धर्म

बाग़ के मालिक दूर से सब कुछ देख रहे थे!

रबीउल अव्वल महीने की एक रात थी। मक्के का आसमान तारों से जगमगा रहा था। आसमान में रहने वाले ईश्वरीय अमानत को देने के लिए ज़मीन पर आ गये थे। पैग़म्बरे इस्लाम की माता हज़रत आमिना चार महीना पहले अपने पति के दुनिया से चले जाने के ग़म में थीं।

उनका समूचा अस्तित्व प्रकाश से चमक रहा था। उनकी गोद में मानवता को मुक्ति दिलाने वाले सूरज का उदय हुआ और हज़रत मुहम्मद के आगमन से मानवता के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया।

इस्लाम धर्म की शिक्षा के अनुसार एक मुसलमान दूसरे मुसलमान का भाई है और किसी भी मुसलमान को अपने दूसरे मुसलमान भाई को काफिर कहने का अधिकार नहीं है। इस संबंध में इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम फरमाते हैंः ”जब एक मोमिन अपने दूसरे भाई से उफ कहता है तो वह उससे अलग हो जाता है और अगर यह कहता है कि तुम काफिर हो तो उनमें से एक काफिर हो जाता है और अगर उस पर आरोप लगाता है तो जिस तरह से पानी में नमक घुल जाता है उसी तरह इस्लाम उसके दिल से पिघल कर निकल जाता है।

महान ईश्वर पवित्र कुरआन के सूरे अहज़ाब की 21वीं आयत में कहता हैः ”बेशक पैग़म्बर का जीवन तुम्हारे लिए आदर्श है और जो ईश्वर की दया और प्रलय के दिन की आशा करते हैं वे उसे अधिक याद करते हैं।“

पैग़म्बरे इस्लाम ने सर्वसमर्थ ईश्वर की उपासना करके वह स्थान प्राप्त कर लिया जिस स्थान तक महान ईश्वर के क़रीबी फरिश्ते जिबरईल भी नहीं पहुंच सके। ईश्वर के निकट इतना महान स्थान होने के बावजूद पैग़म्बरे इस्लाम लोगों के मध्य साधारण तरीक़े से रहते थे इस प्रकार से कि जब कोई अजनबी आता था तो उसके लिए यह पहचानना कठिन हो जाता था कि लोगों में पैग़म्बरे इस्लाम कौन हैं। जब कोई नया व्यक्ति आता था तो वह लोगों से पूछता था कि तुममें मोहम्मद कौन हैं? तो पैग़म्बरे इस्लाम विन्रमता कहते थे कि मैं मोहम्मद हूं। पैग़म्बरे इस्लाम के सेवक अनस बिन मालिक कहते हैं ”लोग पैग़म्बर से अधिक किसी से भी प्रेम नहीं करते थे। इसके बावजूद जब वह आते थे तो कोई उनके सम्मान में खड़ा नहीं होता था क्योंकि सबको पता था कि पैग़म्बर इस कार्य को पसंद नहीं करते हैं।“


मक्का नगर के लोगों ने मज़ाक उड़ा कर और पत्थर मार कर अंतिम ईश्वरीय दूत को नगर से निकाल दिया। पैग़म्बरे इस्लाम दुःखी व क्षुब्ध मन के साथ नगर के किनारे बाग़ में एक पेड़ के नीचे बैठ गये। आसमान की ओर देखा और कहा हे मेरे पालनहार! हर दयालु से अधिक तू दयालु व कृपालु है। तू कमज़ोरों का और मेरा पालनहार है। तेरी राह में हर कठिनाई आसान है परंतु हे मेरे पालनहार मेरे लिए तेरी सहायता अधिक प्रिय है। मैं तेरी शरण चाहता हूं तेरा प्रकाश हर अंधेरे को समाप्त कर देगा।

महान ईश्वर से पैग़म्बरे इस्लाम की प्रार्थना इतनी आकर्षक थी कि बाग़ के मालिक और मूर्तियों की पूजा करने वाले अत्बा और शैबा को उसने परिवर्तित कर दिया और उन सब ने अपने दास से कहा कि पैग़म्बर के लिए अंगूर ले जाये।

दास अंगूर लेकर पैग़म्बरे इस्लाम के पास गया और वह बड़ी उत्सुकता से पैग़म्बरे इस्लाम का आध्यात्मिक चेहरा निहारने लगा। वह इस सोच में था कि लोगों ने इस महान व्यक्ति को क्यों कष्ट पहुंचाया?

 

पैग़म्बरे इस्लाम दास को देखकर अपनी जगह से खड़े हो गये और उसका आभार व्यक्त किया। जब पैग़म्बरे इस्लाम ने अंगूर का एक दाना अपने मुंह में रखा तो कहा बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम यानी उस ईश्वर के नाम से जो बहुत दयालु व कृपालु है। दास ने आश्चर्य से कहा जो वाक्य आपने कहा यहां के लोग उसे नहीं जानते हैं। क्या आप अपने कार्य का आरंभ लात और उज़्ज़ा नामक बुतों के नाम से नहीं करते हैं?

पैग़म्बरे इस्लाम ने जवाब में कहा हर चीज़ उस पालनहार की है जो बहुत दयालु है, इसके बाद पैग़म्बरे इस्लाम ने उससे पूछा तुम कहां के रहने वाले हो? इस पर दास ने कहा मैं नैनवां का रहने वाला हूं यह वही शहर है जहां के हज़रत यूनुस रहने वाले थे।

पैग़म्बरे इस्लाम ने बहुत ही प्रेम भाव से कहा मेरे भाई यूनुस ईश्वरीय दूत थे जिस तरह मैं ईश्वरीय दूत हूं और लोगों के मार्गदर्शन और उनकी मुक्ति के लिए आया हूं। उसके बाद पैग़म्बरे इस्लाम ने हज़रत यूनुस के बारे में पवित्र कुरआन की आयत की तिलावत की। आत्मा को छू लेने वाली पवित्र कुरआन की आयत ने दास को परिवर्तित कर दिया। उसने पैग़म्बरे इस्लाम का हाथ चूमा।

बाग़ के मालिक दूर से सब कुछ देख रहे थे। उन्होंने डांट कर दास को बुलाया। दास अंतिम ईश्वरीय दूत के दर्शन से बदल चुका था और उसने बाग़ के मालिकों की आवाज़ पर ध्यान दिये बिना कहा यह आदमी जो पेड़ के नीचे बैठा है, ज़मीन पर रहने वाले समस्त इंसानों का सरदार है। यह वही पैग़म्बर है जिसकी शुभ सूचना ईसा मसीह ने दी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *