुले आम अमरीकी प्रशासन करे जो दुनिया के नेतृत्व का दावेदार है, जो अन्य देशों पर लोकतंत्र न होने और और मानवाधिकार का सम्मान न करने के नाम पर प्रंतिबंध लगाता है और उन्हें सज़ाएं देता है तो यह दिमाग़ को झटका लगने वाली चीज़ है, अक़्ल इसे मानने के लिए तैयार नहीं होती लेकिन जब ट्रम्प जैसा सौदागर अमरीका का राष्ट्रपति बन जाए तो फिर सब कुछ संभव है क्योंकि ट्रम्प को पैसे कमाने के अलावा और कुछ नहीं आता।

ट्रम्प की सारी हरकतें माफ़ियाओं और डाकुओं जैसी हैं, अमरीका जैसे राष्ट्रपति की नहीं हैं। फुरात नदी के पूर्वी इलाक़ों में मौजूद तेल और गैस सीरियाई जनता की संपत्ति है अमरीकी फ़ोर्सेज़ को यह अधिकार नहीं है कि वहां क़ब्ज़ा करके तेल और गैस बेचें।

यह शर्म की बात है कि दिन दहाड़े क़ानून की दुशमन इस अमरीकी सरकार के हाथों सीरिया की दौलत लुटते देखकर दुनिया ख़ामोश है। इस सरकार ने साबित कर दिया है कि वह अंतर्राष्ट्रीय क़ानून व्यवस्था के लिए दाइश से भी ज़्यादा ख़तरनाक है। अमरीका यहां से 3 करोड़ डालर माहाना की रक़म कमाना चाहता है जबकि इस इलाक़े से और भी तेल निकलने की गुंजाइश और क्षमता मौजूद है इसलिए कि यहां नए कुओं की खोज भी हो सकती है।

यह ग़ैर क़ानूनी अमरीकी क़ब्ज़ा है, यह संपत्ति को ग़ैर क़ानूनी तौर पर लूटने का मामला है, इस मुद्दे को लेकर इलाक़े की प्रतिरोधक ताक़तों की जवाबी कार्यवाही शुरू हो सकती है जिस तरह इराक़ में अमरीकी सैनिकों पर स्थानीय संगठनों ने हमले शुरू कर दिए थे।

सीरियाई राष्ट्र, अरब जनता और इस्लामी प्रतिरोधक मोर्चा इस चोरी को हरगिज़ बर्दाश्त नहीं करेगा। जिस तरह इस मोर्चे ने सीरिया को बांटने की अमरीकी साज़िश को नाकाम बनाया है उसी तरह वह एक बार फिर शहीदों की क़ुरबानी पेश करके सीरिया की संपत्ति को लुटने से भी बचाएगा। बस थोड़ा इंतेज़ार करना पड़ेगा।

साभार रायुल यौम

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