विशेष

बिज़नेस लोन के बारे में जानिये, बिज़नेस लोन के लिए पात्रता शर्तें

एक व्यवसाय के लिए पर्याप्त मात्रा में निवेश की ज़रूरत पड़ती है। इसकी मदद से व्यवसाय के विस्तार से जुड़े कई सारे खर्चे पूरे किये जाते हैं, जैसे कि मौजूदा उत्पादों / सेवाओं की नई श्रेणियां जोड़ना आदि। ऐसी स्थिति में बिजनेस लोन यानि व्यवसाय ऋण काफी मददगार साबित हो सकते हैं क्योंकि इनसे कंपनियों को बेहद ज़रूरी आर्थिक सहायता मिलती है जिसके साथ वे अपने बाज़ारों में अधिक से अधिक मज़बूत स्थिति हासिल कर सकते हैं। अन्य ऋणों की तरह बिजनेस लोन भी एक प्रकार का ऋण होता है जो कि किसी कंपनी को एक निश्चित अवधि के अंदर ऋणदाता को लौटाना होता है। यह अवधि लोन एग्रिमेंट में दर्ज नियम एवं शर्तों के अनुसार होती है। स्टार्ट-अप बिजनेस लोन कई प्रकार की ज़रूरतों के लिए लिया जा सकता है, जैसे एक नई फर्म शुरु करना, अपने व्यवसाय का विस्तार करना, अपने डीलर या वेंडर को भुगतान करना आ भारत में बिजनेस लोन का बड़ा फायदा यह है कि अक्सर इसके लिए किसी सुरक्षा जमानत की अनिवार्यता नहीं होती। अधिकतर बैंक कम से कम प्री-पेमेंट शुल्कों के साथ बिजनेस लोन प्रदान करते हैं। इसके अलावा कई विशेष स्कीमें भी मौजूद हैं, जिनमें महिलाओं के लिए बिजनेस लोन, छोटे व्यवसायों के लिए मुद्रा स्कीम और प्रोफेशनल्स के लिए बिजनेस लोन शामिल हैं। एक अन्य फायदा यह है कि अगर इस ऋण को नहीं चुकाया जाता है तो व्यवसाय के मालिक को अकेले ही सभी पेनल्टी का बोझ उठाना नहीं पड़ेगा बल्कि बिजनेस लोन की वसूली के लिए पूरी कंपनी को ही बेच दिया जाता है।

बिजनेस लोन की विशेषताएं
बिजनेस लोन कम से कम रु. 30,000 का लिया जा सकता है। इसके तहत बड़ी राशि का लोन भी लिया जा सकता है, जो कि व्यवसाय के आकार, व्यवसाय के घोषित लाभ, व्यवसाय की मौजूदा देनदारियों आदि विभिन्न पहलूओं के आधार पर दिये जाते हैं।

भारत में बिजनेस लोन देने की प्रक्रिया पर्सनल लोन जैसी होती है। इसलिए बिजनेस लोन प्राप्त करने हेतु कागजी कार्रवाई सरल है और इसमें अन्य ऋणों की तुलना में समय भी कम लगता है।

. बिजनेस लोन की अवधि 12 महीने से 48 महीने के बीच हो सकती है। अधिकतर मामलों में ऋण लेने वाला व्यक्ति/कंपनी एक मामूली प्री-पेमेंट शुल्क देकर प्री-पेमेंट का फायदा उठा सकते हैं, जिससे ऋणधारक को अतिरिक्त सुविधा मिल जाती है।
.
बिजनेस लोन की ब्याज दरें 17% से 25% के बीच हो सकती हैं। इसका फैसला विभिन्न पहलूओं के आधार पर होता है, जो आवेदक की पात्रता, व्यवसाय का आकार, आवेदक की क्रेडिट रेटिंग/स्कोर, व्यवसाय का प्रकार और ऋण राशि/अवधि तक ही सीमित नहीं होता।

बिजनेस लोन की विभिन्न श्रेणियां
ओवर ड्राफ्टः ओवरड्राफ्ट का मतलब होता है एक करंट अकाउंट में जमा राशि से अधिक निकासी की सुविधा। सरल शब्दों में कहें तो ओवर ड्राफ्ट सुविधा होने पर एक करंट अकाउंट धारक अपनी व्यावसायिक ज़रूरतों को पूरा करने के लिए अपने खाते में जमा राशि से अधिक पैसे निकाल सकता है। इस अतिरिक्त राशि के लिए बैंक और खाता धारक के बीच मान्य हुई ब्याज दर लगाई जाएगी बशर्ते यह राशि ओवरड्राफ्ट एग्रिमेंट की सीमा के अंदर हो। इसमें यह फायदा भी है कि अगर व्यवसाय द्वारा ओवरड्राफ्ट सुविधा का इस्तेमाल न किया जाए, तो कोई भी ब्याज नहीं देना होगा।

टर्म लोनः वर्तमान में कई प्रकार के टर्म लोन दिये जाते हैं, जैसे शॉर्ट टर्म लोन, लॉन्ग टर्म लोन और इंटरमीडिएट टर्म लोन। एक व्यवसायी अपनी ज़रूरत एवं आर्थिक स्थिति के अनुसार यह लोन प्राप्त कर सकता है। आमतौर पर एक शॉर्ट टर्म लोन के लिए न्यूनतम अवधि 3 वर्ष होती है, जबकि लॉन्ग टर्म लोन के लिए 10-15 वर्ष की अवधि होती है। ऋण अवधि के हिसाब से इन पर लागू ब्याज दरें भी अलग-अलग हो सकती हैं। अधिकतर मामलों में ऋण लेने वाला व्यक्ति/कंपनी अगर ऋण अवधि से पहले पूरा भुगतान करने का फैसला करता है तो ऋणदाता की ओर से एक प्री-पेमेंट पेनल्टी लगाई जाती है।
टर्म लोन दो प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है – अनसिक्योर्ड बिजनेस लोन और सिक्योर्ड बिजनेस लोन। एक सिक्योर्ड बिजनेस लोन के लिए सुरक्षा जमानत के रूप में व्यावसायिक / आवासीय / औद्योगिक संपत्ति और मशीनें स्वीकार की जाती हैं। आमतौर पर ऐसे सिक्योर्ड बिजनेस लोन की ब्याज दरें अनसिक्योर्ड बिजनेस लोन की तुलना में कम होती हैं क्योंकि बैंकों द्वारा इनमें कम जोखिम माना जाता है।

बिल डिस्काउंटिंगः इस सुविधा के होने पर अपने व्यवसाय में की गई बड़ी राशि की बिक्री का भुगतान तुरंत मिल जाता है। इसके लिए एक व्यवसाय द्वारा उधार की गई बिक्री पर डिस्काउंट दिया जाता है। इसके लिए व्यावसायिक ट्रांजैक्शन की पुष्टि करने वाले ज़रूरी दस्तावेज जमा करने पड़ते हैं, जैसे इनवॉइस, परिवहन रसीदें, लैंडिंग बिल आदि।

लेटर ऑफ क्रेडिटः विक्रेता और खरीदार के बीच हुई एक व्यवसायिक प्रक्रिया में खरीदार के बैंक द्वारा एक लेटर ऑफ क्रेडिट जारी किया जाता है। इसमें यह घोषित किया जाता है कि उक्त बिक्री और माल की डिलीवरी से जुड़े सभी नियम एवं शर्तें पूरी हो जाने के बाद विक्रेता को पूरा भुगतान मिल जाएगा। यह स्थिति अक्सर अंतराष्ट्रीय व्यवसाय से जुड़े ट्रांजैक्शन में आती है, जहां विक्रेता और खरीदार अक्सर एक दूसरे को नहीं जानते हैं और इसलिए व्यावसायिक ट्रांजैक्शन बैंक की क्रेडिट प्रतिष्ठा के आधार पर किये जाते हैं।

एक लेटर ऑफ क्रेडिट के आधार पर भुगतान प्राप्त करने के लिए विक्रेता द्वारा प्रस्तुत किये जाने वाले आवश्यक दस्तावेजों में शामिल हैं:
. इनवॉइस और लैंडिंग बिल जैसे व्यावसायिक दस्तावेज
. परिवहन दस्तावेज
. बीमा प्रमाणपत्र
. ओरिजिन सर्टिफिकेट, इंस्पेक्शन सर्टिफिकेट, कानूनी दस्तावेज आदि.

बैंक गारंटीः बैंक गारंटी एक खास प्री-अप्रूव्ड सिक्योर्ड बिजनेस लोन होता है, जो विभिन्न प्रकार के कारोबारियों द्वारा प्राप्त किया जा सकता है। इनमें छोटे एवं मद्यम उद्योग जैसे कि पब्लिक लिमिटेड कंपनियां, प्राइवेट लिमिटेड कंपनियां, पार्टनरशिप फर्म और प्रोपराइटरशिप फर्म शामिल होती हैं। आमतौर पर बिजनेस लोन किसी सुरक्षा जमानत के बदले दिये जाते हैं। इसके लिए व्यावसायिक, औद्योगिक और रहिवासी संपत्तियां स्वीकार की जाती हैं। बैंक गारंटी एक प्रकार से ऋणदाता की ओर से यह वचन देती है कि जिस व्यवसाय के लिए गारंटी दी गई है, अगर वह अपनी मौजूदा वित्तीय देनदारी पूरी नहीं कर पाता है, तो ऋणदाता द्वारा उसकी भरपाई की जाएगी। इस प्रकार से बैंक गारंटी एक बढ़ते व्यवसाय को ऋण लेने, उपकरण तथा अतिरिक्त सामग्री की उधार खरीदारी करने में सक्षम बनाती है।

महिला उद्यमियों के लिए विशेष स्कीम
इन दिनों बैंकों द्वारा महिला उद्यमियों के लिए आकर्षक स्कीमें पेश की जा रही हैं। महिलाओं के लिए विशेष तौर पर बनाए गए यह बिजनेस लोन उन्हें ब्याज दरों, स्वीकार्य लोन राशि और अनिवार्य सुरक्षा जमानत के मामले में राहत प्रदान करते हैं। बिजनेस लोन के अलावा भी कुछ बैंकों में ऐसे विशेष विभाग चलाए जाते हैं, जहां महिला उद्यमियों को व्यावसायिक परामर्श, प्रशिक्षण एवं समाधान उपलब्ध कराते हैं। इसके साथ ही उन्हें अपने उत्पादों के प्रदर्शन एवं मार्केटिंग हेतु विभिन्न तरीकों के बारे में भी बताया जाता है। बैंकों के यह विशेष विभाग महिलाओं को उनके व्यवसाय की वास्तविक संभावनाएं दिखाने के लिए ऐसे ही अन्य व्यवसाय का उदाहरण भी देते हैं। किसी कंपनी में अगर महिला उद्यमियों की मालिकाना हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से कम होती है, तो उन्हें महिला विशेष स्कीमों का लाभ उठाने की अनुमति नहीं दी जाती। ऐसे ऋणों के कुछ प्रमुख उदाहरण हैं अन्नपूर्णा, महिलाओं के लिए मुद्रा लोन आदि।<

मुद्रा योजनाः
यह सरकार द्वारा प्रायोजित एक विशेष प्रकार की बिजनेस लोन स्कीम है, जो भारत के छोटे एवं मध्यम व्यवसाय और महिलाओं द्वारा संचालित व्यवसायों के लिए बनाई गई है। यह ऋण राशि एक बैंकिंग संस्थान की ओर से दी जाती है, लेकिन इसके लिए भारत सरकार की ओर से बैंक को धन राशि प्रदान की जाती है। इसलिए बैंकों द्वारा अपने ग्राहकों को सामान्य बिजनेस लोन की तुलना में कम ब्याज दर पर मुद्रा लोन पेश किया जाता है। यह स्कीम खास तौर पर पूरे भारत के छोटे व्यवसायों के लिए बिजनेस लोन को अधिक किफायती और आसानी से उपलब्ध कराने के लिए तैयार की गई है।

बिजनेस लोन के लिए पात्रता शर्तें
अगर एक व्यवसायी को किसी बैंक में बिजनेस लोन के लिए आवेदन करना है और वह चाहता है कि बैंक उसके आवेदन पर विचार करें तो बैंक की पात्रता शर्तों को पूरा करना आवश्यक है। वैसे तो एक ऋणदाता की पात्रता शर्तें दूसरे ऋणदाता से भिन्न हो सकती हैं, लेकिन अनसिक्योर्ड बिजनेस लोन के लिए अधिकतर ऋणदाताओं की पात्रता शर्तें मुख्य तौर पर समान होती हैं। सिक्योर्ड बिजेनस लोन के लिए सुरक्षा जमानत के रूप में गिरवी रखी जाने वाली संपत्ति का मूल्य, लोन की विभिन्न विशेषताएं तय करने में प्रमुख भूमिका निभाता है। अगर कोई व्यक्ति जल्दी बिजनेस लोन पाने के लिए सभी ज़रूरी पात्रता शर्तों को पूरा करता है, तो उसके लोन को मंज़ूरी मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसलिए एक बिजनेस लोन के लिए आवेदन करने से पहले एक संभावित आवेदक को लागू योग्यता शर्तों के बारे में ज़रूर पता कर लेना चाहिए। बिजनेस लोन प्राप्त करने के लिए निम्न बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है। निम्न आवेदक बिजनेस लोन पाने के लिए पात्र होंगे:

. स्वयं का व्यवसाय करने वाले व्यवसायी / प्रोफेशनल्स
. लिमिटेड अथवा प्राइवेट लिमिटेड फर्म
. मैन्युफैक्चरर, रीटेलर या सर्विस प्रोवाइडर

उपरोक्त सभी आवेदकों को बिजनेस लोन प्राप्त करने के लिए निम्न पात्रता शर्तों को पूरा करना होगाः
. व्यवसाय मालिक / प्रोफेशनल की उम्र 21 वर्ष से 65 वर्ष के बीच होनी चाहिए
. व्यवसाय के संचालन को कम से कम 3 वर्ष पूरे होने चाहिए
. व्यवसाय का टर्नओवर कम से कम रु. 50 लाख प्रति वर्ष होना चाहिए और कम से कम 2 लाख का मुनाफा होना चाहिए। हालांकि ऋणदाता कम राशि वाले लोन प्रदान करने पर भी विचार कर सकते हैं।
. व्यवसाय मालिक / व्यवसाय को पिछले 3 वर्ष के आयकर रिटर्न स्टेटमेंट जमा करना ज़रूरी है।
. एक बिजनेस लोन आवेदन में व्यवसाय का भागीदार सह-आवेदक यानि को-एप्लिकेंट हो सकता है। ऐसा करने की सलाह भी दी जाती है क्योंकि इससे अधिक राशि का लोन प्राप्त करने और लंबी ऋण अवधि एवं बेहतर ब्याज दर की मिलने की संभावना बढ़ती है।

बिजनेस लोन के लिए आवश्यक दस्तावेज
बिजनेस लोन लेने की योजना बना रहे एक आवेदक को निम्न दस्तावेज जमा करने होंगे।

. पिछले 3 वर्षों के आयकर रिटर्न स्टेटमेंट
. बैंक अकाउंट स्टेटमेंट
. व्यवसाय का प्रमाण
. पेशे से जुड़े लागू प्रमाणपत्र
. व्यवसायिक कार्यों के लिए इस्तेमाल किये जा रहे साधनों/उपकरणों के स्वामित्व का प्रमाण
. आवेदकों के ताज़ा फोटो
. पहचान का प्रमाण जैसे आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, पैन कार्ड, कंपनी पंजीकरण प्रमाणपत्र आदि।
.

आवेदक के निवास का प्रमाण
. सह-आवेदक होने पर उनके केवाईसी दस्तावेज। अगर आवदेक द्वारा महिलाओं के लिए बिजनेस लोन की श्रेणी चुनी जाती है, तो निवेशक/आवेदक द्वारा उक्त व्यवसाय के स्वामित्व में एक महिला की प्रमुख हिस्सेदारी के प्रमाण देने होंगे।

मुझे कितना बिजनेस लोन मिल सकता है?
बिजनेस लोन की राशि व्यवसाय के मूल्यांकन, व्यवसाय के सालाना मुनाफे, किस उद्योग में व्यवसाय संचालित हो रहा है और साथ ही इस आधार पर भी तय होता है कि व्यवसाय का संचालन कितने वर्षों से हो रहा है। ऋणदाताओं की ओर से व्यवसाय के नगदी प्रवाह और मुनाफा कमाने के अन्य पहलूओं की जांच भी की जाती है। ऋणदाता की ओर से लागू पात्रता शर्तों पर विचार कर लेने के बाद बिजनेस लोन का आवेदन स्वीकार किया जाता है अथवा अस्वीकार किया जाता है। लेकिन, एक व्यवसाय की लाभ कमाने की क्षमता एक बिजनेस लोन को मंज़ूरी मिलने की मुख्य शर्त होती है क्योंकि इसी से तय होता है कि संबंधित व्यवसाय द्वारा किस तरह ईएमआई भुगतान और व्यवसाय से जुड़े खर्चों की व्यवस्था की जाएगी।

एक बिजनेस लोन के लिए मंज़ूरी कैसे प्राप्त करें?
किसी अन्य ऋण की तरह ही बिजनेस लोन देने वाली वित्तीय कंपनियां एक व्यवसाय को ऋण दिये जाने हेतु विश्वसनीयता यानि क्रेडिट प्रतिष्ठा का आकलन करती हैं। ऋणदाता कंपनियों द्वारा एक व्यवसाय की ऋण चुकाने की क्षमता की भी जांच की जाती है। इस आकलन हेतु बैंकों द्वारा आमतौर पर आवेदक / आवेदक कंपनी की फाइनेंशियल हिस्ट्री और यहां लागू होने वाले सभी व्यावसायिक रिकॉर्ड भी देखे जाते हैं।

किसी स्टार्ट-अप को लोन प्राप्त करने में मुश्किल पेश आ सकती है क्योंकि छोटी फाइनेंशियल हिस्ट्री वाली कंपनियों को ऋण देना बैंकों के लिए मुश्किल होता है। ऐसे मामले में ऋणदाता की ओर से आवेदक को पर्सनल लोन दिया जाता है, जिसे वह अपना व्यवसाय शुरु करने या व्यवसाय का विस्तार करने के लिए इस्तेमाल कर सकता है। एक व्यक्ति को बिजनेस लोन प्रदान करने के लिए बैंकों द्वारा आमतौर पर इस व्यक्तिगत आवेदक का पहले की आर्थिक स्थिति, क्रेडिट हिस्ट्री, देनदारियां, अन्य मौजूदा ऋण (अगर कोई हो), शिक्षा योग्यता और व्यवसाय की योजना देखी जाती है। एक सुनियोजित व्यवसाय योजना आवेदक के व्यवसाय के प्रति उनका समर्पण और व्यवसाय में निवेश की गई पूंजी दिखाती है। बैंक द्वारा इन चीज़ों पर भी ध्यान दिया जाता है।

बैंकों ने अच्छे क्रेडिट स्कोर/क्रेडिट रेटिंग वाले आवेदकों और उनके मौजूदा ऋणों के भुगतान के रिकॉर्ड के आधार पर भी लोन को मंज़ूरी देने की योजनाएं भी शुरु की हैं। यह कारक विशेष मामलों में लागू होने वाली ब्याज दर को भी प्रभावित करते हैं। इसके अलावा, आवेदकों को यह भी ध्यान में रखना होगा कि एक से अधिक लोन के लिए आवेदन न करें, ऐसा करने से उन्हें अतिरिक्त लोन मिलना मुश्किल हो जाएगा क्योंकि इससे कंपनी की संपूर्ण देनदारी बढ़ जाएगी।
बिजनेस लोन के लिए बीमा होना भी मददगार होता है। अपने व्यवसाय के उपकरणों, व्यवसाय की इमारत, कच्चे माल का स्टॉक, तैयार माल आदि का बीमा होने से कंपनी को अतिरिक्त आर्थिक स्थिरता हासिल होती है। बैंकों द्वारा एक व्यवसाय से जुड़े सुरक्षा एवं जोखिम पहलूओं को हमेशा गंभीरता से लिया जाता है। यहां तक कि कुछ बैंक संभावित बिजनेस लोन आवेदकों के आवेदन मंज़ूर करने से पहले उनके सामने बीमा कराने की शर्त भी रखते हैं। ऐसा खासकर तब होता है जब एक छोटे व्यवसाय द्वारा आवेदन किया जाए।

इसलिए, एक लोन के लिए किसी बैंक के पास जाने से पहले यह महत्वपूर्ण होता है कि अच्छी तरह और पेशेवर ढंग से योजना बनाई जाए। आवेदक को स्वयं भी अपनी व्यवसाय योजना का आकलन करना चाहिए और संबंधित बाज़ार के बारे में पूरी जानकारी रखने के साथ यह भी रणनीति बनानी ज़रूरी है कि अपने व्यवसायिक लक्ष्य कैसे हासिल कर पाएंगे।
आगे भविष्य में बैंकों द्वारा मीडियम और स्मॉल बिजनेस लोन के साथ लॉन्ग टर्म कैपिटल लोन पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा कम विकसित शहरों एवं राज्यों में ऋण सुविधाओं के विस्तार पर भी ज़ोर दिया जाएगा, ताकि छोटे व्यवसायों के व्यापक विकास को बढ़ावा दिया जा सके।

बिजनेस लोन के लिए आवेदन करने से पहले प्रमुख ऋण आवश्यकताओं की सूची यहां दी गई है। इन्हें ध्यान में रखना ज़रूरी है।
. बिजनेस लोन आवेदक के लिए बेहतर होगा कि उसके पास लोन हेतु आवेदन करने से पहले कम से कम पांच वर्षों तक ऋण चुकाने का अच्छा रिकॉर्ड मौजूद हो।
. यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि लोन के लिए आवेदन करने वाला आवेदक / आवेदक व्यवसाय लोन की पात्रता शर्तों, बिजनेस लोन की आवश्यकताओं आदि नियमों को पूरा करता हो। उनके पास सभी आवश्यक दस्तावेज भी तैयार होने चाहिए।
. अगर ऋणदाता की ओर से आवेदक को नए उपकरण/इमारत/ऑफिस के लिए डाउन पेमेंट करने के लिए कहा जाए तो उनके पास पर्याप्त धन राशि तैयार होनी चाहिए।
. एक बिजनेस लोन के लिए आवेदन करते समय आवेदक द्वारा कंपनी की आर्थिक स्थिति और उसके पूर्व प्रदर्शन सहित संपूर्ण नगदी प्रवाह का स्टेटमेंट तैयार कर रखना चाहिए।
. एक बिजनेस लोन के लिए आवेदन करते समय आवेदक को अपने व्यवसाय के आइडिया और प्रेजेंटेशन पर ध्यान देना ज़रूरी है और यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि व्यवसाय से की जाने वाली अपेक्षाएं संभव और व्यवहारिक हों।

एक नया व्यवसाय शुरु करना या अपने मौजूदा व्यवसाय का विस्तार करना बेहद महत्वाकांक्षी फैसला होता है और इसके लिए बहुत सारे प्रयास और योजनाएं बनानी पड़ती है। तब जाकर आप इस प्रतिस्पर्धी दुनिया में टिक पाएंगे। उपरोक्त सूची के साथ छोटे एवं बड़े व्यवसाय / आंत्रप्रेन्योर्स भी अपने व्यवसायों के लिए आवश्यक धनराशि जुटाने का सही रास्ता चुन सकेंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *