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ईद की तरह दीपावली पर फ़ितरे के रूप में कुछ धन निकलना अनिवार्य करने से उस दिन कोई भूखा न रहेगा

‎Mohd Sharif‎
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दीवाली से पहली रात को एक 12 वर्षीय लड़की के हिस्से की आधी रोटी भी जब उसके भूखे भाई ने खा ली तो भूख सहन न होने के कारण वह लड़की आग लगा कर मर गई और इस तरह उस बदनसीब ने हमेशा के लिये भूख से निजात पा ली।

जिस राज्य में देश की एक बेटी दीपावली जैसे त्यौहार पर आधी रोटी से वंचित हो जाने के कारण जान देने पर मजबूर हो गई हो और धर्मोन्माद में ग्रस्त शासक केवल दीये जलाने की ऐय्याशी में जनता के अरबों रुपये खर्च देता हो तो ऐसी परिस्थिति में सरकार से किसी जनहित की आशा न करके आम नागरिकों को सामाजिक व्यवस्था के द्वारा ऐसा नियम लागू करना चाहिए जिससे इस तरह की घटना दोबारा न हो और कम से कम किसी त्यौहार की ख़ुशी में ग़रीब लोग भी शरीक हो सकें।

इसके लिए ईद के त्यौहार पर निकाले जाने वाले फ़ितरे जैसी व्यवस्था को लागू करना ही काफ़ी होगा। ध्यान रहे ईद पर हर मुसलमान अपने परिवार के सभी सदस्यों की ओर से पौने दो किलो गेहूं या उसकी क़ीमत के बराबर धन ऐसे ग़रीबों को देता है जो धनाभाव के कारण ईद नहीं मना सकते हैं। इस धन को फ़ितरा कहते हैं और यह न्यूनतम है क्योंकि अगर कोई चाहे तो इससे अधिक भी दे सकता है। इस तरह कोई भी मुसलमान ग़रीबी के कारण ईद मनाने से महरूम नहीं रहता है। फ़ितरा निकालने की अनिवार्यता के कारण ही इस ईद को फ़ितरे वाली ईद या ईद-उल-फ़ितर कहते हैं।

अगर ऐसी व्यवस्था दीपावली के त्यौहार पर केवल सामाजिक रूप में लागू कर दी जाए तो ग़रीबी का दुःख झेल रहा हिन्दू समाज का एक बहुत बड़ा भाग त्यौहार की ख़ुशियों में भी शामिल हो सकेगा और अमीरों की ऐय्याशियों को देख कर कुंठाग्रस्त होने से भी बचा रहेगा। इस्लाम से और मुस्लिम समाज से नफ़रत करने के कारण हिन्दू समाज के कुछ लोग इस तरह की व्यवस्था को इस्लाम की नक़ल के कारण धर्म से जोड़ कर यदि बुरा समझें तो उनसे केवल इतना ही कहा जा सकता है कि इसके लिए फ़ितरा शब्द प्रयोग न करके कोई दूसरा शब्द बना लें और इस तरह निकाले जाने वाले धन का मापदण्ड भी बदल दें।

जनता के दुःख दर्द से बेफ़िक्र सरकार के मुंह पर तमांचे के लिए तो एक छोटी सी घटना का उल्लेख ही काफ़ी है जिसमें दीपावली पर जलाए गए लाखों दीयों में कुछ दीयों में बचे हुए तेल को एक ग़रीब बच्ची बोतल में इकट्ठा कर रही है और यह करते हुए चोरी में पकड़े जाने के अन्देशे से दहशतज़दा भी है।

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